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टूटते ग्लेशियर, बढ़ता जलवायु परिवर्तन का खतरा, नई किताब में मिल रहा है संकट का समाधान

नेपाल में आई त्रासदी ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है. जलवायु परिवर्तन के कारण पूरी दुनिया में इसका असर हो रहा है.

टूटते ग्लेशियर, बढ़ता जलवायु परिवर्तन का खतरा, नई किताब में मिल रहा है संकट का समाधान
नेविगेटिंग द क्लाइमेट क्राइसिस किताब का विमोचन
नई दिल्ली:

नेपाल-चीन सीमा पर ग्लेशियर टूटने की वजह से आयी भयावह आपदा के बाद पूरी दुनिया में क्लाइमेट चेंज के बढ़ते असर को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. पूरे हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, और इनके टूटने का खतरा बड़ा हो रहा है. इस बढ़ते क्लाइमेट संकट से निपटने के विकल्पों पर चिंतन रिसर्च फाउंडेशन ने एक नई किताब - 'नेविगेटिंग द क्लाइमेट क्राइसिस: पर्सपेक्टिव्स एंड एक्शन्स फ्रॉम द ग्लोबल साउथ फॉर अडैप्टेशन एंड मिटिगेशन' (Navigating the Climate Crisis: Perspectives and Actions from the Global South for Adaptation and Mitigation) मंगलवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में विमोचन किया गया. 

इस किताब को चिंतन रिसर्च फाउंडेशन के सेंटर फॉर क्लाइमेट चेंज एंड एनर्जी ट्रांजिशन के सेंटर हेड, डॉ. देबाजीत पालित और दो युवा रिसर्चर डॉ. आकांक्षा जैन और ओंकार धनके ने एडिट किया है. इसमें ग्लोबल साउथ के स्कॉलर्स, रिसर्चर्स और प्रैक्टिशनर्स के 22 लेख शामिल हैं, जिसमें जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों और उससे निपटने के तरीकों पर विस्तार से विश्लेषण किया गया है.

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इस किताब के लांच के मौके पर डॉ. देबजीत पालित ने कहा कि दुनियाभर में ग्लोबल वार्मिंग हो रहा है, ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. हमने हाल ही में हिमाचल प्रदेश में डिजास्टर रेसिलियंस पर एक वर्कशॉप किया था. वहां एक प्रेजेंटेशन में यह दिखाया गया कि हिमाचल में बहुत सारे ग्लेशियर  खत्म हो रहे हैं, ऐसे में इन इलाकों में भविष्य में पानी की कमी हो सकती है. आज ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एनर्जी ट्रांजिशन और क्लाइमेट चेंज बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है. हम ज्यादातर क्लाइमेट चेंज को विकसित देशों के नजरिए से देखते हैं, लेकिन क्लाइमेट चेंज का ज्यादा असर ग्लोबल साउथ के देशों पर एशिया और अफ्रीका के देशों पर ज्यादा हो रहा है. हमें लगा कि ग्लोबल साउथ के लेंस से जलवायु परिवर्तन को एनालाइज बेहद महत्वपूर्ण है. इसी को केंद्र बिंदु बनाकर हमने ग्लोबल साउथ के बड़े लेखकों को संपर्क किया और उनके शोध को इस किताब में शामिल किया है.

इस किताब को तैयार करने में एक साल लगा. इसमें दुनिया भर के एनर्जी और क्लाइमेट विशेषज्ञों ने कंट्रीब्यूट किया है. अगला संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP 31) की बैठक इस साल नवंबर में तुर्की के अंतालया शहर में होने वाली है. डॉ. देबजीत पालित ने कहा कि COP की बैठक में क्लाइमेट चेंज पर ग्लोबल साउथ के पर्सपेक्टिव को दुनिया के सामने रखना जरूरी होगा.
 

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