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This Article is From Apr 10, 2026

15 हजार पत्नी को देते रहिए और खुश रहिए... सुप्रीम कोर्ट ने तलाक मांग रहे पति को दी सलाह

सुप्रीम कोर्ट में 54 वर्षीय शख्स ने बताया कि वह 16 साल से पत्नी से अलग रह रहा है. हर महीने 15 हजार गुजारा भत्ता देता है. अब गुजारा भत्ते से निजात दिलाकर तलाक दिलवाया जाए.

15 हजार पत्नी को देते रहिए और खुश रहिए... सुप्रीम कोर्ट ने तलाक मांग रहे पति को दी सलाह
  • 16 साल से पत्नी से अलग रह रहे 54 वर्षीय शख्स ने तलाक लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है
  • कोर्ट में कहा कि उसकी कमाई 65 हजार है, जिसमें से 15 हजार गुजारा भत्ता देना मुश्किल हो रहा है
  • कोर्ट ने कहा- स्थायी गुजारा भत्ते का ऑफर दें तो विचार करेंगे वरना शांति से बैठो, 15 हजार देते रहो और खुश रहो

शादी से आजादी पाने की चाहत में देश की सबसे ऊंची अदालत के दरवाजे पर पहुंचे 54 वर्षीय एक शख्स को तलाक तो नहीं मिला, मगर एक सलाह जरूर मिल गई. 16 साल से अलग रह रहे इस शख्स की तलाक की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने दोटूक सलाह दे डाली- शांति से बैठो, 15 हजार रुपये देते रहो और खुश रहो.

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने आए इस मामले में 54 वर्षीय शख्स ने पत्नी से तलाक की गुहार लगाई थी. उसने बताया कि पिछले 16 साल से वह अपनी पत्नी से अलग रह रहा है. हर महीने गुजारा भत्ते के रूप में 15 हजार रुपये देता है. अब अपनी कम कमाई का हवाला देते हुए अदालत से कहा कि उसे गुजारा भत्ते से निजात दिलाई जाए और तलाक दिलवाया जाए. 

शख्स ने इससे पहले हाईकोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी, लेकिन वहां से खारिज हो गई. हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पत्नी को हर महीने 15 हजार रुपये देना उसे बहुत भारी पड़ रहा है. वह हर महीने 65 हजार रुपये कमाता है, इसमें से 15 हजार रुपये निकालना काफी मुश्किल हो रहा है. 

इस पर कोर्ट ने पलटकर पूछ लिया कि अगर गुजारा भत्ता नहीं दे सकते तो पत्नी को साथ क्यों नहीं रख लेते, इसमें समस्या क्या है? याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि पति-पत्नी 16 साल से अलग रह रहे हैं. इसके बावजूद उनके बीच समस्याएं हैं. दोनों के बीच सुलह की कई बार कोशिशें हुईं, लेकिन नाकाम हो चुकी हैं.  

पति की तरफ से अदालत में आरोप लगाया गया कि पत्नी उसके साथ क्रूरता करती है. कोर्ट के पूछने पर उनके वकील ने बताया कि जहां भी पति की पोस्टिंग होती थी, वो साथ में जाने की जिद करती थी. इस पर कोर्ट ने पूछा कि इसमें दिक्कत क्या है?  

वहीं पत्नी की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह स्थायी गुज़ारा भत्ता नहीं चाहती बल्कि अपने पति के साथ रहना चाहती है. उन्होंने बताया कि दंपति की कोई संतान नहीं है और महिला फिलहाल अपनी मां के साथ रह रही है. 

बहरहाल, पति की तलाक की मांग पर अदालत ने साफ कह दिया कि अगर तलाक चाहिए तो एकमुश्त गुजारा भत्ता देने का सम्मानजनक ऑफर देना होगा. बेंच ने लगे हाथ सलाह देते हुए कहा कि आजकल के जमाने में 15 हजार रुपये कोई ज्यादा बड़ी बात नहीं है. अगर आप स्थायी गुजारा भत्ते का कोई प्रस्ताव देते हैं तो हम तलाक की अर्जी पर विचार कर सकते हैं... नहीं तो शांति से बैठो, 15 हजार रुपये देते रहो और खुश रहो. 

दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने तलाक मांगने की याचिका खारिज नहीं की, बल्कि दोनों पक्षों को स्थायी गुजारा भत्ते की राशि पर निर्देश लेने के लिए समय दिया और मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को तय कर दी.

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