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ईरान-US का सीजफायर भारत के लिए कितनी राहत लेकर आया... PHDCCI के CEO ने NDTV को बताया

PHDCCI के CEO और सेक्रेटरी जनरल रंजीत मेहता ने बुधवार को एनडीटीवी से कहा कि युद्ध विराम के बाद एनर्जी प्रोडक्ट्स की सप्लाई में सुधार की उम्मीद है. दुनिया भर में स्टॉक मार्केट में इसका असर आज दिखा है.

ईरान-US का सीजफायर भारत के लिए कितनी राहत लेकर आया... PHDCCI के CEO ने NDTV को बताया
नई दिल्ली:

मध्यपूर्व एशिया में 40 दिन तक युद्ध के बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के ऐलान का असर बुधवार को दुनियाभर की बाज़ारों में दिखा. भारत समेत एशिया के सभी बड़े स्टॉक मार्केट्स में तेज़ी देखी गई.अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार में भी कच्चे तेल तक की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज़ की गयी है. बुधवार को ट्रेडिंग के दौरान ब्रेंट ऑयल फ्यूचर की कीमत गिरकर 90 से 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुँच गयी. पिछले कुछ हफ़्तों से कच्चे तेल की कीमत लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई थी.

भारत अपनी जरूरत का 85% से ज़्यादा कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से आयात करता है.ऐसे में कच्चे तेल के और महंगा होने से तेल आयात का खर्च बढ़ता जा रहा था.पेट्रोलियम मंत्रालय की Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) की एक रिपोर्ट के मुताबिक मध्यपूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से 02 अप्रैल, 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत एक दिन में करीब 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़कर US$ 130.93/बैरल के ऊँचे स्तर पर पहुंच गयी थी.

सरकारी आकड़ों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से पहले फरवरी, 2026 में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी. यानी, मध्यपूर्व युद्ध एशिया में युद्ध की वजह से कच्चा तेल फरवरी, 2026 की औसत कीमत के मुकाबले 02 अप्रैल, 2026 तक 61.92 डॉलर प्रति बैरल महंगा हो गया, यानि 89.72% की बढ़ोतरी!

मार्च 2026 महीने के दौरान भी कच्चे तेल की औसत कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रही थी.सरकारी तेल कंपनियों पर तेल आयात के बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने के लिए भारत सरकार ने 27 मार्च, 2026 को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर घटाने का फैसला किया था. सरकार ने इस आसमान छूती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के समय तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे को कम करने के लिए taxation revenues छोड़ने का फैसला किया था.

उद्योग जगत ने मध्यपूर्व एशिया में युद्धविराम के ऐलान के बाद राहत की सांस ली है. उद्योग संघ PHDCCI के CEO और सेक्रेटरी जनरल रंजीत मेहता ने बुधवार को एनडीटीवी से कहा कि युद्ध विराम के बाद एनर्जी प्रोडक्ट्स की सप्लाई में सुधार की उम्मीद है. दुनिया भर में स्टॉक मार्केट में इसका असर आज दिखा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार ने युद्ध विराम का स्वागत किया है. लेकिन कच्चा तेल और गैस काफी महंगे हुए हैं. हमें उम्मीद है की युद्ध विराम से जो ग्लोबल सप्लाई चैन में कमजोर पड़ गई थी वह दोबारा फिर बहाल होगी. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ग्लोबल ट्रेड के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. वहां कार्गो जहाज की आवाजाही शुरू होना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है.  यह एक फौरी राहत है. इस समस्या का स्थाई समाधान निकालने के लिए दुनियाभर में राजनीतिक पहल तेज होनी चाहिए.

उद्योग जगत ने युद्धविराम के बाद औद्योगिक इकाइयों को औसत खपत का 70% तक कमर्शियल एलपीजी सप्लाई करने के फैसले का भी स्वागत किया है. PHDCCI के CEO और सेक्रेटरी जनरल रंजीत मेहता ने एनडीटीवी से कहा कि मध्यपूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से कई इंडस्ट्रियल सेक्टर में गैस की सप्लाई बाधित हुई थी और कई जगहों पर इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन पर असर पड़ रहा था. पेट्रोलियम सचिव ने जो आदेश जारी किया है यह एक स्वागत योग्य कदम है. हमें उम्मीद है कि इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में सुधार होगा और कई जगह पर जहां इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन बाधित हो रहा था वहां फिर से प्रोडक्शन में सुधार होगा और टेंप्रोरी वर्क्रस को रोजगार मिलेगा.

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