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हर 4 में से 3 भारतीय पर भयंकर गर्मी का खतरा, हर साल सैकड़ों मौतें... 'साइलेंट किलर' बन रहा बढ़ता तापमान?

गर्मी सताने लगी है. कई शहर तप रहे हैं. कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री छूने लगा है. हर चार में से तीन भारतीय पर भयंकर गर्मी का खतरा मंडरा रहा है.

हर 4 में से 3 भारतीय पर भयंकर गर्मी का खतरा, हर साल सैकड़ों मौतें... 'साइलेंट किलर' बन रहा बढ़ता तापमान?
देश के कई हिस्सों में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है.
IANS
  • मौसम विभाग के अनुसार 2025 में भारत के ज्यादातर हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक दर्ज हुआ है
  • 1901 से 2025 तक सबसे गर्म 15 वर्षों में से दस साल हाल के पंद्रह वर्षों में आए हैं
  • भारत के 57 प्रतिशत जिलों में भयंकर गर्मी का खतरा है, जहां देश की 76 प्रतिशत आबादी रहती है
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नई दिल्ली:

चुभती-जलती गर्मी का मौसम आ गया है... बारिश के कारण गर्मी की मार अभी ऐसी नहीं पड़ी है जैसी पिछले साल से पड़ रही थी. लेकिन अब गर्मी झुलसाने लगी है. कई जगहों पर पारा 40 डिग्री को पार कर गया है. मौसम विभाग ने बताया था कि अप्रैल से जून के बीच देश के ज्यादातर हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से ज्यादा रहेगा. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस साल भी गर्मी बहुत ज्यादा झुलसाने वाली है.

वैसे तो दुनियाभर में ही तापमान और गर्मी बढ़ रही है लेकिन भारत पर इसका असर ज्यादा दिख रहा है. हमारे देश में गर्मी किस तरह से बढ़ रही है? इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब से मौसम विभाग ने रिकॉर्ड रखना शुरू किया है, तब से 8वां सबसे गर्म साल 2025 था. मौसम विभाग 1901 से मौसम का रिकॉर्ड रख रहा है.

कितना गर्म हो रहा है भारत?

मौसम विभाग के मुताबिक, 2025 में धरती की सतह का तापमान 0.28 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा. 1901 के बाद से सबसे ज्यादा गर्म साल 2024 रहा था. 2024 में सतह का तापमान 0.65 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया था.

चिंता की बात यह है कि 1901 से 2025 तक जो सबसे गर्म 15 साल रहे हैं, उनमें से 10 साल हाल के 15 सालों में रहे हैं. 2011 से 2025 के दौरान 15 साल सबसे गर्म रहे हैं. 

मौसम विभाग का कहना है कि 2016 से 2025 तक का दशक सबसे गर्म रिकॉर्ड किया गया है. इस दशक में हर साल तापमान औसतन 0.32 डिग्री ज्यादा रहा. 2025 में 6 महीने- मई, जून, जुलाई, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में ही तापमान सामान्य से नीचे या इसके करीब रहा. 

अब गर्मी तो गर्म हो ही रही है लेकिन सर्दी भी गर्म होने लगी है. अब सर्दियों में भी औसत तापमान सामान्य से ज्यादा हो रहा है. 2025 में सर्दी के दो महीने- जनवरी और फरवरी में तापमान 1.17 डिग्री ज्यादा रहा है. प्री-मॉनसून सीजन (मार्च से मई) में 0.29 डिग्री और मॉनसून सीजन (जून से सितंबर) में 0.09 डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया. यह दिखाता है कि अब गर्मी 'कुछ दिन' की नहीं रह गई है.

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भारत में कैसे बढ़ रहा गर्मी का खतरा?

क्लाइमेट चेंज के कारण दुनियाभर में तापमान तेजी से बढ़ रहा है. जो यूरोपीय देश अब तक अपनी सर्दियों के लिए जाने जाते थे, वहां भी अब गर्मी खूब बढ़ रही है. भारत पर भी इसका जबरदस्त असर पड़ रहा है.

