- हिमाचल प्रदेश के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी हुई है, जबकि मैदानी और मध्य इलाके शुष्क और ठंडे हैं
- राज्य में तापमान लगातार गिर रहा है, जिससे आम जनजीवन और कृषि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है
- लाहौल-स्पीति क्षेत्र में तापमान माइनस में पहुंच गया है और झरने पूरी तरह से जम चुके हैं
हिमाचल प्रदेश की ऊंची चोटियों पर तो इंद्रदेव मेहरबान हो गए हैं, जबकि मध्य और मैदानी इलाके शुष्क पड़े हुए हैं. मध्य इलाकों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश न होने से शुष्क ठंड का प्रकोप बढ़ गया है. जानकारी के मुताबिक, राज्य में सर्दी ने इस समय अपना सबसे तीखा रूप दिखाना शुरू कर दिया है. पूरा राज्य भीषण ठंड की चपेट में है. पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक तापमान लगातार गिर रहा है. इससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है.
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लाहौल-स्पीति में जम गए झरने
ज़िला कांगड़ा में भी शीतलहर जारी है. रात को जो ओस गिर रही है वह सुबह तक बर्फ की चादर में तब्दील हो जा रही है. वहीं लाहौल-स्पीति में तो ठंड इतनी ज्यादा है कि पारा माइनस में पहुंच गया है. झरने तक पूरी तरह से जम चुके हैं. बर्फ के बीच से पानी बहता हुआ दिखाई दे रहा है.

मनाली शहर सीजन में बर्फबारी को तरसा
वहीं हिमाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में पिछले करीब 3 महीनों से पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, जिससे सूखे जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं. इसका असर गेहूं सहित अन्य रबी की फसलों और सेब और अन्य फलों पर पड़ने लगा है. मौसम विभाग का कहना है कि घने कोहरे और शीतलहर के चलते खासकर सुबह और रात के समय वाहन चालकों और बुजुर्गों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि आने वाले कुछ दिनों तक ठंड का यह दौर यूं ही बना रह सकता है.
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