- हेमा मालिनी का पश्चिम बंगाल में डांस शो स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा कारणों से दोबारा कैंसिल हो गया है
- हेमा मालिनी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर बंगाल में कलाकारों के साथ हो रहे खराब व्यवहार पर चिंता जताई
- हेमा मालिनी ने पश्चिम बंगाल में सांस्कृतिक फासीवाद और कलाकारों की आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव की बात कही है
बीजेपी सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी का पश्चिम बंगाल में डांस शो फिर कैंसिल हो गया है, स्थानीय प्रशासन इसके पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दे रहे हैं. हेमा मालिनी का उनका कहना है कि यह स्थिति सुरक्षा जोखिम पैदा करती है और आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव भी डालती है. इसको लेकर उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भी लिखा है. हेमा मालिनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि उन्होंने अपने पत्र में पश्चिम बंगाल में कलाकारों और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि वहां का माहौल कलाकारों के लिए ठीक नहीं है और इसका असर उनके काम और रोजगार पर भी पड़ रहा है.
बंगाल में मेरा साथ 8-9 साल से ऐसा हो रहा
पश्चिम बंगाल में एक बार फिर शो कैंसिल होने पर भड़की हेमा मालिनी ने कहा, "पश्चिम बंगाल को कला की राजधानी कहा जाता था, लेकिन अब वहां कला पर राजनीति की छाया पड़ गई है. कोलकाता में मेरा एक नृत्य प्रोग्राम तय किया गया था, लेकिन 10 दिन पहले मुझे कहा गया की शो कैंसिल हो गया है. एक स्थानीय उद्योगपति ने एक वैकल्पिक वेन्यू तय किया, लेकिन वहां भी मेरा प्रोग्राम कैंसिल हो गया. मेरा साथ 8-9 साल से ऐसा हो रहा है. हर बार कहा जाता है कि सरकार सिक्योरिटी मुहैया नहीं करा सकेगी. मेरा प्रोग्राम गैर-राजनीतिक है. मैं सांसद हूं, लेकिन मुझे सिक्योरिटी नहीं दी गई. लगता है पश्चिम बंगाल में कल्चरल इमरजेंसी लगी हुई है. पश्चिम बंगाल में संस्कृति को दबाया जा रहा है."
#WATCH | BJP MP Hema Malini has written to the Speaker alleging "cultural fascism" in West Bengal and how it is a "security risk" and also has "negative" impact on livelihoods.
— ANI (@ANI) April 2, 2026
She says, "West Bengal is the land that gave birth to luminaries like Rabindranath Tagore and Bankim… pic.twitter.com/OmaF3nNNay
हेमा मालिनी ने स्पीकर को लिख पत्र
हेमा मालिनी ने बताया, "मैंने माननीय स्पीकर को पत्र लिखकर पश्चिम बंगाल में सांस्कृतिक फासीवाद की स्थिति को उजागर किया है और बताया है कि यह सांस्कृतिक जगत के कई लोगों को किस तरह प्रभावित कर रहा है. यह सुरक्षा के लिए खतरा होने के साथ-साथ आजीविका पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है." उन्होंने कहा कि यह स्थिति सिर्फ सांस्कृतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक तरह से सुरक्षा का मुद्दा भी बनती जा रही है. उनके मुताबिक, जब कलाकार खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते या अपने काम को सामने नहीं ला पाते तो यह पूरे समाज के लिए चिंता की बात होती है. सांस्कृतिक फासीवाद शब्द का मतलब आमतौर पर यह होता है कि किसी खास विचारधारा के तहत संस्कृति, कला, मीडिया और शिक्षा को नियंत्रित या प्रभावित किया जाए.
हालांकि, जब मीडिया ने उनसे इस पत्र के पीछे की वजह के बारे में पूछा, तो उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं कहा. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि यह उनका निजी अनुभव रहा है, जिसने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया. उन्होंने कहा, "मुझे समझ नहीं आता कि कलाकारों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है. यह देखकर मुझे बहुत दुख हुआ."
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पहले भी लग चुके बंगाल सरकार पर आरोप
पश्चिम बंगाल में इस तरह के आरोप पहले भी सामने आ चुके हैं. पिछले साल फिल्म द बंगाल फाइल्स को लेकर भी विवाद हुआ था. फिल्म से जुड़े लोगों ने दावा किया था कि राज्य में इसकी रिलीज़ से पहले ही इसे अनौपचारिक रूप से रोक दिया गया. फिल्म की प्रोड्यूसर पल्लवी जोशी ने आरोप लगाया था कि थिएटर मालिकों पर दबाव डाला गया, जिसके कारण फिल्म के ट्रेलर लॉन्च को भी रद्द करना पड़ा. हालांकि राज्य सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ऐसा स्क्रीन की कमी के कारण हुआ, लेकिन फिल्म निर्माताओं का कहना था कि फिल्म के संवेदनशील विषय के कारण इसे दबाया जा रहा है.
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