- पूर्व केंद्रीय मंत्री निनोंग एरिंग ने सियांग बांध परियोजना पर सभी पक्षों से संवाद का आग्रह किया है
- उन्होंने परियोजना की प्री-फीजिबिलिटी रिपोर्ट बनवाने की जरूरत पर जोर दिया ताकि स्थानीय प्रभावों का आकलन हो सके
- एरिंग ने शांतिपूर्ण विरोध का समर्थन किया लेकिन हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने को अस्वीकार किया
ईटानगर: प्रस्तावित सियांग बांध परियोजना को लेकर अरुणाचल प्रदेश में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और पासीघाट पश्चिम के विधायक निनोंग एरिंग ने सभी पक्षों से संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है. उन्होंने कहा कि परियोजना की प्री-फीजिबिलिटी रिपोर्ट जरूरी है, ताकि यह समझा जा सके कि बांध का स्थानीय आबादी और क्षेत्र पर क्या असर पड़ेगा.
चिपको आंदोलन जैसी स्थिति ना बने
एरिंग ने कहा कि लोगों को यह जानने का अधिकार है कि बांध बनने पर कौन-कौन से इलाके प्रभावित हो सकते हैं, कितनी भूमि जलमग्न हो सकती है और परियोजना का समग्र प्रभाव क्या होगा. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए जैसी कभी चिपको आंदोलन या टेहरी बांध आंदोलन के दौरान देखने को मिली थी.
शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार, लेकिन हिंसा नहीं
एरिंग ने माना कि लोगों को विरोध-प्रदर्शन करने, हड़ताल करने और धरना देने का पूरा अधिकार है, लेकिन हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना स्वीकार्य नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन के नाम पर सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, लूटपाट या तोड़फोड़ जैसी घटनाओं को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए.
बाहरी युवाओं की भूमिका पर जताई चिंता
विधायक ने बताया कि क्षेत्र में प्रशासन और पुलिस व्यवस्था को मजबूत किया गया है तथा केंद्रीय सुरक्षा बल भी तैनात किए गए हैं. उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को परेशान करना नहीं है. एरिंग ने यह भी दावा किया कि विरोध-प्रदर्शनों में शामिल कुछ युवा स्थानीय क्षेत्र के नहीं हैं. उनके अनुसार, इनमें सियांग और अपर सियांग जिलों से आए लोग भी शामिल हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उन्हें आंदोलन में शामिल होने के लिए किसने प्रेरित या गुमराह किया.
किसान संगठनों से बातचीत की अपील
निनोंग एरिंग, जो अरुणाचल प्रदेश सरकार में जलविद्युत विकास मंत्री के सलाहकार भी हैं, ने सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम समेत अन्य संगठनों से वार्ता के लिए आगे आने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को एक साथ बैठकर समाधान तलाशना होगा. मतभेद और तर्क-वितर्क लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन आगे बढ़ने का रास्ता बातचीत और सहमति से ही निकलेगा.
चीन के साथ जल संधि की वकालत
एरिंग ने केंद्र सरकार से चीन के साथ जल समझौते (वॉटर ट्रीटी) पर बातचीत शुरू करने की भी मांग की. उनका कहना है कि चीन द्वारा ऊपरी हिस्से में बनाए जा रहे बांधों से जुड़े मुद्दों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर दोनों देशों के बीच संवाद जरूरी है.
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