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उनका अपना एजेंडा; RSS पर पाबंदी वाली अमेरिकी संस्था की मांग पर भड़की सरकार, US में क्या चल रहा

भारत सरकार ने अमेरिकी संस्था के बयान पर तीखा रिएक्शन दिया है. भारत सरकार का कहना है कि यह USCIRF का अपना एजेंडा है.

उनका अपना एजेंडा; RSS पर पाबंदी वाली अमेरिकी संस्था की मांग पर भड़की सरकार, US में क्या चल रहा
  • मोहन भागवत अगस्त के अंत में अमेरिका के दौरे पर जाने वाले हैं, इससे पहले विवादित बयान सामने आए हैं
  • अमेरिका के USICRF ने आरएसएस पर पाबंदी लगाने की सिफारिश की है, जिससे राजनीतिक विवाद बढ़ा है
  • भारत सरकार ने इस आयोग के बयान को पूर्वाग्रहपूर्ण और बेबुनियाद करार देते हुए उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं
नई दिल्ली:

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत 29 अगस्त को अमेरिका जाने वाले हैं. इससे पहले अमेरिका में आरएसएस को लेकर माहौल गरमाया हुआ है. अमेरिका के अंतराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने आरएसएस को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिस पर बवाल मच गया है. इस संस्था ने सिफारिश की है कि आरएसएस पर पाबंदी लगाई जाए. मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे से ठीक पहले ऐसी सिफारिश से विवाद तेज हो गया है. इस बीच भारत सरकार ने अमेरिकी संस्था के बयान पर तीखा रिएक्शन दिया है. भारत सरकार का कहना है कि यह USCIRF का अपना एजेंडा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह संगठन ही पूर्वाग्रह से ग्रस्त है. 

उन्होंने कहा, 'हम सभी जानते हैं कि यह संगठन भारत के बारे में पहले भी विवादित राय रखता रहा है. इसका अपना एजेंडा है और पूर्वाग्रह से ग्रसित है.' उन्होंने कहा कि इस संगठन की कोई विश्वसनीयता नहीं है. हमें इससे दूर ही रहना चाहिए. इस तरह USCIRF के बयान पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. यही वह संस्था है, जो पहले कई बार भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर चिंता जता चुकी है. USCIRF के कमिश्नर जेने मिल्स ने कहा था कि आरएसएस के लोगों के साथ कूटनीतिक वार्ताएं नहीं होनी चाहिए. यही नहीं उनका कहना था कि संघ से जुड़े ऐसे लोगों के साथ भी कूटनीतिक वार्ता नहीं होनी चाहिए, जो भले ही सरकार का हिस्सा हों. 

उनका कहना था कि अमेरिकी सरकार को आरएसएस के लोगों पर पाबंदी लगाने का विचार करना चाहिए. USCIRF के चेयर आसिफ महमूद ने कहा था कि आरएसएस भारत के उन संगठनों का मुख्य संस्थान है, जो अल्पसंख्यकों पर हमलों में शामिल रहे हैं. इन दोनों के बयानों को USCIRF ने अपने एक्स अकाउंट पर शेयर किया था. इससे पहले इसी साल मार्च में भी इस संस्था ने भारत में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का आरोप लगाया था. हालांकि भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे सभी आरोप बेबुनियाद, मनगढ़ंत और पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं. 

इस बीच अमेरिका में आरएसएस के समर्थन में भी आवाज उठी है. अमेरिका में हिंदू समुदाय के हितों के लिए काम करने वाली संस्था HinduPACT ने आरोप लगाया है कि USCIRF अपना एजेंडा चला रहा है. उसका कहना है कि यह आयोग भारत के खिलाफ एजेंडा चलाने का मंच बन चुका है. अकसर अल्पसंख्यकों के नाम पर यह भारत और आरएसएस की गलत तस्वीर पेश करता रहा है. संस्था ने कहा कि इस बार फिर ऐसी ही कोशिश की जा रही है. भारत की परंपरा का सम्मान करने वाले एक संगठन की आपराधिक छवि पेश करने की कोशिश हो रही है. हिंदू समाज के नेतृत्व को लांछन लगाने का यह प्रयास है. बता दें कि मोहन भागवत अमेरिका के अलावा कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों के दौरे पर भी जा रहे हैं. 

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