- IG Defence ने स्वदेशी फिक्स्ड-विंग टैक्टिकल ड्रोन के लिए पेटेंट हासिल कर लिया है, जो काफी अहम है.
- यह ड्रोन लंबी दूरी तक उड़ान भर सकता है, अधिक समय तक ऑपरेट कर सकता है और सैनिकों के जोखिम को कम करता है
- ड्रोन 5 किलोग्राम तक के हथियार या उपकरण ले जाने में सक्षम है, जिससे विभिन्न मिशनों के लिए लचीलापन मिलता है
भारत के रक्षा तकनीक क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाते हुए स्वदेशी ड्रोन निर्माता IG Defence ने अपने अत्याधुनिक फिक्स्ड-विंग टैक्टिकल अनमैन्ड एरियल सिस्टम के लिए पेटेंट हासिल कर लिया है. यह सिर्फ एक ड्रोन नहीं, बल्कि आधुनिक युद्धक्षेत्र का ऐसा ‘ब्रह्मास्त्र' है, जो एक ही उड़ान में टोही, निगरानी और सटीक हमला, तीनों मिशन निभाने की क्षमता रखता है.
आधुनिक युद्ध के लिए डिज़ाइन किया गया मल्टी-रोल प्लेटफॉर्म
यह सिस्टम बदलते युद्धक्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है. एक ही प्लेटफॉर्म में स्ट्राइक क्षमता, इंटेलिजेंस और निगरानी, अंतिम लक्ष्य पर प्रहार सभी को एकीकृत किया गया है. इससे भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं में महत्वपूर्ण मजबूती आती है. जिसका किसी भी युद्ध स्थिति में बेहद महत्वपूर्ण स्थान होता है. कंपनी का कहना है कि उन्नत रक्षा सिमुलेटरों के पेटेंट से लेकर ऑपरेशन सिंदूर जैसे वास्तविक अभियानों में स्वदेशी ड्रोन तैनात करने तक, IG Defence ने हमेशा जमीनी जरूरतों को प्राथमिकता दी है.
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“दिखावे के लिए नहीं, असली मैदान के लिए”
कंपनी ने कहा कि हमारी तकनीकें प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक ऑपरेशनल जरूरतों के लिए विकसित की जाती हैं. यह नया पेटेंट हमारी बढ़ती स्वदेशी नवाचार क्षमता का प्रमाण है, जहां रिसर्च और बौद्धिक संपदा को ऐसे समाधान में बदला जाता है जिन पर सशस्त्र बल भरोसा कर सकें.
लंबी दूरी, ज्यादा समय और न्यूनतम जोखिम
नया फिक्स्ड-विंग टैक्टिकल ड्रोन सैन्य अभियानों में गेम बदलने की क्षमता रखता है. इसकी प्रमुख खूबियां है-
- लक्ष्य की पहचान, निगरानी और हमला
- जमीन पर सैनिकों के जोखिम में भारी कमी
- दबाव वाले और संघर्षपूर्ण माहौल में तेज़ और सटीक कार्रवाई करने की क्षमता
फिक्स्ड-विंग डिज़ाइन के कारण यह ड्रोन
- लंबी दूरी तक उड़ान भर सकता है,
- लंबे समय तक ऑपरेट कर सकता है,
- तथा कठिन मिशनों में भी स्थिर प्रदर्शन देता है.
मिशन के हिसाब से हथियार बदलने की सुविधा
कंपनी के अनुसार यह सिस्टम 5 किलोग्राम तक का वारहेड पेलोड ले जा सकता है और मिशन के अनुसार इसमें विभिन्न हथियार या अन्य उपकरण लगाए जा सकते हैं. इसी लचीलापन की वजह से यह ड्रोन इन भूमिकाओं में बेहद प्रभावी है. जैसे कि खुफिया जानकारी जुटाना, निगरानी और टोही, प्रिसिशन स्ट्राइक, अन्य रणनीतिक मिशन
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कंपनी के CEO की प्रतिक्रिया
IG Defence के संस्थापक और सीईओ बोधिसत्व संघप्रिय ने कहा कि यह पेटेंट स्वदेशी रक्षा तकनीक की हमारी यात्रा का एक अहम पड़ाव है. हमारा फोकस हमेशा ऐसी तकनीक विकसित करने पर रहा है जो सिर्फ दिखाने के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक ऑपरेशनल इस्तेमाल के लिए हो. यह ड्रोन आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप बनाया गया है और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में हमारा योगदान है. उन्होंने आगे कहा कि यह प्लेटफॉर्म सेना को बेहतर स्थिति-समझ (Situational Awareness) देता है, सैनिकों के जोखिम कम करता है और कठिन परिस्थितियों में भी लगातार विश्वसनीय प्रदर्शन करता है.
‘कमांडरों की तीसरी आंख', एयर कमोडोर आर. एन. गायकवाड़
IG Defence के सलाहकार एयर कमोडोर आर. एन. गायकवाड़ (सेवानिवृत्त) ने कहा कि आज के युद्धक्षेत्र में फैसले तेजी से लेने पड़ते हैं. कई बार अधूरी जानकारी में भी निर्णय करना होता है. ऐसे में ऐसे प्लेटफॉर्म बेहद महत्वपूर्ण हैं, जो बिना सैनिकों को जोखिम में डाले कमांडरों की नजर और पहुंच बढ़ा सकें. उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सिस्टम निगरानी और हमला, दोनों क्षमताएं एक ही प्लेटफॉर्म में देता है. इससे स्थिति की समझ बेहतर होती है, ऑपरेशनल दायरा बढ़ता है और तेज़ निर्णय लेने में मदद मिलती है. जैसे-जैसे युद्ध तकनीक आधारित और मल्टी-डोमेन होते जा रहे हैं, ऐसे सिस्टम भविष्य में निर्णायक भूमिका निभाएंगे.
भारत की रक्षा क्षमता में बड़ा कदम
कुल मिलाकर, IG Defence का यह नया इनोवेशन भविष्य के टेक्नोलॉजी-ड्रिवन युद्धों में भारत की पकड़ को और मजबूत करेगा. यह सिस्टम कमांडरों को वह ‘तीसरी आंख' देता है, जो बिना किसी मानवीय जोखिम के मिशन की सफलता सुनिश्चित कर सकती है. जैसे-जैसे युद्ध की परिभाषा बदल रही है, IG Defence के ये स्वदेशी समाधान न केवल सीमाओं की रक्षा मजबूत करेंगे, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर रक्षा तकनीक के एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करेंगे.
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