- फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के घर के बाहर हुई फायरिंग की घटना में शूटर अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है.
- आरोपी स्वप्नील सकट, सिद्धार्थ, समर्थ पोमाजी और आदित्य गायकवाड़ को गिरफ्तार किया गया है जो बचपन के दोस्त हैं.
- आरोपियों का सोशल मीडिया के जरिए लॉरेंस बिश्नोई गैंग और फरार आरोपी शुभम लोणकर से संपर्क पाया गया है.
मुंबई के जुहू इलाके में फिल्म निर्माता Rohit Shetty के घर के बाहर देर रात हुई फायरिंग के मामले में हमलावर अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. घटना के तीन दिन बाद भी शूटर का कोई सुराग नहीं मिला है. आरोपी को पकड़ने के लिए Mumbai Crime Branch ने देशभर में 12 टीमें तैनात कर दी हैं और अलग-अलग संभावित ठिकानों पर छापेमारी जारी है.
चार आरोपी गिरफ्तार, बचपन की दोस्ती आई सामने
इस मामले में अब तक स्वप्नील बंदू सकट (23), सिद्धार्थ दीपक येनपुरे (19), समर्थ शिवशरण पोमाजी (19) और आदित्य ज्ञानेश्वर गायकवाड़ (19) को गिरफ्तार किया जा चुका है. पूछताछ में पुलिस को पता चला कि ये चारों बचपन से दोस्त हैं और एक-दूसरे के साथ लगातार संपर्क में थे.
जांच में यह भी सामने आया कि इनका संपर्क पुणे के उन आरोपियों से रहा है, जिन्हें पहले बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में पकड़ा गया था. पुलिस के मुताबिक, ये लोग आपस में परिचित थे और नेटवर्क के जरिए जुड़े हुए थे.
सोशल मीडिया से बना गैंग कनेक्शन
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार सभी आरोपी मिडिल-क्लास परिवारों से हैं. शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि इनका संपर्क सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम के जरिए Lawrence Bishnoi gang और फरार आरोपी Shubham Lonkar से जुड़े लोगों से हुआ. पुलिस का मानना है कि पैसों के लालच में इस पूरी साजिश को अंजाम दिया गया. शुभम लोणकर का भाई प्रविण लोणकर पहले पुणे के कर्वे नगर इलाके में डेयरी का काम करता था, जो अब बंद हो चुका है.
पहले से रची गई थी पूरी साजिश
क्राइम ब्रांच की जांच में साफ हुआ है कि यह हमला अचानक नहीं था. पुलिस का दावा है कि शेट्टी के घर और आसपास के इलाके की पहले ही बारीकी से रेकी की गई थी. एंट्री-एग्जिट रास्तों, नजदीकी सड़कों और पुलिस की गश्त तक पर नजर रखी गई थी. खास बात यह है कि रेकी उसी स्कूटर से की गई, जिसका इस्तेमाल बाद में फायरिंग के वक्त किया गया.
आरोपी का पुराना रिकॉर्ड
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी स्वप्नील सकट के खिलाफ पहले से वारजे पुलिस स्टेशन में मारपीट और अवैध हथियार रखने के मामले दर्ज हैं.
फायरिंग के बाद कैसे भागा शूटर
जांच एजेंसियों को शक है कि फायरिंग के तुरंत बाद शूटर ट्रेन से नहीं भागा, क्योंकि उस समय लोकल ट्रेन सेवाएं सीमित थीं. आशंका है कि वह पहले किसी निजी वाहन से निकला. सीनियर पुलिस अधिकारी रात करीब 2 से 2.15 बजे के बीच मौके पर पहुंचे थे. एहतियातन एलटीटी और बांद्रा टर्मिनस पर भी निगरानी रखी गई थी.
वारदात में इस्तेमाल स्कूटर — होंडा डियो (MH-12-FN-2205) — पुणे से करीब 30 हजार रुपये में खरीदा गया था. पुलिस के मुताबिक, यह रकम शुभम लोणकर ने उपलब्ध कराई थी. स्कूटर पहले आनंद मारोटे के नाम पर रजिस्टर्ड था, जिसे घटना से करीब 12 दिन पहले आदित्य गायकवाड़ ने खरीदा था.
पुणे से मुंबई तक स्कूटर की मूवमेंट
जांच में सामने आया है कि समर्थ पोमाजी के कहने पर सिद्धार्थ येनपुरे और स्वप्नील सकट स्कूटर को पुणे से लोनावला तक सड़क मार्ग से लेकर आए. बाद में इसे करीब 10 दिन पहले मुंबई लाकर शूटर को सौंपा गया. इस काम के बदले आरोपियों को अतिरिक्त पैसे भी दिए गए.
Signal ऐप से चल रही थी प्लानिंग
पुलिस का कहना है कि पूरी साजिश Signal ऐप के जरिए कोऑर्डिनेट की जा रही थी. समर्थ पोमाजी लगातार शुभम लोणकर के संपर्क में था और स्कूटर की व्यवस्था से लेकर शूटर की मदद तक में उसकी सक्रिय भूमिका रही. हालांकि, स्कूटर लाने वाले आरोपियों को यह पता था कि वे किसी साजिश का हिस्सा हैं, लेकिन टारगेट कौन है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी. फिलहाल मुंबई क्राइम ब्रांच साजिश की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी है और फरार शूटर की तलाश तेज कर दी गई है.
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