- कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पंडाल में बारिश की वजह से भीड़ बढ़ी और भगदड़ में लोगों की मौत हो गई
- प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि अंदर जाने वालों को रोकने के लिए वॉलेंटियर कम थे, जिससे भीड़ नियंत्रण में चूक हुई
- पंडाल में प्रवेश व्यवस्था ठीक थी लेकिन बाहर निकलने का सिस्टम कमजोर होने की वजह से भगदड़ हुई
कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पंडाल में भगदड़ में 19 लोगों की मौत से लोग सदमे में हैं. किसी ने बहन को खो दिया तो किसी ने भाई को. अपनों को खोने का गम इन लोगों के चहरों पर साफ दिखाई दे रहा है. सवाल यही है कि इस फेमस दुर्गा पूजा पंडाल में सालों से आयोजन होता आ रहा है लेकिन फिर शनिवार को ऐसा क्या हुआ कि भगदड़ मच गई और इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो गई. हादसे को अपनी आंखों से देखने वालों ने उस भयावह मंजर को बयां किया है. आखिर शनिवार शाम हुआ क्या था जानें चश्मदीदों की जुबानी.
बारिश की वजह से भीड़ बढ़ गई
दुर्गा पूजा पंडाल के पास रहने वाले शख्स ने कहा, 'बारिश शुरू होते ही सभी पंडाल में इकट्ठा होने लगे. बाहर निकलने वाले लोग निकल नहीं पा रहे थे लेकिन लोग अंदर घुसे जा रहे थे. बारिश की वजह से ये हादसा हुआ. लोग अंदर गए जरूर लेकिन बाहर निकल नहीं पाए. भीड़ एक ही जगह पर इकट्ठा होती गई और भीड़ बढ़ती गई. '

भीड़ धक्का देकर अंदर भागी
दूसरे प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, 'लाइन लगी थी, भक्त अंदर जा रहे थे. अचानक तेज बारिश आई. दर्शन करके लोग बाहर नहीं निकल पाए. अंदर जाने वालों को वॉलेंटियर रोक नहीं पाए. वे बारिश से बचने के लिए धक्का देकर अंदर भागने लगे.अंदर भीड़ जमा हो गई.बारिश की वजह से यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई. अगर वॉलेंटियर अगर भीड़ को कंट्रोल कर लेते तो ये घटना नहीं होती. वॉलेंटियर कम थे. भीड़ कंट्रोल करने में ही चूक हुई.'

एंट्री ठीक है लेकिन एग्जिट का सिस्टम गलत
भगदड़ में बड़ी बहन को खोने वाले बबलू नाम के एक शख्स ने बताया कि पंडाल में एंट्री ठीक है लेकिन एग्जिट का सिस्टम गलत है. उनकी बहन सुमन परिवार के साथ आई थी. भगदड़ में उनकी 28 साल की बहन सुमन की मौत हो गई. छोटे भाई ने फोन कर घटना की जानकारी दी.

चोरबागान दुर्गा पंडाल में बड़ा हादसा
कोलकाता में हुए इस हादसे के बाद हर आंख नम है. दुर्गा पूजा तो कोलकाता की आत्मा मानी जाती है. हर साल जोर-शोर से इसका आयोजन होता है. जगह-जगह हजारों की संख्या में पंडाल लगाए जाते हैं. हर दिन हजारों लोग खुशी-खुशी परिवार के साथ मां दुर्गा के दर्शन करने पूरे नव रात्रि पहुंचते हैं. शनिवार का दिन भी वैसा ही था. लोग दर्शन के लिए पहुंचे थे. बारिश आने से पहले किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि अगले ही पल क्या होने वाला है. देखते-ही देखते 19 लोग काल के गाल में समा गए. सप्तमी का दिन कोलकाता के लिए काला दिन बन गया.
भीड़ सही से कंट्रोल नहीं हो पाई
पंडाल के बाहर एंट्री गेट बना हुआ है. शनिवार शाम को बारिश का समय था. काफी सारे लोग पीछे से आगे जा रहे थे. संकरी गली होने की वजह से भीड़ कंट्रोल सही से नहीं हो सकी.पहले एक गुट को अंदर दर्शन के लिए भेजा जाता है. जब वो बाहर आ जाते हैं तब दूसरे लोग अंदर दर्शन के लिए जाते हैं.यहां का यही सिस्टम है. लेकिन बारिश की वजह से चूक हुई. अंदर के लोग बाहर नहीं निकल पाए और बाहर लाइन में लगे कई गुना ज्यादा लोग बारिश से बचने के लिए अंदर घुस गए.
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