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This Article is From Jul 16, 2020

तनाव में नजर आ रहे थे कुलभूषण जाधव, पाकिस्‍तान ने बिना बाधा के मिलने नहीं दिया: सरकार

पाकिस्‍तान की जेल में कैद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को दूसरी काउंसुलर एक्‍सेस मिलने के बाद भारतीय अधिकारियों ने आज उनसे भेंट की.सूत्रों के अनुसार, काउंसुलर एक्‍सेज के दौरान भारतीय अधिकारियों ने करीब पौने दो घंटे जाधव से मुलाकात की

जासूसी के आरोप में कुलभूषण जाधव इस समय पाकिस्‍तान की जेल में बंद है
नई दिल्ली:

पाकिस्‍तान की जेल में कैद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को दूसरी काउंसुलर एक्‍सेस मिलने के बाद भारतीय अधिकारियों ने आज उनसे भेंट की.सूत्रों के अनुसार, काउंसुलर एक्‍सेस के बारे में जानकारी देते हुए सरकार की ओर से कहा गया है कि भेंट के दौरान कुलभूषण जाधव तनाव में नजर आ रहे थे. काउंसुलर अधिकारियों को पाकिस्‍तान की ओर से निर्वाध पहुंच (unimpeded access) नहीं दी गई. सरकार के अनुसार, पाकिस्तान ने काउंसुलर एक्सेस के दौरान की वादाख़िलाफ़ी की. भारत के लगातार अनुरोध के बावजूद पाकिस्तान ने बिना अवरोध और बाधा के काउंसुलर एक्सेस नहीं दिया. इस दौरान पाकिस्तानी अधिकारी मौजूद रहे. यही नहीं, कैमरे से भी बातचीत की रिकॉर्डिंग की जा रही थी. सरकार के अनुसार, भय का माहौल था जिसमें कुलभूषण जाधव अपनी बात खुले तौर पर नहीं रख सकते थ. जाधव काफी तनाव में थे और उन्होने काउंसुलर ऑफिसर को इस बात का इशारा भी किया. काउंसुलर अधिकारी जाधव रिव्यू पिटीशन के लिए लिखित सहमति नहीं ले पाए और अपना अपना विरोध दर्ज करा कर लौट आए. पाकिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय अदालत के निर्देशों की अवहेलना की है.विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बाबत जाधव के परिवार को जानकारी दे दी है

पाकिस्‍तान की जेल में कैद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को दूसरी काउंसुलर एक्‍सेस मिल गई थी. जासूसी के आरोप में पाकिस्‍तान की सैन्‍य अदालत की ओर से मौत की सजा पाने वाले भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव इस समय पाकिस्‍तान की जेल में बंद है. सूत्रों के अनुसार, काउंसुलर एक्‍सेज के दौरान भारतीय अधिकारियों को करीब दो घंटे जाधव से मिलने का समय मिल सकता है. बता दें कि भारत की मांग थी कि जाधव से भारत के दो अधिकारियों को मिलने दिया जाए. इसके साथ ही बातचीत की भाषा अंग्रेज़ी न तय की जाए और वकील भी पाकिस्तान से बाहर का करने दिया जाए. पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने पिछले हफ्ते ही दावा किया था कि रिव्यू पिटीशन फ़ाइल करने की पेशकश कुलभूषण जाधव ने ठुकरा दी है और वे अपनी दया याचिका पर ही ज़ोर देना चाहते हैं. पाकिस्तान ने रिव्यू पिटीशन दाख़िल करने के लिए 20 जुलाई की समय सीमा तय कर रखी है. पाकिस्तान का कहना है कि सैन्य अदालत के फैसले की समीक्षा के लिए जो 20 मई को जो अध्यादेश लाया गया था उसके तहत दो महीने के भीतर ही रिव्यू पिटीशन दाख़िल किया जा सकता है, लेकिन भारत ने इसे पाकिस्तान की एक और चाल बताया है. बिना सुनवाई फांसी की सज़ा सुना दिए जाने के बाद पाकिस्तान तभी रुका जब भारत ने अंतराष्ट्रीय अदालत का दरवाज़ा खटखटाया. वहां भारत को जीत मिली. पाकिस्तान को आदेश दिया गया कि वह अंतराष्ट्रीय संधियों के अनुरूप कुलभूषण जाधव को काउंसुलर एक्सेस दे और मामले की समीक्षा भी करे.

भारत का कहना है कि नेवी के रिटायर्ड अधिकारी कुलभूषण जाधव को ईरान से अगवा कर पाकिस्तान ले जाया गया और बाद में उन्हें जासूसी और आतंकवाद के झूठे मुकदमे में फंसाकर मौत की सज़ा सुना दी गई. सैन्य अदालत न जाधव को बचाव का कोई मौका भी नहीं दिया. पाकिस्तान अगर अंतरराष्ट्रीय अदालत के निर्देशों का उचित रूप से पालन नहीं करता है तो भारत फिर अंतराष्ट्रीय अदालत के पास शिकायत लेकर जाएगा. भारत का आरोप है कि पाकिस्तान अंतराष्ट्रीय अदालत के फ़ैसले के अनुरूप काम नहीं कर रहा और आंख में धूल झोंकने की कोशिश कर रहा है. भारत के अनुसार, पाकिस्तान ने एक बार जो काउंसुलर एक्सेस दिया भी तो इतनी तरह की बाधाएं खड़ी कर दी कि जाधव अपनी बात कह नहीं पाए. भारत का कहना है कि जाधव को अपने दबाव और प्रताड़ना में रखकर पाकिस्तान उनसे मनचाही बातें करवाता है. पाकिस्तान के इस दावे को भारत ने नाटक करार देते हुए कहा कि जाधव को अधिकार छोड़ने के लिए 'मजबूर' किया गया है.

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