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This Article is From Aug 08, 2024

"मारे जाने का भय": बांग्लादेश के 600 नागरिकों ने बंगाल में घुसने की कोशिश की, BSF ने रोका

शेख हसीना के सोमवार को बांग्लादेश से बाहर चले जाने के बाद से सीमा सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर है.

"मारे जाने का भय": बांग्लादेश के 600 नागरिकों ने बंगाल में घुसने की कोशिश की, BSF ने रोका
बांग्लादेश के नागरिकों के एक समूह ने बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में सीमा से प्रवेश करने की कोशिश की.
कोलकाता:

बांग्लादेश (Bangladesh) में राजनीतिक उथल-पुथल और हिंसा जारी है. इस बीच बांग्लादेश के करीब 600 लोगों के एक समूह ने पश्चिम बंगाल में बार्डर के जरिए भारत में प्रवेश करने की कोशिश की जिन्हें सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने रोक दिया. सोमवार को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के अपदस्थ होने और देश छोड़कर भाग जाने के बाद से बीएसएफ हाई अलर्ट पर है. 

बांग्लादेशी नागिरकों के समूह ने बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के सत्ता में आने की पूर्व संध्या पर बुधवार को भारत में प्रवेश करने की कोशिश की,. उन्होंने बीएसएफ कर्मियों से भारतीय सीमा में प्रवेश करने की इजाजत देने की गुहार लगाई. उन्होंने दावा किया कि उन्हें जान का खतरा है. 

अधिकारियों ने कहा कि इस समूह ने पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले के दक्षिण बेरुबारी गांव में स्थित भारत-बांग्लादेश सीमा को पार करने की कोशिश की.

एक अधिकारी ने कहा, "उन्होंने हमसे अपील की और भारत में प्रवेश करने की अनुमति मांगी. उन्होंने कहा कि वे हमले से डरते हैं और उन्हें अपनी जान का भी डर है. उन्हें समझाया गया कि उन्हें इस तरह से प्रवेश करने देना संभव नहीं है." 

समूह के कुछ लोग तितर-बितर हो गए, लेकिन कई लोग बुधवार की शाम को भी सीमा पर मौजूद थे. उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें अंततः सीमा पार करने की इजाजत दी जाएगी. 

एक स्थानीय निवासी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि कंटीले तार के पार एकत्रित हुए लोग अंदर जाने की इजाजत देने की विनती कर रहे थे. उन्होंने कहा कि, "उन्होंने अपने भयानक अनुभव बताए, लेकिन हम असहाय हैं."

चुनाव से पहले ही समस्याओं से घिरने लगा था बांग्लादेश

बांग्लादेश में 7 जनवरी को हुए चुनावों में शेख हसीना की अवामी लीग ने भारी जीत हासिल की थी. हालांकि इस चुनाव की प्रक्रिया को व्यापक रूप से स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं माना गया. बांग्लादेश इस चुनाव से पहले से ही समस्याओं से घिरता जा रहा था. 

जून में बांग्लादेश के हाईकोर्ट ने देश के 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के परिवारों के सदस्यों को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत आरक्षण बहाल कर दिया. इसके बाद छात्रों के विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए.  बाद में देश के सुप्रीम कोर्ट ने कोटा कम कर दिया, लेकिन शेख हसीना ने स्थिति को संभालने की कोशिश की पर साथ ही प्रदर्शनकारियों पर कुछ टिप्पणियां कीं जिससे छात्रों में नाराजगी फैल गई.

रविवार को विरोध प्रदर्शन और हिंसा चरम पर रही

शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों ने उग्र प्रदर्शन किए. रविवार को देश भर में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों में 100 से अधिक लोग मारे गए तथा दर्जनों लोग घायल हो गए.

सोमवार को लाखों छात्र सड़कों पर उतर आए और प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास गणभवन की ओर बढ़े. इन हालात में शेख हसीना को इस्तीफा देकर भागना पड़ा. बांग्लादेश के सेना प्रमुख वकर-उज-जमान ने घोषणा की है कि नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस गुरुवार को अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ लेंगे.

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