- फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित डील को फायदे का सौदा बताया
- उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच साझेदारी अब केवल ग्राहक और विक्रेता तक सीमित नहीं है
- फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अब लड़ाकू विमानों का मिलकर उत्पादन करना चाहता है, जिसमें कुछ गलत नहीं
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत के साथ 114 राफेल लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित डील पर बड़ा बयान दिया है. नई दिल्ली में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लेने आए मैक्रों ने मीडिया से कहा कि ये डील न सिर्फ भारत की सैन्य ताकत को मजबूती देगी बल्कि दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी.
समझ नहीं आता, आलोचना क्योंः मैक्रों
मैक्रों ने राफेल डील को लेकर हो रही आलोचनाओं को खारिज करते हुए मीडिया से कहा कि इससे भारत मजबूत बनेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, सामरिक संबंध भी प्रगाढ़ होंगे. ऐसे में मुझे समझ नहीं आता कि कुछ लोग इसकी आलोचना क्यों कर रहे हैं. उन्होंने भारत में ज्यादा से ज्यादा भारतीय कंपोनेंट्स के इस्तेमाल और क्रिटिकल डिवाइस के निर्माण के भी संकेत दिए.
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मिलकर बनाएंगे लड़ाकू विमान
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच यह साझेदारी अब केवल ग्राहक और विक्रेता तक सीमित नहीं है. भारत अब लड़ाकू विमानों का मिलकर उत्पादन करना चाहता है, जिसमें कुछ गलत नहीं है. भविष्य की चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास का रुख बता रहा है कि आने वाले समय और 2040 व 2050 तक भारत को और भी एडवांस लड़ाकू विमानों की जरूरत होगी, खासतौर से ऐसे समय में जब क्षेत्रीय शक्तियां अपनी क्षमताएं बढ़ा रही हैं.
ये भी देखें- आखिर राफेल ही क्यों बना भारतीय वायु सेना का फेवरेट? जान लीजिए पीछे की पूरी कहानी
114 राफेल खरीदना चाहता है भारत
गौरतलब है कि भारतीय रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिसमें वायुसेना के लिए 114 राफेल विमान शामिल हैं. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है. अब यह प्रस्ताव सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी के पास अंतिम स्वीकृति के लिए जाएगा.
भारत में बनेंगे अधिकतर राफेल
इस डील की खास बात ये है कि अधिकतर विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा, जिससे 'मेक इन इंडिया' अभियान को मजबूती मिलेगी. रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के मुताबिक, ये पहली बार होगा जब राफेल विमानों का निर्माण फ्रांस से बाहर किसी देश में होगा. विमानों में 40-50 फीसदी लोकल सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा.
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