मई 2025 में काउंसिल ऑन एनर्जी, एन्वायर्मेंट एंड वॉटर (CEEW) की 'हाउ एक्सट्रीम हीट इज इम्पैक्टिंग इंडिया' रिपोर्ट आई थी. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत के 734 में से 417 यानी 57% जिलों पर 'भयंकर गर्मी' का खतरा मंडरा रहा है. इन जिलों में भारत की 76% आबादी रहती है. इसका मतलब हुआ कि हर 4 में से 3 भारतीय पर भयंकर गर्मी का खतरा है.

इस रिपोर्ट में कहा गया था कि दिल्ली, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा खतरा है.

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रिपोर्ट बताती है कि 40 साल में भारत में गर्मी तेजी से बढ़ी है. पिछले एक दशक में गर्म दिनों की तुलना में गर्म रातें ज्यादा तेजी से बढ़ी हैं. लगभग 70% जिलों में ये ट्रेंड देखने को मिला है. गर्म रातें इसलिए चिंता बढ़ाती हैं क्योंकि वे शरीर के लिए दिन की गर्मी से ठंडा होना और ठीक होना मुश्किल बना देती हैं.

अब ज्यादातर बड़े शहर 'अर्बन हीट आइलैंड' बनते जा रहे हैं. यानी, इन शहरों में गर्मी खूब बढ़ रही है. 'अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट' उसे कहा जाता है, जब शहरों की सड़कें, बिल्डिंग, छतें या घास-मिट्टी दिन में गर्मी सोख लेती है और रात में धीरे-धीरे छोड़ती है. इस कारण दिन तो गर्म होता ही है. रात में भी गर्मी खूब बढ़ जाती है.

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कितनी जानलेवा है गर्मी?

किसी भी चीज की एक हद होती है और जब यह पार होती है तो तबाही या बर्बादी होना तय है. इंसानी शरीर की भी गर्मी सहने की एक हद होती है. 

अब दिक्कत वाली बात यह है कि भारत में गर्मी के साथ-साथ उमस भी खूब बढ़ रही है. इस कारण गर्मी ज्यादा महसूस होती है, क्योंकि पसीना सूख नहीं पाता. CEEW की रिपोर्ट बताती है कि जब शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो जाता है तो पसीना ही शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है लेकिन ज्यादा उमस होने पर पसीना भाप बनकर उड़ नहीं पाता और 'हीट स्ट्रेस' पैदा होता है.

तापमान बढ़ने के कारण हीटवेव वाले दिनों की संख्या बढ़ गई है. हीटवेव की संख्या को लेकर ताजे आंकड़े मौजूद नहीं हैं. लेकिन केंद्र सरकार की 2025 की रिपोर्ट बताती है कि 2023 की तुलना में 2025 में हीटवेव वाले दिनों की संख्या बढ़ी है. 2023 में अप्रैल से जून के बीच हीटवेव वाले 111 दिन थे. जबकि 2024 में इनकी संख्या बढ़कर 205 हो गई. 

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हीटवेव वाले दिनों की संख्या दिल्ली, यूपी और पंजाब समेत कई राज्यों में बढ़ रहे हैं. उदाहरण के तौर पर 2023 में अप्रैल से जून के बीच यूपी में हीटवेव वाले 6 दिन थे, जिनकी संख्या 2024 में बढ़कर 18 हो गई. दिल्ली में 2023 में हीटवेव वाले 4 दिन थे, जो 2024 में बढ़कर 18 दिन हो गए. 

हीटवेव और बढ़ता तापमान जानलेवा भी होता है. गर्मी के कारण हर साल सैकड़ों मौतें हो रही हैं. NCRB पर हीटवेव या हीटस्ट्रोक से होने वाली मौतों का आंकड़ा 2023 तक का मौजूद है. आंकड़े बताते हैं कि 2021 में गर्मी के कारण 374 मौतें हुई थीं. 2022 में यह बढ़कर 730 पर पहुंच गया. वहीं, 2023 में हीटवेव या हीटस्ट्रोक के कारण 804 मौतें हुई थीं. 

लगातार बढ़ता तापमान, 'अर्बन हीट आइलैंड' में तब्दील होते शहर और जानलेवा बनती हीटवेव... ये सब दिखाता है कि गर्मी किस हद तक खतरनाक होती जा रही है?

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