विज्ञापन

जंग सिर्फ सरहद पर ही नहीं, दिमाग और डेटा में भी लड़ी जाएगी...सेना प्रमुख का का रण संवाद में संदेश

दुनिया अघोषित और मल्टी‑डोमेन युद्ध के दौर में प्रवेश कर चुकी है. रण संवाद में सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने कहा कि आधुनिक युद्ध अब सीमाओं तक नहीं, बल्कि साइबर, अंतरिक्ष और मानव सोच तक फैल चुका है.

जंग सिर्फ सरहद पर ही नहीं, दिमाग और डेटा में भी लड़ी जाएगी...सेना प्रमुख का का रण संवाद में संदेश
सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी
  • सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने आधुनिक युद्ध को मल्टी-डोमेन और मल्टी-थिएटर संघर्ष बताया
  • मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस में भूमि, वायु, समुद्र, साइबर, अंतरिक्ष और कॉग्निटिव डोमेनों शामिल
  • ऑपरेशन सिंदूर में तीनों सेनाओं के तालमेल और मल्टी डोमेन के सहयोग से युद्ध में सटीकता और प्रभावशीलता सुनिश्चित

दुनिया अब बारूद के उस ढेर पर नहीं बैठी है, जहां धमाके का इंतजार हो, बल्कि वह एक ऐसे ‘अदृश्य' महायुद्ध की गिरफ्त में है, जिसकी कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है. भारतीय थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने वैश्विक सुरक्षा की जो तस्वीर पेश की है, वह पारंपरिक युद्ध की परिभाषा को पूरी तरह बदलती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि आज का संघर्ष नक्शे पर खींची गई सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साइबर स्पेस से लेकर इंसान की सोच तक फैल चुका है.

Latest and Breaking News on NDTV

रण संवाद में सेना प्रमुख का संबोधन

सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने ‘रण संवाद' (Ran Samwaad) के दौरान आधुनिक युद्ध कौशल और बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर एक विस्तृत और अहम संबोधन दिया. उन्होंने मौजूदा वैश्विक परिदृश्य को “बिखरा हुआ, अघोषित, बहु‑थिएटर और बहु‑डोमेन विश्व युद्ध” बताया और कहा कि आज का संघर्ष पारंपरिक सीमाओं से कहीं आगे निकल चुका है.

“स्थायी संघर्ष” के दौर में दुनिया

जनरल द्विवेदी के अनुसार दुनिया एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां संघर्ष लगातार, बिखरे हुए और कई आयामों में एक साथ चल रहे हैं. उन्होंने कहा कि असली चुनौती अब यह नहीं है कि अलग‑अलग डोमेन जुड़े हैं या नहीं, बल्कि यह है कि इस जटिल तालमेल को युद्धक्षेत्र में किस तरह प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए.

ये भी पढ़ें : भारत के वायुसेना को मिलेगा 1000 किलो का स्वदेशी 'बाहुबली' बम, अमेरिकी MK-84 को देंगे टक्कर

युद्ध का नया स्वरूप, छह डोमेनों का संगम

सेना प्रमुख ने मल्टी‑डोमेन ऑपरेशंस (MDO) को भूमि, वायु, समुद्र, साइबर, अंतरिक्ष और कॉग्निटिव, इन 6 डोमेनों के बीच निरंतर और गतिशील इंटरप्ले के रूप में परिभाषित किया. उन्होंने कहा कि आज युद्धक्षेत्र कोई सीधी सीमा नहीं, बल्कि कई परतों में फैला एक जटिल ‘इकोसिस्टम' है, जहां जमीनी कार्रवाई, साइबर प्रभाव, स्पेस एसेट्स और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध एक साथ चल रहे हैं. उन्होंने चेताया कि जो कमांडर केवल अपने सेक्टर तक सीमित रहता है, वह युद्ध की पूरी तस्वीर नहीं देख पाता.

‘ऑपरेशन सिंदूर', संयुक्त सैन्य शक्ति की मिसाल

जनरल द्विवेदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान को किसी एक डोमेन ने सफल नहीं बनाया, बल्कि प्रत्येक डोमेन ने दूसरे के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ तैयार कीं. उन्होंने बताया कि जमीनी खुफिया जानकारी, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक इनपुट के साथ‑साथ तीनों सेनाओं के तालमेल ने इस ऑपरेशन में सटीकता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की,यही MDO का वास्तविक सार है.

