- युद्ध के कारण वैश्विक एलपीजी सप्लाई बाधित हुई, जिससे भारत के गिग वर्कर्स पर गंभीर प्रभाव पड़ा है.
- सिलेंडर की कमी के कारण रेस्टोरेंट, ढाबे, क्लाउड किचन और स्ट्रीट वेंडर्स बंद होने की स्थिति उत्पन्न हो रही है
- फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर ऑर्डर में पचास से साठ प्रतिशत तक भारी गिरावट आई है, जिससे कमाई प्रभावित हुई है.
मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध की वजह से वैश्विक स्तर पर एलपीजी की सप्लाई बाधित हुई है. इसका सीधा और गहरा असर भारत के लाखों गिग वर्कर्स (जैसे जोमैटो और स्विगी के डिलीवरी पार्टनर्स) पर पड़ा है. गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने इस स्थिति को एक मानवीय संकट बताते हुए चिंता व्यक्त की है. यूनियन के मुताबिक, कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी के कारण देश भर के रेस्टोरेंट्स, ढाबे, क्लाउड किचन और स्ट्रीट वेंडर्स बंद होने की कगार पर हैं. इसका नतीजा यह हुआ है कि फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर ऑर्डर्स में 50-60% की भारी गिरावट आई है.
यूनियन के प्रवक्ता निर्मल गोराना ने बताया कि जो कर्मचारी पहले दिन में 30 डिलीवरी करते थे, वे अब केवल 5 से 10 ही कर पा रहे हैं. कई वर्कर्स पर आईडी डीएक्टिवेट होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे वे कर्ज और बेरोजगारी की ओर धकेल दिए गए हैं.
यूनियन की मुख्य मांगें
- GIPSWU ने केंद्र सरकार और संबंधित प्लेटफॉर्म्स के सामने मांगें रखी हैं
- आर्थिक सहायता: जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म प्रभावित वर्कर्स को ₹10,000 की तत्काल राहत राशि दें.
- गैस आपूर्ति: पेट्रोलियम मंत्रालय खाद्य व्यवसायों के लिए 24/7 कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करे.
- काम की सुरक्षा: अगले 3 महीनों तक आईडी डीएक्टिवेट करने पर रोक लगाई जाए और न्यूनतम दैनिक प्रोत्साहन दिए जाएं.
- सामाजिक सुरक्षा: गिग वर्कर्स को 'सोशल सिक्योरिटी कोड 2020' के तहत पूर्ण कवरेज दिया जाए.
सरकार से अपील
यूनियन ने केंद्रीय श्रम मंत्री को पत्र लिखकर एक 48 घंटे के भीतर आपातकालीन बैठक बुलाने की मांग की है. यूनियन का कहना है कि गिग वर्कर्स भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और इस संकट की घड़ी में सरकार और कंपनियों को उनकी सुरक्षा के लिए आगे आना चाहिए.
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