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This Article is From Oct 13, 2020

हाथरस केस को दिल्ली या मुंबई ट्रांसफर कराना चाहता है परिवार, कोर्ट में रखी मांग: वकील सीमा कुशवाहा

परिवार की मांग है कि इस केस को दिल्ली या मुंबई ट्रांसफर किया जाए. सोमवार को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई में पीड़ित पक्ष की ओर से कोर्ट के सामने तीन मांगें रखी गई हैं, जिसमें एक यह मांग भी रखी गई है. 

हाथरस केस को दिल्ली या मुंबई ट्रांसफर कराना चाहता है परिवार, कोर्ट में रखी मांग: वकील सीमा कुशवाहा
हाथरस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है.
लखनऊ:

हाथरस में पिछले महीने कथित रूप से गैंगरेप (Hathras Case) और प्रताड़ना की शिकार हुई 20 साल की युवती की मौत के बाद यह मामला सीबीआई जांच (Hathras CBI Probe) तक पहुंच गया है. इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है. हालांकि, परिवार की मांग है कि इस केस को दिल्ली या मुंबई ट्रांसफर किया जाए. सोमवार को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई में पीड़ित पक्ष की ओर से कोर्ट के सामने तीन मांगें रखी गई हैं, जिसमें एक यह मांग भी रखी गई है. 

निर्भया का केस लड़ने वाली वकील सीमा कुशवाहा ने मीडिया को बताया कि 'परिवार चाहता है कि इस केस को दिल्ली या मुंबई ट्रांसफर किया जाए.' उन्होंने यह भी बताया कि परिवार ने कोर्ट में आग्रह किया है कि जांच की डिटेल्स को सार्वजनिक करने पर रोक लगाई जाए. इस केस की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होनी है. परिवार ने मीडिया के सामने कहा कि वो पीड़िता का अस्थि विसर्जन तब तक नहीं करेंगे, जबतक उसे न्याय नहीं मिल जाता. 

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन से कोर्ट ने इस केस को हैंडल करने के तरीके और पीड़िता का आधी रात को दाह संस्कार करने को लेकर कड़े सवाल पूछे. इस केस को सीबीआई ने टेकओवर कर लिया है. सीबीआई की टीम रविवार को कुछ दस्तावेज इकट्ठे करने गांव गई थी और फिर लौट आई थी.

यह भी पढ़ें : सीबीआई ने हाथरस मामले की प्राथमिकी वेबसाइट पर डाली, कुछ ही घंटों बाद हटाई

हाथरस के इस गांव में बस कुछ दलित परिवारों में से आने वाले पीड़िता के परिवार ने ऊंची जाति के परिवारों से धमकियां मिलने की शिकायत की थी, जिसके बाद उन्हें सुरक्षा दी गई है. सोमवार को परिवार ने कहा कि उन्हें बहुत असुरक्षित महसूस हो रहा है, ऐसे में उन्हें और सुरक्षा की जरूरत है.

बता दें कि कोर्ट में हाथरस के डीएम ने आधी रात के दाह संस्कार को सही ठहराया है. पुलिस ने रात के ढाई बजे पीड़िता का अंतिम संस्कार किया था और उस दौरान लड़की के पिता और भाइयों को उनके घर में बंद कर दिया था. परिवार ने पुलिस से उन्हें आखिरी बार शव देने का अगली सुबह अंतिम संस्कार करने का आग्रह किया था, जिसे पुलिस ने नकार दिया था. डीएम प्रवीण कुमार लक्सर ने कहा कि 'राज्य सरकार की ओर से इस तरह दाह संस्कार कराने का कोई प्रेशर नहीं था.' उन्होंने कहा कि ये फैसला स्थानीय प्रशासन ने लिया था. उनका कहना था कि लॉ एंड ऑर्डर को बनाए रखने के लिए पुलिस ने ऐसा किया. हालांकि, इस दलील को परिवार ने चुनौती दी है.

यह भी पढ़ें: हाथरस केस: यूपी सरकार का हलफनामा नहीं आया, सुप्रीम कोर्ट में 15 अक्टूबर को सुनवाई

कोर्ट ने तीखा सवाल करते हुए कहा कि अगर पीड़िता गरीब परिवार से आने के बजाय किसी अमीर परिवार से आती तो भी क्या उसके साथ ऐसा ही रवैया अपनाया जाता? सीमा कुशवाहा ने NDTV से बताया, 'कोर्ट ने डीएम से पूछा- अगर पीड़िता अमीर परिवार से होती तो? क्या आपने फिर भी इसी तरह उसका दाह संस्कार किया होता?'

इस कथित गैंगरेप, मौत और फिर उसके दाह संस्कार को लेकर पूरे देश में फैले गुस्से के बाद हाईकोर्ट ने 1 अक्टूबर को इस केस का संज्ञान लिया था. सोमवार को पीड़िता के माता-पिता और तीन भाई भारी पुलिस सुरक्षा के बीच सुनवाई के लिए पहुंचे थे.

(PTI से इनपुट के साथ)

Video: हाथरस केस : कोर्ट ने डीएम से पूछा, 'अगर पीड़िता अमीर की बेटी होती तो...'

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