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ग्रेटर नोएडा: ईस्टर्न पेरिफेरल एंट्री तक सफर होगा आसान, रोड रिसर्फेसिंग को मिली हरी झंडी

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कासना से सिरसा तक सड़क चौड़ीकरण और सिरसा से ईस्टर्न पेरिफेरल एंट्री तक रिसर्फेसिंग का फैसला किया है. मार्च से काम शुरू होगा और छह माह में पूरा होने की उम्मीद है.

ग्रेटर नोएडा: ईस्टर्न पेरिफेरल एंट्री तक सफर होगा आसान, रोड रिसर्फेसिंग को मिली हरी झंडी
  • ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कासना से सिरसा तक सड़क चौड़ीकरण का निर्णय लिया है
  • कासना से सिरसा तक सड़क चौड़ीकरण मार्च में शुरू होगा, जिसमें तीन लेन से चार लेन किया जाएगा
  • सिरसा से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तक रोड की रीसर्फेसिंग मिलिंग पद्धति से पर्यावरण संरक्षण के साथ की जाएगी
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ग्रेटर नोएडा:

कासना से सिरसा गोलचक्कर होते हुए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे एंट्री प्वाइंट के बीच सफर अब और आसान हो जाएगा. ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कासना से सिरसा तक सड़क केे चौड़ीकरण और सिरसा से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे एंट्री प्वाइंट तक रीसर्फेसिंग कराने का निर्णय लिया है. कासना से सिरसा गोलचक्कर तक की रोड को चौड़ा करने का काम मार्च में शुरू हो जाएगा, जबकि सिरसा गोलचक्कर से ईस्टर्न पेरिफेरल एंट्री प्वाइंट तक की रोड का रिसर्फेसिंग के लिए एसीईओ से सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है.

हर दिन गुजरते हैं हजारों वाहन

इससे पहले शहर की मुख्य सड़क 80 मीटर रोड पर भाटी रोटरी से कासना तक व सिरसा से भाटी रोटरी तक 2.30 किलोमीटर में लगभग 7 करोड़ रुपए की लागत से सड़क को दुरुस्त करा दिया गया है. दरअसल ग्रेटर नोएडा के कासना से सिरसा होते हुए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे एंट्री प्वाइंट तक रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं.

एयरपोर्ट के निर्माण के बाद बेहद अहम हो जाएगा यह मार्ग

नोएडा एयरपोर्ट से उड़ान जल्द शुरू के आसार को देखते हुए भी यह मार्ग और भी अहम हो गया है. ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि ने दोनों मार्गों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए. परियोजना विभाग ने कासना से सिरसा तक रोड चौड़ीकरण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है. अगले दो माह में कार्य शुरू होने की उम्मीद है. कासना-सिरसा मार्ग की लंबाई दो किलोमीटर है. वर्तमान में यह तीन-तीन लेन की है. इसे चार-चार लेन का किया जा रहा है.

इसे बनाने में लगभग 9.5 करोड़ रुपये खर्च होंगे. वहीं सिरसा रोटरी से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे एंट्री प्वाइंट तक रोड की रिसर्फेसिंग का कार्य मिलिंग पद्धति से किया जाएगा. इस पद्धति से रोड का निर्माण होने से रोड की ऊंचाई नहीं बढ़ती. साथ ही रीसाइकिल मैटेरियल का उपयोग होने से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है और लागत की कम आएगी. टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे बनाने में छह माह लगेंगे. दोनों ही मार्गों का कार्य प्राधिकरण के परियोजना विभाग के वर्क सर्किल-7 की तरफ से कराया जाएगा. ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सुमित यादव ने कहा है कि इन दोनों ही मार्गों का काम तय समयावधि में पूरा कराया जाएगा, ताकि लोगों की आवाजाही सुगम हो सके.

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