भारतीय सेना ने अपनी वर्दी से जुड़े नियमों में कई चीजें बदल दी हैं. इसके लिए भारतीय सेना ने नया कोड लागू किया गया है, जिसके तहत ब्रिटिश काल की कई चीजों को हटा दिया गया है. सेना ने 'रॉयल' जैसे पुराने शब्दों का इस्तेमाल भी बंद कर दिया है. इतना ही नहीं, सेना ने सिविल फॉर्मल ड्रेस के तौर पर स्वदेशी 'बंदी' जैकेट को भी शामिल किया है.
सेना की वर्दी में इन बदलावों के बारे में हाल ही में जारी 'आर्मी यूनिफॉर्म 2026' मैनुअल में बताया गया है. नए ड्रेस कोड में औपनिवेशिक दौर के बचे-खुसे प्रतीकों और शब्दावली को हटा दिया गया है. मैनुअल में कहा गया है कि देश की भावनाओं और बदलती संप्रभु पहचान को ध्यान में रखते हुए कई सुधार शामिल किए गए हैं.
क्या-क्या अहम बदलाव हुए?
- बंदी जैकेट: भारतीय सेना ने अफसरों के लिए फॉर्मल सिविल ड्रेस के तौर पर स्वदेशी बंदी जैकेट को शामिल किया है. इस जैकेट को पूरी आस्तीन वाली शर्च, मैचिंग फॉर्मल ट्राउजर और बंद जूते के साथ पहना जाएगा.

- बैटल जैकेट: सेना ने सर्दियों के लिए एक नई ड्रेस शुरू की है, जिसमें बैटल जैकेट शामिल है. यह बैटल जैकेट धीरे-धीरे मौजूदा विंटर यूनिफॉर्म की जगह लेगी और यह बदलाव जून 2029 तक पूरा होने की उम्मीद है. इस जैकेट को सभी रैंक के सैनिकों के लिए सर्दियों के आउटवियर के तौर पर शुरू किया गया है.
- तलवार: सेना ने औपचारिक मौकों पर तलवार ले जाने के लिए नियमों में बदलाव किया गया है, जिससे रिव्यूइंग अफसरों के लिए तलवार ले जाना अब वैकल्पिक हो गया है. अब गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, आर्मी डे परेड और गार्ड ऑफ ऑनर जैसे कार्यक्रमों के दौरान केवल परेड कमांडर, टुकड़ी कमांडर और डेजिग्नेटेड अधिकारी ही तलवार साथ रखेंगे.
- पाउच बेल्ट हटी: आर्मी ने यूनिफॉर्म में बदलाव करते हुए मेस ड्रेस नंबर 5 और 6 से पाउच बेल्ट हटा दिए हैं.

और क्या-क्या बदलाव हुए?
नए मैनुअल के तहत सैनिकों के लिए कई गाइडलाइंस भी जारी की गई हैं. इसमें यूनिफॉर्म पहने हुए अजीबोगरीब हेयरस्टाइल, बगैर इजाजत के दाढ़ी रखने, विजिबल इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, टैटू, शरीर पर पियर्सिंग और कॉस्मेटिक पर रोक लगाई गई है.
इसके अलावा बिना इजाजत के किसी राजनीतिक, धार्मिक या विरोध प्रदर्शन वाले कार्यक्रमों, शादियों और निजी पार्टियों में भी यूनिफॉर्म पहनने पर शामिल होने पर पाबंदी लगा दी गई है.
पहले औपनिवेशिक दौर के नाम बदले थे
भारतीय सेना लगाातर औपनिवेशिक दौर की परंपराओं को खत्म कर रही है. इस साल की शुरुआत में सेना ने बड़ा कदम उठाते हुए 246 सड़कों और इमारतों के नाम बदले थे. ये वो जगहें थीं जिनके नाम अंग्रेज अफसरों के नाम पर थे. इनकी जगह भारतीय सेना से वीर बलिदानों के नाम पर रखे गए थे.
इससे पहले 24 फरवरी 2023 को सेना ने औपनिवेशिक दौर की कई प्रथाओं को बंद कर दिया था, जिनमें कार्यक्रमों में घोड़े वाली बग्घियों का इस्तेमाल, रिटायरमेंट के समय औपचारिक विदाई समारोह और डिनर के दौरान पाइप बैंड का इस्तेमाल शामिल था.
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