- भारत ने ओडिशा के चांदीपुर टेस्ट रेंज में स्वदेशी सूर्यास्त्र रॉकेट का सफलतापूर्वक परीक्षण किया
- सूर्यास्त्र रॉकेट की सटीकता बेहद उच्च है, जिसने 300 किलोमीटर दूरी पर केवल दो मीटर का CEP दिखाया
- यह रॉकेट दुश्मन के बंकरों, कमांड सेंटरों और सैन्य ठिकानों को पिन-पॉइंट सटीकता से नष्ट कर सकता है
भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. भारत ने अपने अचूक 'सूर्यास्त्र' रॉकेट का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है. रॉकेट सिस्टम का प्रदर्शन बुधवार को ओडिशा के चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में किया गया. यह भारत का स्वदेशी रॉकेट सिस्टम है. सूर्यास्त्र को एक प्राइवेट डिफेंस कपंनी नाइब लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया है. इस रॉकेट की सबसे बड़ी खासियस इसकी अचूक मारक क्षमता है. यह रॉकेट दुश्मन के बंकरों, कमांड सेंटरों और सैन्य ठिकानों को पिन-पॉइंट सटीकता के साथ पूरी तरह नष्ट कर सकता है.
300 किमी दूर सटीकता से निशाना
सूर्यास्त्र रॉकेट के दो खास अलग-अलग टेस्ट किए गए. पहले टेस्ट में इसे 300 किमी दूर टारगेट पर दागा गया, यहां इसने महज 2 मीटर का सर्कुलर एरर प्रोबाबिलिटी यानी CEP हासिल किया. यह इसकी अचूक सटीकता को बताता है. वहीं दूसरे टेस्ट में रॉकेट को 150 किलोमीटर की रेंज पर दागा गया, तो इसने अपने लक्ष्य से मात्र 1.5 मीटर के दायरे में सटीक प्रहार किया. यह परीक्षण बताता है कि सूर्यास्त रॉकेट 300 किलोमीटर दूरी पर दुश्मन के ठिकानों पर सटीक प्रहार कर सकता है.
#WATCH | In a major boost for Indian defence forces, private sector firm Nibe Limited has successfully carried out the firing demonstration of the Suryastra rockets of 150 km and 300 Km range in ITR Chandipur Orissa. The rockets achieved CEP of 1.5 meters and 2 meters… pic.twitter.com/9qgVI913ap
— ANI (@ANI) May 20, 2026
क्या है 'सूर्यास्त्र' की ताकत?
सूर्यास्त रॉकेट सिस्टम एक यूनिवर्सल मल्टी-कैलिबर लॉन्चर है. यानी इस एक ही प्लेटफॉर्म से 150 किमी, 300 किमी के रॉकेट और साथ ही 100 किमी तक मार करने वाले घातक रॉकेट और ड्रोन दागे जा सकते हैं. अमेरिका के पास भी इसी तरह का एक HIMARS रॉकेट सिस्टम है. अब भारत का अपना स्वदेशी सूर्यास्त्र रॉकेट भी वैसी सटीकता के साथ दुश्मन को तबाह करने की क्षमता रखता है.
इस रॉकेट सिस्टम से भारतीय सेना की ताकत बढ़ेगी. इसकी तैनाती के बाद भारतीय सेना बिना सीमा पार किए, दुश्मन के कमांड सेंटर, रडार और हथियारों के डिपो को पलक झपकते ही तबाह कर सकेगी. इसने सीमाओं पर सेना की आर्टिलरी की ताकत को कई गुना बढ़ा दिया है.
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