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पान मसाला खाने वालों के लिए नई खबर, केंद्र सरकार लेने जा रही अहम फैसला

FSSAI ने इस ड्राफ्ट को सार्वजनिक कर दिया है और अगले 30 दिनों के भीतर आम जनता और उद्योग से जुड़े हितधारकों से सुझाव या आपत्तियां मांगी हैं.

पान मसाला खाने वालों के लिए नई खबर, केंद्र सरकार लेने जा रही अहम फैसला
प्रतीकात्मक तस्वीर
AFP

Pan Masala Draft Rule: केंद्र सरकार पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर अब एक बड़ा और कड़ा कदम उठाने जा रही है. अगर आप पान मसाला या गुटखा के शौकीन हैं, तो जल्द ही आपको इसकी पैकेजिंग पूरी तरह बदली हुई नजर आएगी. दरअसल, केंद्र सरकार ने इन उत्पादों की प्लास्टिक पैकेजिंग पर पूरी तरह से नकेल कसने की तैयारी कर ली है. अब छोटे प्लास्टिक के पाउच (सैशे) पर पूरी तरह रोक लग सकती है.

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने इस दिशा में 'खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) संशोधन नियम, 2026' का ड्राफ्ट जारी कर दिया है. इस नए बदलाव का सीधा असर पान मसाला और तंबाकू उद्योग पर पड़ने वाला है, क्योंकि सरकार अब इनके लिए प्लास्टिक के इस्तेमाल को जड़ से खत्म करना चाहती है.

प्लास्टिक और एल्युमिनियम फॉयल पर लगेगा पूर्ण प्रतिबंध

नए ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों को अब किसी भी तरह के प्लास्टिक पैकेट या सैशे में नहीं बेचा जा सकेगा. सरकार का रुख इस मामले में काफी सख्त है. ड्राफ्ट में साफ कहा गया है कि प्लास्टिक, पॉलीथिन या पीवीसी जैसे किसी भी सिंथेटिक मटेरियल का उपयोग पैकेजिंग के लिए वर्जित होगा. इतना ही नहीं, जो उत्पाद अक्सर एल्युमिनियम फॉयल की चमक-धमक वाली पैकिंग में मिलते थे, उन पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव है.

हैरानी की बात यह है कि प्रतिबंध सिर्फ बिक्री तक सीमित नहीं है. ड्राफ्ट के अनुसार, इन उत्पादों की पैकिंग, स्टोरेज (भंडारण) और वितरण में भी किसी भी रूप में प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. सरकार का मानना है कि प्लास्टिक सैशे न केवल पर्यावरण के लिए खतरा हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी खतरनाक साबित हो रहे हैं.

पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होंगे ये प्राकृतिक विकल्प

जब प्लास्टिक पर बैन लगेगा, तो सवाल उठता है कि ये उत्पाद किसमें बिकेंगे? इसके लिए सरकार ने प्राकृतिक और रिसायकल की जा सकने वाली सामग्रियों का विकल्प दिया है. अब पान मसाला कंपनियों को पेपर, पेपर बोर्ड या सेलूलोज़ जैसी प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करना होगा. इसके अलावा, टिन के कंटेनर और कांच की बोतलों या डिब्बों के इस्तेमाल की अनुमति दी जा सकती है.

इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को होने वाले भारी नुकसान को रोकना है. पान मसाला और तंबाकू के छोटे-छोटे प्लास्टिक सैशे अक्सर नालियों और सड़कों पर कचरे का बड़ा अंबार खड़े कर देते हैं, जिन्हें डिस्पोज करना नामुमकिन होता है. प्राकृतिक सामग्री के इस्तेमाल से इस कचरे को कम करने में मदद मिलेगी.

जनता और स्टेकहोल्डर्स से मांगे गए सुझाव

FSSAI ने इस ड्राफ्ट को सार्वजनिक कर दिया है और अगले 30 दिनों के भीतर आम जनता और उद्योग से जुड़े हितधारकों से सुझाव या आपत्तियां मांगी हैं. इन 30 दिनों में मिलने वाली प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करने के बाद ही सरकार इस पर अंतिम फैसला लेगी और इसे कानून के रूप में लागू किया जाएगा.

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