- भारत का मानना है कि लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार ही भारत-बांग्लादेश संबंधों को स्थिरता प्रदान कर सकती है
- अंतरिम सरकार के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंध तनावपूर्ण रहे, जिसे भारत ने नीतिगत फैसलों का परिणाम बताया है
- भारत बीएनपी के तारिक रहमान के साथ बेहतर आर्थिक, क्षेत्रीय स्थिरता पर केंद्रित कूटनीति अपनाने की उम्मीद कर रहा
बांग्लादेश में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की जीत के बाद, भारत सतर्क आशावाद के साथ आगे बढ़ रहा है. भारत का मानना है कि लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार ही दोनों देशों के संबंधों को स्थिरता और निश्चितता प्रदान कर सकती है. अंतरिम सरकार के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ा था, जिसे भारत ने नीतिगत फैसलों का नतीजा बताया था. अब भारत बीएनपी के तारिक रहमान के नजदीक जा रहा है, जो आर्थिक और क्षेत्रीय स्थिरता पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रहमान को बधाई दी और दोनों देशों के बीच शांति और प्रगति की प्रतिबद्धता जताई है.
राजनयिक संबंधों के द्वार खुले
बांग्लादेश में बीएनपी की जीत के साथ ऐसी उम्मीद की जा रही है कि एक 'अशांत अंतरिम दौर' का अंत हो जाएगा. तारिक रहमान की जीत के साथ नई दिल्ली और ढाका के बीच राजनयिक संबंधों को फिर से शुरू करने के द्वार खुल गए हैं. वरिष्ठ सरकारी सूत्रों ने कहा कि यह परिणाम भारत के इस लंबे समय से चले आ रहे विश्वास को और मजबूत करता है कि केवल जनादेश से लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार ही भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों को स्थिरता और निश्चितता प्रदान कर सकती है. नई दिल्ली के रणनीतिक दृष्टिकोण से, चुनाव परिणाम मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार से एक स्पष्ट अलगाव का प्रतीक है, जिसे भारतीय अधिकारी निजी तौर पर बेहद खराब दौर बताते हैं.

तख्तापलट के बाद बिगड़े संबंध
भारत हमेशा लोकतंत्र का समर्थक रहा है. सूत्रों के अनुसार, 'बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के दौरान ढाका के साथ भारत के संबंध तेजी से बिगड़े. इस दौरान अराजकता और अव्यवस्था को बढ़ावा दिया गया, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बहाल करने में बार-बार देरी की गई और द्विपक्षीय तनावों के लिए भारत और भारतीय मीडिया को सार्वजनिक रूप से दोषी ठहराने का सिलसिला चलता दिखाई दिया. हालांकि, नई दिल्ली इस बात को खारिज करती है और जोर देकर कहती है कि यह नुकसान अंतरिम सरकार द्वारा लिए गए नीतिगत फैसलों का नतीजा था.
लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति सम्मान
सरकारी सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि भारत ने हमेशा से जनादेश वाली निर्वाचित सरकार के साथ बातचीत की है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति नई दिल्ली के सम्मान को दर्शाता है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमारा मानना है कि जनादेश से लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार भारत-बांग्लादेश संबंधों की दीर्घकालिक स्थिरता और प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.' उन्होंने आगे कहा कि यह फैसला उदारवादी मूल्यों की पवित्रता और 1971 की भावना के प्रति सम्मान को प्रमाणित करता है.'
अंतरिम अवधि के दौरान भारत के लिए एक विशेष रूप से संवेदनशील मुद्दा बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की हत्या और उत्पीड़न के खिलाफ ठोस कार्रवाई का अभाव था. अधिकारियों ने कहा कि निजी और सार्वजनिक रूप से बार-बार उठाई गई चिंताओं का पर्याप्त समाधान नहीं किया गया, जिससे विश्वास और भी कमज़ोर हुआ. साथ ही, नई दिल्ली का मानना है कि अंतरिम सरकार ने इस्लामी चरमपंथी समूहों और पाकिस्तान समर्थक तत्वों को राजनीतिक परिवेश में अधिक स्थान दिया - एक ऐसा दृष्टिकोण जिसे भारतीय रणनीतिकार न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए, बल्कि बांग्लादेश की आंतरिक एकता के लिए भी हानिकारक मानते हैं.
तारिक रहमान को लेकर भारत 'सर्तक आशावादी'
तारीक रहमान के आने के बाद अब बांग्लोदश में हालात बदलने की उम्मीद है. भारत और बांग्लादेश के संबंध भी अब बेहतर हो सकते हैं. ऐसे में भारत इसे एक अवसर के रूप में देख रहा है. अब सारा ध्यान बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान पर केंद्रित है, जिनके बारे में भारतीय अधिकारी "सतर्क आशावादी" हैं. बीएनपी सरकारों के साथ अतीत में मतभेदों को स्वीकार करते हुए, नई दिल्ली का मानना है कि रहमान आर्थिक वास्तविकताओं और क्षेत्रीय स्थिरता संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अधिक व्यावहारिक कूटनीतिक और राजनीतिक दृष्टिकोण अपना सकते हैं.
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रहमान के शपथग्रहण में शामिल हो सकते हैं भारतीय प्रतिनिधि
यह आशावाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुरंत की गई प्रतिक्रिया में भी दिखाई देती है, जिन्होंने एक्स पर पोस्ट किया कि वे रहमान से "बातचीत करके बेहद प्रसन्न" हुए और उन्हें चुनाव में "शानदार जीत" के लिए बधाई दी. प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के लिए शांति, प्रगति और समृद्धि के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और पड़ोसी देशों को जोड़ने वाले गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर दिया. इधर, सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि एक वरिष्ठ भारतीय प्रतिनिधि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो सकते हैं, जिसका उद्देश्य नई दिल्ली की नए सिरे से शुरुआत करने की तत्परता को रेखांकित करना है. यह विदेश मंत्री एस जयशंकर की हाल ही में बांग्लादेश यात्रा के बाद होगा, जहां उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी अध्यक्ष बेगम खालिदा जिया के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की थी.
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रणनीतिक दृष्टि से भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट प्रतीत होता है. लोकतंत्र का समर्थन करना, रचनात्मक रूप से फिर से जुड़ना और सुरक्षा एवं अल्पसंख्यक अधिकारों से संबंधित चिंताओं के प्रति सतर्क रहते हुए विश्वास को फिर से कायम करना. नई दिल्ली के लिए बीएनपी की जीत व्यक्तिगत हितों से अधिक प्रक्रिया से जुड़ी है. अधिकारियों का तर्क है कि एक निर्वाचित सरकार ही भारत-बांग्लादेश साझेदारी के लिए एकमात्र विश्वसनीय आधार प्रदान करती है, जो स्थिर और प्रगतिशील हो सकती है.
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