Ghaziabad Pink Booth Death Case: गाजियाबाद के मधुबन बापूधाम इलाके में पिंक पुलिस बूथ के बाहर 22 वर्षीय युवक की मौत ने पुलिस व्यवस्था और आपातकालीन सहायता प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मृतक राजकुमार कथित रूप से एक किराये के विवाद के बाद गंभीर रूप से घायल हो गया था और काफी देर तक खून बहने के बावजूद उसे समय पर उपचार नहीं मिल सका. प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि युवक मदद की गुहार लगाता रहा, जबकि बूथ में मौजूद महिला पुलिसकर्मी अंदर बंद रहीं. दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि घायल को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया था. घटना का सीसीटीवी वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है.
ऑटो किराये के विवाद से शुरू हुआ घटनाक्रम
घटना रविवार दोपहर करीब 3 बजे मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र में हुई. पुलिस के अनुसार एक ऑटो चालक और यात्री के बीच किराये के भुगतान को लेकर विवाद हो गया. दोनों कथित रूप से शराब के नशे में थे. विवाद बढ़ने पर वे पिंक पुलिस बूथ तक पहुंच गए. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ऑटो में चालक समेत चार से पांच लोग सवार थे और सभी के बीच बहस चल रही थी.

पिंक बूथ के बाहर बढ़ा विवाद
स्थानीय लोगों के मुताबिक पिंक पुलिस बूथ पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें बताया कि यह महिला सहायता केंद्र है और उन्हें पास स्थित थाने जाने की सलाह दी. इसके बाद सभी लोग बूथ के बाहर आ गए, लेकिन विवाद जारी रहा और देखते ही देखते हाथापाई में बदल गया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इसी दौरान राजकुमार कुछ दूरी पर जाकर गिर पड़ा.

Ghaziabad Pink Booth Death Case: FIR कॉपी
लोहे के गेट और शीशे से घायल हुआ युवक
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कुछ देर बाद राजकुमार उठकर पिंक पुलिस बूथ की ओर गया और वहां लगे लोहे के गेट को पीटने लगा. आरोप है कि महिला पुलिसकर्मियों ने बूथ को अंदर से बंद कर लिया. इसके बाद राजकुमार ने जोर से शीशे वाले हिस्से पर हाथ मारा, जिससे कांच टूट गया और उसके हाथ में गहरा घाव हो गया. घाव से तेज़ी से खून बहने लगा और वह बूथ के सामने ही गिर पड़ा.
खून बहता रहा, मदद का इंतजार करता रहा युवक
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक काफी देर तक सड़क पर पड़ा रहा. आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई, कुछ लोग वीडियो बनाते रहे, जबकि कई लोग वहां से गुजर गए. पास के एक दुकानदार ने पुलिस कंट्रोल रूम 112 पर कॉल कर सूचना दी. बताया जा रहा है कि सबसे पहले बाइक पर दो पुलिसकर्मी पहुंचे और घायल को अस्पताल भेजने के लिए गुजर रहे ऑटो रोकने की कोशिश की, लेकिन कोई नहीं रुका. इसके बाद एम्बुलेंस बुलाई गई.
अस्पताल पहुंचने से पहले बिगड़ गई हालत
स्थानीय लोगों का दावा है कि एम्बुलेंस करीब 25 से 30 मिनट बाद पहुंची. तब तक घायल काफी मात्रा में खून खो चुका था. उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई. मृतक की मां का आरोप है कि विवाद केवल 20 रुपये के किराये को लेकर हुआ था और मौके पर मौजूद किसी भी व्यक्ति ने समय रहते मदद नहीं की.
गर्भवती पत्नी और परिवार ने मांगा न्याय
मृतक राजकुमार बिहार के सीवान जिले का रहने वाला था और गाजियाबाद में रहकर मैकेनिक का काम करता था. उसकी उम्र 22 वर्ष थी. परिवार के अनुसार उसकी पत्नी आठ महीने की गर्भवती है. राजकुमार की मां ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और न्याय की मांग की है. वहीं पत्नी का कहना है कि वह 12 जुलाई की सुबह काम पर निकला था और परिवार अब केवल न्याय चाहता है.
दिनांक 12/7/2026 को समय दोपहर में 3:30 बजे, थाना मधुबन बापूधाम अंतर्गत एक ऑटो चालक द्वारा एक ऑटो सवारी को बिठाया गया । दोनों ही नशे की हालत में थे । पैसे के लेनदेन को लेकर दोनों में आपस में वाद-विवाद हुआ, जिसके बाद दोनों ही पिंक बूथ पर पहुँचे और शराब के नशे की हालत में ऑटो सवारी… pic.twitter.com/pAKA1j79dd
— POLICE COMMISSIONERATE GHAZIABAD (@ghaziabadpolice) July 14, 2026
पुलिस का पक्ष
एसीपी कविनगर उपासना पांडेय ने कहा, "मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र में एक ऑटो चालक और यात्री के बीच किराये के भुगतान को लेकर विवाद हुआ. दोनों शराब के नशे में थे. विवाद के बाद वे पिंक बूथ पहुंचे. इसी दौरान यात्री ने हाथ से बूथ के गेट और कांच पर प्रहार किया, जिससे उसका हाथ गंभीर रूप से घायल हो गया. उसे तत्काल अस्पताल भेजा गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई." उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
जांच के घेरे में कई सवाल
घटना के बाद कई सवाल उठ रहे हैं:
- घायल युवक को तत्काल प्राथमिक उपचार क्यों नहीं मिला?
- पिंक बूथ का दरवाजा क्यों नहीं खोला गया?
- एम्बुलेंस पहुंचने में कितना समय लगा?
- घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका क्या थी?
- अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ पाएंगे. फिलहाल युवक की मौत ने स्थानीय स्तर पर पुलिस की संवेदनशीलता और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है.
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