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आसमान का नया 'ब्रह्मास्त्र', 5th Gen के साथ 6th जनरेशन विमानों की तैयारी, भविष्य की जंग के लिए भारत का मास्टरप्लान

भारतीय सेना भविष्य के युद्धों के लिए तैयार हो रही है. संसदीय समिति ने भारत को 5वीं पीढ़ी के AMCA के साथ सिक्स्थ जनरेशन विमानों की तैयारी तुरंत शुरू करने की सिफारिश की है.

आसमान का नया 'ब्रह्मास्त्र', 5th Gen के साथ 6th जनरेशन विमानों की तैयारी, भविष्य की जंग के लिए भारत का मास्टरप्लान
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  • संसदीय समिति ने भारत को 6th Gen लड़ाकू विमानों के त्वरित विकास की सिफारिश की है
  • 6G विमान ड्रोन नियंत्रण और लेजर हथियारों से लैस होंगे तथा फ्लाइंग सुपरकंप्यूटर की तरह कार्य करेंगे
  • भारत को नियर-स्पेस अभियानों के लिए तैयार रहना होगा ताकि चीन जैसी देशों की बढ़त को चुनौती दी जा सके

दुनियाभर के देश अपने हथियारों को एडवांस बनाने पर काम कर रहे हैं. अब जंग सिर्फ मैदानों में नहीं बल्कि डेटा और इनविजिबिलिटी पर भी लड़ी जाती है. भारत भी इस जंग में आगे खड़ा है. जब दुनिया के गिने-चुने देश 5वीं पीढ़ी (5th Gen) के विमानों को मोर्चे पर उतार रहे हैं, तब भारत का 'सिक्स्थ जनरेशन' (6G) की तैयारी करना एक सामरिक मजबूरी है. यह केवल एक नया लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि एक ऐसा फ्लाइंग वार-रूम होगा जो दुश्मन के दिखने से पहले उसे मिटाने की क्षमता रखेगा. संसदीय समिति की यह सिफारिश भारत को रक्षा क्षेत्र में लीडर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा.

संसदीय समिति ने क्या-क्या सिफारिश की?

बीजेपी सांसद राधा मोहन सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने आज संसद में पेश अपनी 20वीं रिपोर्ट में भारत को 'अजेय' बनाने के लिए एक ऐसा ही ब्लूप्रिंट रखा है. रिपोर्ट के अनुसार, 

  • दुनिया जब 5वीं पीढ़ी की बात कर रही है, समिति ने भारत को सिक्स्थ जनरेशन (6G) लड़ाकू विमानों को तत्काल डेवलेप करने की सलाह दी है. ये विमान न केवल रडार से बचेंगे, बल्कि खुद ड्रोन के झुंड को कंट्रोल करेंगे और लेजर हथियारों से लैस होंगे.
  • समिति ने काइनेटिक यानी शारीरिक और पारंपरिक बल और नॉन-काइनेटिक यानी साइबर हमले, डेटा युद्ध और मनोवैज्ञानिक ऑपरेशंस के संगम पर जोर दिया है.
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि वायुसेना की जिम्मेदारी अब केवल आसमान तक सीमित नहीं है. भारत को नियर-स्पेस अभियानों के लिए तैयार रहना होगा, जो अंतरिक्ष क्षमताओं में चीन जैसे देशों की बढ़त को चुनौती दे सके.
    6th Gen Fighter Jets

    6th Gen Fighter Jets
    Photo Credit: AI Image

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5G के साथ 6G की छलांग कितनी मुश्किल?

भारत के लिए 6 जनरेशन का यह रास्ता दोहरी तलवार पर चलने जैसा है. एक तरफ हमें अपना 5वीं पीढ़ी का विमान AMCA समय पर पूरा करना है, वहीं दूसरी ओर 6G की रेस में भी शामिल होना है. 6G विमानों के लिए खास अडैप्टिव साइकिल इंजन और क्वांटम सेंसर चाहिए. भारत को इसके लिए फ्रांस या अमेरिका जैसे देशों की मदद लेनी पड़ सकती है. 6G का मतलब सिर्फ एक तेज विमान नहीं, बल्कि एक फ्लाइंग सुपरकंप्यूटर है. ऐसे में भारत की आईटी शक्ति यहां गेम-चेंजर साबित हो सकती है.

एक तरफ जहां चीन पहले से ही अपनी 6G तकनीक और स्पेस कमांड पर अरबों डॉलर खर्च कर रहा है. ऐसे में भारत के लिए यह सिफारिश केवल विकल्प नहीं, बल्कि अस्तित्व की जरूरत है. समिति ने मंत्रालय से नियर-स्पेस ऑपरेशंस के लिए अतिरिक्त फंड और रोडमैप की मांग की है. अब फैसला सरकार को करना है.

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प्रशांत
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