Haryana News: अगर आप हरियाणा से हैं और खेती-किसानी से वास्ता रखते हैं, तो ये खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ला सकती है. सूबे के किसानों की दो सबसे बड़े सिरदर्द हैं- या तो खेतों में पानी भर जाना या फिर सिंचाई के वक्त नहरों का सूखा रहना. अब इन दोनों परेशानियों का एक परमानेंट सॉल्यूशन निकाला जा रहा है. हरियाणा सरकार जल सुरक्षित हरियाणा (Haryana Water Conservation Project) नाम का एक मेगा प्रोजेक्ट लेकर आई है. इस प्रोजेक्ट के लिए वर्ल्ड बैंक ने भी अपनी तिजोरी खोल दी है और 4000 करोड़ रुपये के लोन को हरी झंडी दे दी है. करीब 5714 करोड़ रुपये की कुल लागत वाला यह पूरा प्रोजेक्ट 2026 से 2032 के बीच कई चरणों में जमीन पर उतारा जाएगा. आइए समझते हैं कि इस भारी-भरकम बजट से आपके खेत और गांव में क्या बदलने वाला है...
डूबी हुई जमीन फिर उगलेगी 'सोना'
हरियाणा में जलभराव (Waterlogging) की वजह से करीब 2 लाख एकड़ जमीन लंबे समय से बंजर या बेकार पड़ी है. सरकार का सबसे पहला टारगेट इसी जमीन को दोबारा खेती के लायक बनाना है. सोचिए, जब 2 लाख एकड़ जमीन पर फिर से हल चलेगा, तो इससे न सिर्फ हजारों किसानों की रुकी हुई आमदनी चालू होगी, खेतों से उपजा अनाज 'सोना' बनकर चमकेगा और उत्पादन में जबरदस्त उछाल आएगा.
सूखी नहरों में लौटेगा पानी, सिंचाई होगी हाई-टेक
अब जब डूबी हुई जमीन खेती लायक हो जाएगी, तो अगला सवाल पानी का है. क्या आपके गांव की नहर या खाला भी सालों से मरम्मत की बाट जोह रहा है? अगर हां, तो इस प्रोजेक्ट में इसका भी पक्का इंतजाम कर लिया गया है. सूखी पड़ी नहरों में फिर से पानी लौटाने और पूरी सिंचाई व्यवस्था को हाई-टेक बनाने के लिए राज्य की बची हुई सभी 678 नहरों का पूरी तरह से कायाकल्प किया जा रहा है. इसके लिए सरकार ने फंडिंग का भी एकदम सॉलिड जुगाड़ किया है. योजना के मुताबिक, 106 नहरें सीधे वर्ल्ड बैंक के पैसे से संवरेंगी, 293 नहरों को राज्य सरकार अपने बजट से चकाचक करेगी और बाकी 279 नहरों को नाबार्ड (NABARD) की मदद से बिल्कुल नया जैसा बनाया जाएगा.
नहरों के बाद बारी आती है उस पानी को आपके खेतों तक पहुंचाने की. इसके लिए 620 पानी के रास्तों (खालों) को पक्का और दुरुस्त करने का काम किया जाएगा, ताकि पानी बिना किसी रुकावट के सीधे खेतों तक पहुंचे. इससे करीब 3.18 लाख एकड़ जमीन की प्यास बुझेगी. बात सिर्फ पुराने सिस्टम को ठीक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती को भविष्य के हिसाब से आधुनिक भी बनाया जा रहा है. इसी के चलते 120 माइक्रो-इरिगेशन प्रोजेक्ट्स को भी अपग्रेड किया जा रहा है.
डार्क जोन से बाहर आएंगे ये 7 जिले
नहरों और सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के साथ-साथ, सरकार का ध्यान उस बड़े संकट पर भी है जो जमीन के नीचे गहराई में पनप रहा है. हरियाणा के कई जिलों में भू-जल स्तर बहुत तेजी से नीचे गया है. इसे रोकने के लिए सरकार ने 7 जिलों को अपने खास रेडार पर रखा है. इनमें भिवानी, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी और सिरसा जिले शामिल हैं. इन जिलों को पानी के मामले में डार्क जोन से बाहर निकालने के लिए एक ठोस प्लान तैयार किया गया है. इसके तहत बारिश के पानी को सहेजने और ग्राउंडवाटर को दोबारा रिचार्ज करने के लिए इन सात जिलों में 147 नए तालाब और जल निकाय विकसित किए जाएंगे.
पानी की कम खपत वाली खेती पर जोर
पानी बचाने की यह मुहिम सिर्फ तालाब या नहरें बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती के तौर-तरीकों को भी अब स्मार्ट बनाया जा रहा है. आने वाला समय 'स्मार्ट फार्मिंग' का है, और यह प्रोजेक्ट उसी दिशा में एक बड़ी छलांग है. योजना के तहत पानी की कम खपत वाली खेती पर जोर दिया जा रहा है, जिसके लिए सरकार 5 लाख एकड़ जमीन पर धान की सीधी बिजाई (DSR तकनीक) और 1.12 लाख एकड़ में फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को बढ़ावा दे रही है. इसके अलावा, पानी के एक बेहतरीन मैनेजमेंट मॉडल के तहत जींद, कैथल और गुरुग्राम (धनवापुर) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) से साफ किए गए पानी का भी सही इस्तेमाल होगा. इस पानी को बेकार बहने देने के बजाय, इसे 28000 एकड़ खेतों की सिंचाई के काम में लाया जाएगा.
अब गांव वालों के हाथ में होगी कमान
अक्सर ऐसा देखा गया है कि बड़ी-बड़ी सरकारी योजनाएं महज फाइलों में दबकर रह जाती हैं, क्योंकि उनमें आम जनता की सीधी भागीदारी नहीं होती. लेकिन इस बार सरकार ने इस कमी को भी दूर कर दिया है और इस प्रोजेक्ट की सफलता की चाबी सीधे गांव वालों के हाथ में सौंप दी है. इसके लिए जमीनी स्तर पर 'जल समितियां' बनाई जा रही हैं. अब गांव के लोग खुद इन समितियों के जरिए अपने यहां के पानी के रास्तों और खालों की देखरेख करेंगे. सबसे अच्छी बात यह है कि इस जिम्मेदारी को निभाने में पैसों की कोई अड़चन न आए, इसके लिए सरकार अपनी तरफ से एक अलग फंड भी बनाएगी. यानी, पैसों की कमी के चलते अब गांव के पानी का कोई भी काम बीच में नहीं रुकेगा.
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