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'मिलिट्री स्कूल' बन रहा भारत! अब जापानी सेना को मिसाइल ट्रेनिंग देगी इंडियन आर्मी

इस महीने की शुरुआत में जापान ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स का 34 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी अभ्यास के लिए भारत आया था.

'मिलिट्री स्कूल' बन रहा भारत! अब जापानी सेना को मिसाइल ट्रेनिंग देगी इंडियन आर्मी
जापानी सेना जल्द ही भारत में ट्रैनिंग के लिए आ रही है.

भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है. अब जापान अपनी लंबी दूरी की सतह से जहाज पर मार करने वाली मिसाइलों और छोटे अटैक ड्रोन के प्रशिक्षण के लिए भारत के साथ संभावनाएं तलाश रहा है. इसी उद्देश्य से जापान ने अपने कुछ अधिकारियों को भारत भेजा है, जो दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधी समन्वय पर काम कर रहे हैं.

1000 किलोमीटर रेंज वाली मिसाइल बना रही चुनौती

जापान ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स (GSDF) के प्रमुख जनरल मसायोशी अराई ने बताया कि लगभग 1000 किलोमीटर दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों के प्रभावी उपयोग के लिए प्रशिक्षण व्यवस्था तैयार करना एक बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा कि जापान अपने देश के भीतर प्रशिक्षण सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ विदेशों में उपलब्ध विकल्पों पर भी विचार कर रहा है. उनके अनुसार भारत के साथ कई मुद्दों पर समन्वय के लिए अधिकारियों को भेजा गया है और प्रशिक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा जारी है.

छोटे अटैक ड्रोन को लेकर भी चल रही तैयारी

जब जनरल अराई से पूछा गया कि क्या भारत में छोटे अटैक ड्रोन के संचालन और परीक्षण से जुड़ी संभावनाएं भी देखी जा रही हैं, तो उन्होंने संकेत दिया कि इस तरह के विकल्प भी बातचीत का हिस्सा हैं. उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रकार की प्रशिक्षण और परीक्षण संभावनाओं पर काम किया जा रहा है.

इंडो-पैसिफिक में भारत को अहम साझेदार मानता है जापान

जापान ने एक बार फिर साफ किया है कि वह भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का महत्वपूर्ण साझेदार मानता है. बदलते सुरक्षा माहौल और बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों के बीच टोक्यो और नई दिल्ली रक्षा सहयोग तथा सैन्य आदान-प्रदान को और मजबूत करना चाहते हैं. हालांकि जापानी अधिकारियों ने भारत भेजे गए दल और प्रस्तावित योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है.

इसी महीने भारत दौरे पर आई थी जापानी सैन्य टीम

इस महीने की शुरुआत में जापान ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स का 34 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भारत आया था. 4 से 9 अक्टूबर के बीच हुए इस दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे रक्षा सहयोग को और मजबूत करना था.

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय सेना और डीआरडीओ के अधिकारियों से मुलाकात की. इसके अलावा सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज (CLAWS) और वॉरगेम रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर (WARDEC) का भी दौरा किया. वहां उन्होंने भारत की सैन्य क्षमताओं, प्रशिक्षण व्यवस्थाओं और रक्षा क्षेत्र में विकसित हो रही नई तकनीकों के बारे में जानकारी हासिल की. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जापान अपनी मिसाइल और ड्रोन ट्रेनिंग के लिए भारत की सुविधाओं का इस्तेमाल करता है तो यह दोनों देशों के रक्षा संबंधों में एक नया अध्याय साबित हो सकता है. इससे न केवल सैन्य सहयोग बढ़ेगा बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी भी और मजबूत होगी.

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