केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि जब भी भारत-अमेरिका ट्रेड डील की जानकारी जारी की जाएगी, तब देश के लोगों को पता लगेगा कि सरकार ने किसानों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के लेकर कोई समझौता नहीं किया है और भारत एक मजबूत तुलनात्मक लाभ की स्थिति में होगा. गोयल ने बताया कि व्यापार मूल रूप से केवल पूर्ण आंकड़ों के बारे में नहीं, बल्कि तुलनात्मक लाभ और प्रतिस्पर्धात्मकता के बारे में है. उन्होंने कहा कि कई विकसित देशों ने अपने टैरिफ ढांचे को इस तरह तैयार किया है कि वे श्रम-प्रधान वस्तुओं पर उच्च शुल्क लगाते हैं, और इन शुल्कों का इस्तेमाल वे बातचीत के एक साधन के रूप में करते हैं.
गोयल ने यह बयान 'इंस्टीट्यूट फॉर स्टडीज इन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट' (आईएसआईडी) और 'इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट रिसर्च एसोसिएशन' (आईडीआरए) द्वारा आयोजित 'भारत के औद्योगिक परिवर्तन पर चौथे राष्ट्रीय सम्मेलन' को संबोधित करते हुए दिया.
भारत की व्यापार नीति पर गोयल ने कहा कि देश के व्यापार समझौते केवल टैरिफ कम करने, वस्तुओं के उत्पत्ति के नियम तय करने या बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने तक सीमित नहीं हैं. गोयल ने कहा, "ये व्यापक साझेदारियां हैं, जिनमें भारत की प्रतिस्पर्धी क्षमताओं को ध्यान में रखा गया, निर्यात के अवसरों की पहचान की गई, संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा गया, और उच्च-तकनीकी उत्पादों, ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू), मेमोरी तकनीक, चिकित्सा तकनीक और भारत के विकास के लिए आवश्यक अन्य वस्तुओं तक पहुंच को आसान बनाया गया."
उन्होंने कहा कि भारत की व्यापार वार्ताओं में सेवाएं, निवेश, शिक्षा, कौशल विकास, तकनीकी साझेदारी, जलवायु लक्ष्यों की दिशा में सहयोग और देशों के 'राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान' (एनडीसी) जैसे विषय भी शामिल थे.
ये व्यापक समझौते भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की नींव रख रहे थे. साथ ही, किसी भी समझौते को अंतिम रूप देने से पहले संबंधित पक्षों के साथ व्यापक परामर्श किया गया, ताकि भारत की संवेदनशीलताओं और हितों की रक्षा की जा सके.
उन्होंने बताया कि भारत के व्यापार समझौतों में 38 विकसित और अपेक्षाकृत समृद्ध देश शामिल हैं. इससे दोनों पक्षों के लिए एक-दूसरे के पूरक व्यापार अवसर पैदा हुए हैं. भारत उन उत्पादों का निर्यात करता है जिनकी उन्हें जरूरत है, और अपने विकास के लिए आवश्यक उत्पादों का आयात करता है.
सरकार द्वारा किए गए नौ मुक्त व्यापार और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों ने कुल 60 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी वाले बाजारों में भारत के लिए विशेष अवसर खोले हैं. इसकी तुलना में, 2014 से पहले किए गए समझौतों के दायरे में केवल 10 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी वाले बाजार आते थे.
उन्होंने कहा कि पहले के समझौते मुख्य रूप से उन देशों के साथ थे जो भारत के प्रतिस्पर्धी थे, जबकि मौजूदा दृष्टिकोण का उद्देश्य ऐसे आर्थिक संबंध बनाना है जो एक-दूसरे के पूरक हों. उन्होंने कहा कि भारत को एक वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त विनिर्माण राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखना चाहिए. साथ ही, सरकार, उद्योग जगत, शिक्षा जगत और अनुसंधान संस्थानों के समन्वित प्रयासों के जरिए 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करना चाहिए.
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