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This Article is From Oct 15, 2024

SC में जज और वकील के बीच तीखी नोकझोंक, बुलाने पड़े सुरक्षाकर्मी, जानिए क्‍या था मामला

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की पीठ और एक वकील के बीच नोंकझोंक हो गई. याचिकाकर्ता ने जस्टिस गोगोई के खिलाफ इन-हाउस जांच का आदेश मांगा था. पीठ ने जब याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया तो यह नोंकझोंक हो गई.

SC में जज और वकील के बीच तीखी नोकझोंक, बुलाने पड़े सुरक्षाकर्मी, जानिए क्‍या था मामला
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
नई दिल्‍ली:

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस एससी शर्मा की पीठ और एक वकील के बीच तीखी नोकझोंक हो गई, जिसके बाद अदालत ने सुरक्षाकर्मियों को बुलाकर वकील को बाहर का रास्ता दिखा दिया. दरअसल, वकील ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ जांच की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट में यह नोंकझोंक उस वक्‍त शुरू हुई जब पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. इसके बाद आखिरकार जजों को याचिकाकर्ता अरुण रामचंद्र हुबलीकर को न्यायालय कक्ष से बाहर निकालने के लिए सुरक्षाकर्मियों को बुलाना पड़ा. 

याचिका को खारिज करने से पहले न्यायालय ने कहा, "हम इसे खत्म करने जा रहे हैं. एक के बाद एक कई आवेदन आ रहे हैं."

जस्टिस गोगोई के खिलाफ जांच का मांगा था आदेश

याचिकाकर्ता ने जस्टिस गोगोई के खिलाफ इन-हाउस जांच का आदेश मांगा था, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, क्योंकि उन्होंने सेवा विवाद से संबंधित याचिका खारिज कर दी थी. 

उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा कि मैंने अपनी एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई पूरी की है. जस्टिस गोगोई ने एक फैसले में अनुचित रूप से हस्तक्षेप किया है. उन्होंने मेरी अवैध बर्खास्तगी के संबंध में मेरे पक्ष में पारित आदेश में हस्तक्षेप करके मेरा जीवन दुखी कर दिया है.  

मुझे मरने से पहले न्याय तो मिलना चाहिए : हुबलीकर 

हालांकि, न्यायालय याचिका पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं था. बेंच ने कहा, "हम जुर्माना लगाने जा रहे हैं. जज का नाम मत लीजिए. आपके मामले में कुछ भी नहीं है." 

इस पर हुबलीकर ने जवाब दिया, "कुछ भी नहीं? ऐसा कैसे कहा जा सकता है?" उन्‍होंने कहा कि यह मेरे साथ अन्याय है. कम से कम मुझे मरने से पहले न्याय तो मिलना चाहिए. 

जस्टिस त्रिवेदी ने सुरक्षाकर्मियों को अदालत में बुलाया 

हालांकि, इसके बाद भी कोर्ट ने याचिका खारिज करने का अपना इरादा दोहराया और कहा, "माफ कीजिए, हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते. आपकी सभी याचिकाएं खारिज की जाती हैं." जिसके बाद गुस्से में हुबलीकर ने जवाब दिया, "आप माफी कैसे मांग सकते हैं? इस कोर्ट ने मेरा जीना दुश्वार कर दिया है."

इसके बाद ही जस्टिस त्रिवेदी ने हुबलीकर को कोर्ट रूम से बाहर निकालने के लिए सुरक्षाकर्मियों को बुलाने को कहा. साथ ही बेंच ने चेतावनी देते हुए कहा, "सुरक्षाकर्मियों को बुलाइए. हमें आपके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर मत कीजिए. अगर आप एक भी शब्द बोलते हैं, तो आप बाहर हो जाएंगे." 

हालांकि हुबलीकर ने नरमी से इनकार कर दिया और कहा, "मैडम, आप मेरे साथ अन्याय कर रही हैं. शिकायतकर्ता के खिलाफ नोटिस जारी करने में क्या समस्या है?" इसके बाद कोर्ट ने कहा, "सुरक्षाकर्मी कृपया उसे बाहर ले जाएं. हम सुरक्षाकर्मियों को बुला रहे हैं."

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