परिवर्तन का दशक और सेना का आधुनिकीकरण

सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना “डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन” के तहत निरंतर बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले अवधारणा बनी, फिर संरचनात्मक बदलाव हुए और अब ज़मीनी स्तर पर इसके नतीजे सामने आ रहे हैं.

‘सेव एंड रेज़' पहल के तहत नई यूनिट

‘सेव एंड रेज़' (Save and Raise) पहल के अंतर्गत कई आधुनिक इकाइयों का गठन किया गया है, जिनमें शामिल हैं—

  1. शक्तिबाण UAS और काउंटर‑UAS रेजिमेंट
  2. दिव्यास्त्र ड्रोन बैटरियाँ
  3. अश्नि, पैदल सेना के लिए ड्रोन प्लाटून
  4. साइबर और सूचना युद्ध के लिए विशेष विंग


ये भी पढ़ें : भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ी, स्टेल्थ फ्रिगेट दुनागिरी समेत तीन जहाज मिला

हाइब्रिड और ग्रे‑ज़ोन युद्ध की चुनौतियां

जनरल द्विवेदी ने स्वीकार किया कि सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न डोमेनों और युद्ध के स्तरों स्ट्रेटेजिक, ऑपरेशनल और टैक्टिकल के बीच प्रभावी तालमेल स्थापित करना है. उन्होंने कहा कि आज के संघर्षों में हाइब्रिड और ‘ग्रे‑ज़ोन' रणनीतियाँ, जहां सैन्य और गैर‑सैन्य साधनों का मिश्रण होता है, पारंपरिक युद्ध से पहले ही असर दिखाने लगती हैं.

जीत का ‘6‑D' और ‘3‑I' फॉर्मूला

सेना प्रमुख ने MDO युद्धक्षेत्र को ‘6‑D'—Dispersion, Democratisation, Diffusion, Diversification, Delegation और Distributed Response के रूप में परिभाषित किया. उन्होंने कहा कि पहले तीन रुझानों से अंतिम तीन अनिवार्यताएं निकलती हैं और खंडित प्रतिक्रियाएं अब कारगर नहीं होंगी.

इसके साथ ही उन्होंने ‘3‑I'—Integration, Informatisation और Intelligentisation—को डोमेन फ्यूजन की बुनियाद बताया. उनके अनुसार तकनीक वह धागा है जो सभी को जोड़ती है, लेकिन यह हमेशा ‘टेक्नोलॉजी‑एनेबल्ड' होनी चाहिए, ‘टेक्नोलॉजी‑ड्रिवन' नहीं. अंतिम निर्णय में इंसान की भूमिका, यानी ‘ह्यूमन‑इन‑द‑लूप', सर्वोपरि रहेगी.

टेक्नो‑कमांडर्स का युग

जनरल द्विवेदी ने बताया कि 2024‑25 को ‘प्रौद्योगिकी अवशोषण वर्ष' घोषित करने के बाद अब 2026‑27 को ‘नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी' का वर्ष घोषित किया गया है. उन्होंने कहा कि भविष्य में बढ़त उसी को मिलेगी जो तकनीक को सिर्फ संचालित नहीं, बल्कि उसे समझकर नियंत्रित भी कर सके। इसी दिशा में कमांडरों को ‘टेक्नो‑कमांडर' बनना होगा.

डोमेन फ्यूजन की ओर भारतीय सेना

सेना प्रमुख ने ‘डोमेन फ्यूजन' का आह्वान किया, जहां तीनों सेनाएं एकीकृत सैन्य शक्ति के रूप में कार्य करें. उनके अनुसार, लक्ष्य ऐसी सैन्य क्षमता विकसित करना है जहां यह पहचानना कठिन हो जाए कि एक डोमेन कहां समाप्त होता है और दूसरा कहां शुरू. स्पष्ट है कि भविष्य के युद्धक्षेत्र में वही ध्वज लहराएगा, जिसके पास न सिर्फ घातक हथियार होंगे, बल्कि उन्हें जोड़ने वाला मजबूत ‘डिजिटल धागा' भी होगा. जनरल द्विवेदी का यह संबोधन केवल एक भाषण नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा तंत्र के लिए एक स्पष्ट चेतावनी और दिशा‑सूचक आह्वान है.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Third World War, General Upendra Dwivedi, Indian Army, Modern Warfare, Multi Domain Operations, Hybrid Warfare, Cyber War, Grey Zone Conflict, Techno Commanders, Domain Fusion, Ran Samwaad, Indian Military Transformation
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com