चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, 2025 में चुनाव आयोग की ओर से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू किए जाने के बाद से 18 से 28 साल की उम्र के 2.73 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में जोड़े गए हैं. यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है, जब ऐसी खबरें आई थीं कि वोटर लिस्ट का स्पेशल समरी रिवीजन (एसएसआर) न होने के कारण युवाओं के नए मतदाता के रूप में पंजीकरण पर रोक जैसी स्थिति बन गई थी.
कौन बन सकता है मतदाता
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया है. उनका कहना है कि वोटर लिस्ट को लगातार अपडेट किया जाता है. इसके तहत पात्र नागरिक सालाना वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण का इंतजार किए बिना भी अपना नाम जुड़वा सकते हैं.
2.73 करोड़ का यह आंकड़ा 18 से 28 साल की उम्र के मतदाताओं का है. इसमें पहली बार वोट देने वाले युवा भी शामिल हैं. इनके अलावा ऐसे युवा भी शामिल हैं जो पहले ही वोट देने के योग्य हो चुके थे, लेकिन बाद में उनके नाम वोटर लिस्ट में जोड़े या अपडेट किए गए.
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चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि 1950 के लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 14 में 2021 में किए गए बदलाव और धारा 19 के तहत, जिस व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में नहीं है या जो एक जनवरी, एक अप्रैल, एक जुलाई या एक अक्टूबर को 18 साल की उम्र पूरी करता है, वह बिना किसी नए पुनरीक्षण का इंतजार किए मतदाता के रूप में अपना नाम दर्ज करा सकता है.
क्या है एसएसआर और एसआईआर
आयोग के अधिकारियों के मुताबिक,एसएसआर और एसआईआर, दोनों ही लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 21(3) के तहत किए जाते हैं. इन दोनों को कराना अनिवार्य नहीं है. कानून में यह जरूरी नहीं है कि दोनों प्रक्रियाएं एक साथ कराई जाएं.
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 14(बी) में बदलाव के बाद वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करवाने के लिए एक साल में चार तीरीखें तय की गईं. कोई भी पात्र नागरिक अगर इन चार तारीखों (एक जनवरी, एक अप्रैल, एक जुलाई या एक अक्टूबर)में से किसी तारीख को 18 साल की उम्र पूरी कर चुका है या पूरी करने वाला है, वह फार्म-6 के जरिए पहले से आवेदन कर सकता है. आवेदन पर उस तिमाही में कार्रवाई की जाती है, जिसमें आवेदक 18 साल की जरूरी उम्र पूरी करता है.
चुनाव आयोग का कहना है कि वोटर लिस्ट के अंतिम प्रकाशन के बाद भी उसे लगातार अपडेट किया जाता है. इसलिए पात्र नागरिक किसी अगले पुनरीक्षण का इंतजार किए बिना अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वा सकते हैं. नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए फार्म 6 इस्तेमाल किया जाता है.
चुनाव के दौरान भी बनाए गए वोटर
युवाओं का मतदाता के रूप में पंजीकरण इस दौरान हुए कई विधानसभा चुनावों के साथ-साथ चलता रहा. नवंबर 2025 में बिहार में विधानसभा चुनाव हुए थे. इससे पहले राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी की गई थी. चुनाव के लिए जारी अंतिम वोटर लिस्ट में 7.45 करोड़ से ज्यादा मतदाता थे. इसके बाद 2026 में असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव हुए. इन राज्यों में चुनाव से पहले मतदाता सूचियों को संशोधित किया गया.
चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर-एसएसआर और लगातार वोटर लिस्ट अपडेट करने की प्रक्रिया अलग-अलग हैं. अधिकारियों के मुताबिक, एसआईआर के दौरान 18 से 28 साल की उम्र के 2.73 करोड़ लोगों का वोटर लिस्ट में जुड़ना यह दिखाता है कि युवाओं का पंजीकरण लगातार जारी रहा.
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