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सूदखोर ने किसान की निकलवा ली थी किडनी, अब इंटरनेशनल रैकेट का हुआ खुलासा, नामी डॉक्टर भी शामिल

इस बड़े अंतरराष्ट्रीय किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा तब हुआ, जब महाराष्ट्र के चंद्रपुर के एक किसान ने वीडियो में अपना दर्द बयां किया

सूदखोर ने किसान की निकलवा ली थी किडनी, अब इंटरनेशनल रैकेट का हुआ खुलासा, नामी डॉक्टर भी शामिल

एक गरीब किसान के बेबसी भरे वीडियो ने देश में बड़े अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट का भंडाफोड़ कर दिया. ऐसा रैकेट जिसमें दिल्ली और त्रिची के नामी डॉक्टर शामिल थे और जिसका जाल भारत से लेकर कंबोडिया और अन्य देशों तक फैला था. सूदखोरों और गरीबी के जाल में फंसे लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें किडनी बेचने के लिए तैयार किया जाता था. एक-एक किडनी ट्रांसप्लांट के 50 लाख से 80 लाख रुपये तक वसूले जाते थे और गरीबों को मामूली रकम देकर टरका दिया जाता था. भारत और विदेशों में सर्जरी की जाती थीं. 

वीडियो में फूटा किसान का दर्द 

इस बड़े किडनी रैकेट का खुलासा तब हुआ, जब महाराष्ट्र के चंद्रपुर के एक किसान ने वीडियो में अपना दर्द बयां किया. रोशन कुडे नाम के किसान का ये वीडियो पिछले महीने दिसंबर में सामने आया था. वीडियो में किसान ने रोते हुए बताया कि सूदखोरों का कर्ज चुकाने के लिए उसने कंबोडिया जाकर अपनी किडनी 8 लाख रुपये में बेच दी. 

चंद्रपुर के किसान ने अपनी व्यथा एक वीडियो में बताई थी.

चंद्रपुर के किसान ने अपनी व्यथा एक वीडियो में बताई थी.

पुलिस ने SIT बनाकर जांच की

किसान का यह दर्द भरा सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस के कान खड़े हुए. जांच शुरू हुई तो एक ऐसे सिंडिकेट का पता चला जो गरीबों के अंगों से अपनी तिजोरी भर रहा था. चंद्रपुर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) गठित की. जांच से चौंकाने वाले खुलासे हुए.

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दिल्ली, त्रिची के डॉक्टर चलाते थे रैकेट

एसआईटी की जांच इंटरनेशनल किडनी रैकेट तक पहुंची. पुलिस का दावा है कि इस रैकेट को दिल्ली के डॉ. रविंदर पाल सिंह और त्रिची के स्टार किम्स अस्पताल के डॉ. राजारत्नम गोविंदस्वामी जैसे नामी डॉक्टर चला रहे थे. रामकृष्ण सुंचु जैसे एजेंट डॉक्टरों के लिए किडनी डोनर ढूंढकर लाने का काम किया करते थे. ये डॉक्टर और उनके एजेंट गरीब और कर्जदार लोगों को बहला-फुसलाकर अंग दान के लिए तैयार करते थे.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला था सिंडिकेट 

चंद्रपुर के पुलिस अधीक्षक मुमक्का सुदर्शन ने बताया कि यह गिरोह न सिर्फ भारत के विभिन्न राज्यों में एक्टिव था बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया खासकर कंबोडिया के निजी अस्पतालों में भी अवैध ट्रांसप्लांट करवाए जाते थे. रामकृष्ण सुंचू जैसे एजेंट गरीबों को टारगेट करते थे और फिर ये सफेदपोश डॉक्टर ट्रांसप्लांट का काम करते थे.

पुलिस ने बताया कि ये डॉक्टर अमीर मरीजों से एक किडनी ट्रांसप्लांट करने के बदले 50 लाख रुपये से लेकर 80 लाख रुपये तक वसूलते थे. वहीं किडनी देने वाले गरीब को महज 5 लाख से 8 लाख थमाए जाते थे. किडनी ट्रांसप्लांट भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के प्राइवेट अस्पतालों में किए जाते थे.
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