- ऑस्ट्रेलिया के डार्विन स्थित रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फ़ोर्स (RAAF) बेस पर होगा अभ्यास
- 'पिच ब्लैक' ऑस्ट्रेलियाई वायुसेना का सबसे बड़ा बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास माना जाता है
- इस बार का आयोजन कई मायनों में है खास
भारतीय वायुसेना सोमवार से ऑस्ट्रेलिया में शुरू होने वाले बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'पिच ब्लैक 2026' में हिस्सा लेगी. यह अभ्यास ऑस्ट्रेलिया के डार्विन स्थित रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फ़ोर्स (RAAF) बेस पर होगा. यह 20 जुलाई से 7 अगस्त तक चलेगा. 'पिच ब्लैक' ऑस्ट्रेलियाई वायुसेना का सबसे बड़ा बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास माना जाता है. इसका आयोजन हर दो साल में होता है. इस अभ्यास का नाम 'पिच ब्लैक' इसलिए रखा गया है, क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा रात में उड़ान भरने और युद्धाभ्यास करने पर केंद्रित होता है.
उत्तरी ऑस्ट्रेलिया का विशाल और कम आबादी वाला इलाका इसके लिए उपयुक्त माना जाता है. इस बार का आयोजन कई मायनों में खास है. 45 साल के इतिहास में यह सबसे बड़े संस्करणों में से एक है. इसमें बड़ी संख्या में कई देशों की वायुसेनाएं और सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं. अभ्यास के दौरान बड़े पैमाने पर संयुक्त हवाई अभियानों का अभ्यास किया जाएगा. भारतीय वायुसेना का दल भी इस अभ्यास में पूरी तैयारी के साथ पहुंचा है. दल में अनुभवी पायलट, इंजीनियर, तकनीशियन, कंट्रोलर और दूसरे विशेषज्ञ शामिल हैं. भारतीय वायुसेना इस अभ्यास में अपने राफेल लड़ाकू विमान का इस्तेमाल करेगी. राफेल को भारतीय वायुसेना के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में गिना जाता है.
राफेल के अलावा ये भी विमान भी होंगे भारतीय दल का हिस्सा
राफेल के अलावा सी-17 ग्लोबमास्टर-3 परिवहन विमान और आईएल-78 एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग विमान भी भारतीय दल का हिस्सा होंगे. ये दोनों विमान युद्धाभ्यास के दौरान रसद और हवाई ईंधन जैसी अहम जिम्मेदारियां निभाएंगे. इस अभ्यास का मकसद अलग-अलग देशों की वायुसेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है। इसके साथ ही संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता को और मजबूत करना भी इसका अहम उद्देश्य है. भाग लेने वाली वायुसेनाएं एक-दूसरे के अनुभव साझा करेंगी। वे आधुनिक हवाई अभियानों से जुड़े तौर-तरीकों को भी समझेंगी। इससे भविष्य में किसी साझा अभियान के दौरान बेहतर समन्वय बनाने में मदद मिलेगी.

भारतीय वायुसेना के लिए भी यह अभ्यास कई लिहाज से अहम
भारतीय वायुसेना के लिए भी यह अभ्यास कई लिहाज से अहम माना जा रहा है. इससे लंबी दूरी तक हवाई अभियान चलाने की क्षमता को परखा जाएगा. अलग-अलग देशों की वायुसेनाओं के साथ काम करने का अनुभव भी मिलेगा. चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संयुक्त अभियान चलाने की तैयारी को और मजबूत किया जाएगा. यह अभ्यास इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जाता है. भारत पिछले कुछ सालों से इस क्षेत्र के देशों के साथ सैन्य सहयोग लगातार बढ़ा रहा है.
पहले भी हिस्सा ले चुकी है भारतीय वायुसेना
भारतीय वायुसेना इससे पहले भी 'पिच ब्लैक' में हिस्सा ले चुकी है. उसने 2018, 2022 और 2024 के संस्करणों में भी भाग लिया था. इसमें लगातार भागीदारी यह दिखाती है कि भारत क्षेत्रीय सुरक्षा और साझेदार देशों के साथ रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर दे रहा है. सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास केवल सैन्य क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं होते. ये अलग-अलग देशों की सेनाओं के बीच भरोसा बढ़ाने और साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारी को भी मजबूत करते हैं. इसी वजह से 'पिच ब्लैक 2026' को भारतीय वायुसेना के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास माना जा रहा है.
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