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पहले अंतिम संस्कार और अब अस्थि विसर्जन के लिए नहीं आईं बेटियां, वृद्धाश्रम वालों से बोलीं- हम शर्मिंदा हैं

वृद्धाश्रम मैनेजमेंट ने बड़ी बेटी से फिर से बात की. बड़ी बेटी ने बोला कि अस्थियों का अच्छे से विसर्जन कर देना. आप मेरे पिता के छोटे भाई समझकर पूरी रस्में निभा देना.

पहले अंतिम संस्कार और अब अस्थि विसर्जन के लिए नहीं आईं बेटियां, वृद्धाश्रम वालों से बोलीं- हम शर्मिंदा हैं
वीडियो कॉल पर पिता का अंतिम संस्कार देखी थी बेटी (Photo: NDTV)

सोचिए 10 साल पहले किसी बड़े हादसे में अपने किसी खास परिजन को मृत मान लिया जाए और फिर एक दशक बाद पता उसकी मौत की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए मिले. ऐसे में 10 साल तक उस शख्स पर क्या गुजरा होगा. एक दशक तक बुजुर्ग दर-ब-दर भटकता रहा. पिछले दिनों ऐसा ही एक मामला हरियाणा के सोनीपत से सामने आया. पनीपत के एक वृद्धाश्रम में कपड़ा व्यापारी शिवचरण राम रतन गुप्ता की मौत का मामला सामने आया था. मृतक पानीपत के एक वृद्धाश्रम में रह रहे थे. पिछले दिनों मौत के बाद वृद्धाश्रम मैनेजमेंट ने ही उनका अंतिम संस्कार करवाया और अब हरिद्वार में अस्थि विसरजन हुआ है.

मृतक के भाई को सोशल मीडिया के जरिए मालूम चला कि शिवचरण की मौत अब हुई है. इसके बाद उन्होंने हरिद्वार पहुंचकर रस्म अदा की.

हरिद्वार में अस्थियों का विसर्जन

अब हरिद्वार में शिवचरण गुप्ता की अस्थियों का विसर्जन हुआ है. बेटियों के नहीं पहुंचने से फिर यह मामला चर्चा में आया है. मृतक के बड़े भाई महेंद्र गुप्ता हरिद्वार पहुंचे और विसर्जन के वक्त मौजूद रहे.

महेंद्र गुप्ता ने कहा कि मैं तो 10 साल पहले ही अपने भाई शिव चरण की मौत मान चुका था. महेंद्र, नेपाल में आए भूकंप के दौरान भाई की मौत होने की मान बैठे थे. शिवचरण गुप्ता सात भाई बहनों से एक थे. अब बड़े भाई महेंद्र गुप्ता ने हरिद्वार पहुंचकर अस्थियों का विसर्जन किया. पिछले 10 साल से शिव चरण का उनके परिवार से कोई संपर्क नहीं हुआ था. तीनों बेटियां अस्थि विसर्जन में भी नही शामिल हो सकीं. 

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वृद्धाश्रम के लोगों की बेटियों से बात

वृद्धाश्रम मैनेजमेंट ने बड़ी बेटी से फिर से बात की. बड़ी बेटी ने बोला कि अस्थियों का अच्छे से विसर्जन कर देना. आप मेरे पिता के छोटे भाई समझकर पूरी रस्में निभा देना. बड़ी बेटी ने कहा कि तबीयत ठीक होती तो मैं खुद हरिद्वार जरूर आती. हम शर्मिंदा तो बहुत हैं लेकिन हमारी कुछ मजबूरी रही होगी, इसीलिए हम नहीं आ सके. बेटियों ने कहा कि वे अपने पिता से बहुत प्यार करती थीं. मृतक की बेटी ने कहा कि मेरे पिता हमारे साथ रहने को तैयार नहीं थे. 

अस्थि विसर्जन के बाद हवन और कन्याओं को भोजन करवाने के सवाल पर बेटियों ने कहा कि वे अपने घर पर तेरहवीं की रस्म अदा करेंगी. मृतक के भाई महेंद्र गुप्ता ने कहा किबेटियों की कोई मजबूरी रही होगी. ऐसे पर रिश्तों पर तमाम तरह के सवालों के बीच भाई और समाजसेवियों ने अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन करके अपना फर्ज निभाया.

कपड़ा व्यापारी थे शिव चरण गुप्ता

सोनीपत में 'समाज कल्याण शिक्षा समिति वृद्धाश्रम' के मैनेजर आनंद कुमार ने ANI को बताया कि मृतक शिव चरण गुप्ता मुंबई के कपड़ा व्यापारी थे. उन्होंने बताया कि बिजनेस में नुकसान होने के बाद गुप्ता अपनी पत्नी के साथ हरियाणा आ गए थे. उनकी तीन शादीशुदा बेटियां थीं - एक मुंबई में, दूसरी नेपाल में और तीसरी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में रहती थीं.

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