गाजियाबाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसको लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस की काफी आलोचना हो रही है. इस वायरल वीडियो में एक पुलिसवाले वाले को एक व्यक्ति की पीठ को स्कैन करते हुए देखा जा सकता है. यह स्कैन उसी तरह से किया जा रहा है, जैसा किसी सुपरमार्केट में बारकोड को स्कैन किया जाता है. यह वीडियो स्थानीय पुलिस की ओर से लोगों की नागरिकता का पता लगाने के लिए चलाए गए एक अभियान का है. पुलिस की इस कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है.वीडियो वायरल होने के बाद गाजियाबाद पुलिस ने कहा है कि वीडियो में दिख रहे पुलिस अधिकारी को इसकी पुनरावृत्ति न करने को कहा गया है.
UP: गाजियाबाद से एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें SHO अजय शर्मा मोबाइल से नागरिकता बताने का दावा करते दिखे. उन्होंने एक युवक की पीठ पर फोन लगाकर उसे बांग्लादेशी बताया, जबकि युवक खुद को बिहार के अररिया का निवासी बता रहा था. वीडियो सामने आते ही SHO की कार्यशैली पर सवाल उठे.… pic.twitter.com/gDb8mfRAXD
— NDTV India (@ndtvindia) January 1, 2026
इस वायरल वीडियो में एक पुलिस अधिकारी को एक व्यक्ति की पीठ के पास मोबाइल फोन पकड़े हुए दिखाया गया है. यह देखकर सोशल मीडिया यूजर पुलिस का मजाक उड़ा रहे हैं. वो सवाल उठा रहे हैं कि क्या ऐसी कोई तकनीक मौजूद है. कई यूजर्स ने इसे इसे अपमानजनक और अवैज्ञानिक बताया है. कुछ यूजर्स ने इस काम के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस से सफाई मांगी है.
एनडीटीवी ने इस वीडियो में नजर आ रहे व्यक्ति की भाभी रोशनी खातून से बातकर यह जानने की कोशिश की उस दिन हुआ क्या था. उन्होंने बताया कि 23 दिसंबर को स्थानीय थानाध्यक्ष (एसएचओ) के नेतृत्व में कुछ पुलिसकर्मी आए थे. उन्होंने बताया कि ये पुलिसकर्मी एक डिटेंशन बाहन में सवार होकर आए थे.
वेरिफिकेशन के लिए देखे कागजात
रोशनी ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने वेरिफिकेशन के लिए कागजात दिखाने को कहा. इस पर हमने उन्हें आधार कार्ड और कानूनी कागजात दिखाए. उन्होंने बताया कि पुलिसकर्मी कह रहे थे कि वो एक ऐसी मशीन लेकर आए हैं, बांग्लादेशियों की पहचान करेगी. उन्होंने बताया कि पुलिसवालों के पास कोई मशीन नहीं थी. उन्होंने बताया कि पुलिसकर्मियों ने हाथ में मोबाइल फोन लेकर पीठ को छुआ. उन्होंने कहा कि उनमें से किसी ने न तो उन्हें कोई धमकी दी और न ही गाली. रोशनी ने बताया कि उनका परिवार इस इलाके में 1986 से रह रहा है. उन्होंने बताया कि वो लोग मूल रूप से बिहार के अररिया के रहने वाले हैं.
रोशनी की सास रबीला ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने वहां के निवासियों से कहा था कि पीठ की जांच से तुरंत पता चल जाएगा कि कोई व्यक्ति बांग्लादेशी है या नहीं. उन्होंने बताया, "हमारे पास सभी दस्तावेज थे. उन्हें देखने के बाद पुलिस चली गई." उन्होंने बताया कि उनके इलाके में हाल के दिनों में इस तरह के दो सत्यापन अभियान चलाए गए.उन्होंने बताया कि दोनों बार पुलिसकर्मियों ने लोगों से दस्तावेज दिखाने को कहा और जांच पूरी करने के बाद चले गए.
सोशल मीडिया के माध्यम से एक वायरल वीडियो संज्ञान में आया है जिसकी जांच के क्रम में यह पाया गया कि वायरल वीडियो थाना क्षेत्र कौशांबी में स्थानीय पुलिस टीम के द्वारा किए जा रहे एरिया डॉमिनेशन के समय का है। जिसके क्रम में एरिया डॉमिनेशन के समय अस्थाई बस्ती और झुग्गी में रहने वाले… pic.twitter.com/O7MvJo5eQa
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गाजियाबाद पुलिस ने अपनी सफाई में क्या कहा है
इस वायरल वीडियो को लेकर गाजियाबाद के इंदिरापुरम के सहायक पुलिस आयुक्त अभिषेक श्रीवास्तव ने एक वीडियो जारी किया है. पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो की जांच में पता चला कि यह कौशांबी थानाक्षेत्र की ओर से किए गए एरिया कांबिनेशन का है.एरिया कांबिनेशन के समय अस्थायी बस्ती और झुग्गियों में रहने वाले लोगों का सत्यापन किया जाता है. इस दौरान थाना प्रभारी कौशांबी स्थानीय लोगों से वार्ता कर रहे हैं. पुलिस अधिकारी का कहना है कि थाना प्रभारी कौशांबी को सख्त चेतावनी दी गई है कि ऐसी व्यवहार की भविष्य में पुनरावृत्ति ना हो.
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