- बिहार के नवादा की सुनिधि कुमारी ने BPSC की 70वीं परीक्षा में आठ सौवीं रैंक प्राप्त कर DSP का पद हासिल किया
- तीन प्रयासों में सफलता पाई और पिता के अधूरे प्रशासनिक अधिकारी बनने के सपने को पूरा करने का संकल्प लिया
- तैयारी में स्वाध्याय, नियमित उत्तर लेखन और एनसीईआरटी की पुस्तकों का अध्ययन मुख्य रूप से किया गया था
"मैं प्रोफेसर बनना चाहती थी. पढ़ाई और शोध में मेरी हमेशा रुचि रही, लेकिन पिताजी का सपना था कि मैं प्रशासनिक अधिकारी बनकर समाज की सेवा करूं. उनके गुजर जाने के बाद मैंने उसी सपने को अपना लक्ष्य बना लिया."
ये कहना है बिहार के नवादा जिले के रोह प्रखंड के सम्हरीगढ़ गांव की सुनिधि कुमारी का, जिन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 800वीं रैंक हासिल कर उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) का पद प्राप्त किया है. उनकी सफलता संघर्ष, धैर्य और पिता के अधूरे सपने को पूरा करने के अटूट संकल्प की प्रेरक मिसाल बन गई है.
-
पीएम मोदी के ग्लोबल विजन से लेकर RBI गवर्नर के बड़े बयान तक, अखबारों के फ्रंट पेज पर छाया NDTV समिट -
'भारतीय दयालु, ईमानदार और बुद्धिमान होते हैं', खामेनेई ने अपने प्रतिनिधि को भारत भेजते समय क्या कहा था? -
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?

DSP sunidhi kumari success story nawada Bihar BPSC Topper
बीपीएससी में तीसरे प्रयास में सफलता
सुनिधि बताती हैं कि सफलता का रास्ता आसान नहीं था. पहले प्रयास में वे साक्षात्कार तक पहुंचीं, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका. दूसरे प्रयास में मुख्य परीक्षा में ही रुक गईं. लगातार दो असफलताओं के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और तीसरे प्रयास में सफलता हासिल कर अपने पिता का सपना साकार कर दिया.
स्वाध्याय और अभ्यास से पाई सफलता
वे बताती हैं कि उन्होंने अपनी अधिकांश तैयारी स्वाध्याय के माध्यम से की. नियमित उत्तर लेखन का अभ्यास उनकी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा. आधार मजबूत करने के लिए उन्होंने एनसीईआरटी की पुस्तकों का अध्ययन किया. इतिहास के लिए स्पेक्ट्रम और भारतीय राजव्यवस्था के लिए एम. लक्ष्मीकांत की पुस्तक को प्रमुख स्रोत बनाया. केवल मॉक इंटरव्यू के लिए उन्होंने कोचिंग का सहारा लिया. उनका मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए निरंतर अभ्यास, अनुशासन, उत्तर लेखन और एकाग्रता सबसे महत्वपूर्ण हैं.

सुनिधि बचपन से थीं मेधावी
शिक्षा के प्रति उनकी लगन बचपन से ही थी. उन्होंने दसवीं तक की पढ़ाई नवादा के मानस भारती स्कूल से की. इंटरमीडिएट राजेंद्र मेमोरियल महिला कॉलेज, नवादा से, स्नातक विमेंस कॉलेज, पटना से तथा स्नातकोत्तर एएन कॉलेज, पटना से पूरा किया. स्नातकोत्तर में उन्होंने मगध विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया. वर्तमान में वे पटना विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रही हैं तथा यूजीसी-नेट भी उत्तीर्ण कर चुकी हैं.
मां ने कहा-उनके लिए बेटी को अकेले पटना भेजना आसान नहीं था
सुनिधि की मां रंजू देवी बेटी की सफलता को याद कर भावुक हो जाती हैं. वह कहती हैं कि बेटी को पढ़ाई के लिए अकेले पटना भेजना आसान फैसला नहीं था, लेकिन उसकी मेहनत और लगन पर पूरा भरोसा था. आज उसकी सफलता ने वर्षों की मेहनत को सार्थक कर दिया.
रंजू देवी बताती हैं कि जब परिवार में दो बेटियां हुईं तो लोगों ने कई तरह की बातें कहीं, लेकिन उनके पति स्वर्गीय सनातन सिंह हमेशा कहते थे, "बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं होता, दोनों समान हैं." आज सुनिधि ने उस विश्वास को सच साबित कर दिया.

सुनिधि की मां और पिता रह चुके हैं पंचायत समिति सदस्य
सुनिधि के पिता स्वर्गीय सनातन सिंह और मां रंजू देवी दोनों पंचायत समिति सदस्य रह चुके हैं. सामाजिक सेवा की भावना उन्हें परिवार से विरासत में मिली. उनके चाचा चितरंजन सिंह भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं. परिवार में उनके बाद सुनिधि प्रशासनिक सेवा में पहुंचने वाली दूसरी सदस्य हैं.
सुनिधि बनीं ग्रामीणों के लिए प्रेरणास्रोत
आज सम्हरीगढ़ गांव में सुनिधि की सफलता की चर्चा हर घर में है. ग्रामीणों का कहना है कि उनकी उपलब्धि पूरे क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा है. सुनिधि का मानना है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता. वे युवाओं को संदेश देती हैं, "रोज पढ़िए, उत्तर लेखन का अभ्यास कीजिए, एकाग्रता बनाए रखिए और असफलता को अंत नहीं, बल्कि अगली सफलता की तैयारी समझिए."
यह भी पढ़ें- Success Story: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के बेटे ने रचा इतिहास, भारतीय सेना में भर्ती होकर लौटा तो पूरा गांव जमकर नाचा
यह भी पढ़ें- शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन बने अफसर, बहू से बोलीं सास-'तुझे सूरज कहूं या चंदा...'
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं