- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता दत्तात्रेय होसबले ने पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे खुले रखने की बात कही थी
- फारूक अब्दुल्ला ने होसबले के बयान का स्वागत करते हुए बातचीत की आवश्यकता पर बल दिया
- फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि युद्ध समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता और बातचीत का यह सही समय है
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) नेता दत्तात्रेय होसबले ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे खुले रखना चाहिए. इस पर अब जम्मू-कस्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला का बयान आया है. उन्होंने होसबले के बयान का स्वागत करते हुए बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि जब उन्होंने पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत की थी तो उन्हें 'आतंकवादी और देश विरोधी' करार दिया गया था.
केंद्र सरकार से RSS नेता दत्तात्रेय होसबोले और पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की सलाह पर ध्यान देने का आग्रह करते हुए, अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने का यह सही समय है, क्योंकि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं कर सकते.
बातचीत का यही सही समय हैः अब्दुल्ला
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'जब फारूक अब्दुल्ला ने बातचीत की मांग की थी, तो मुझे आतंकवादी और भारत का दुश्मन करार दिया गया था. अल्लाह का शुक्र है कि आज मैंने किसी भी बीजेपी नेता को इसके खिलाफ बोलते हुए नहीं सुना.'
अब्दुल्ला ने कहा, 'यह खुशी का पल है कि RSS नेता और पूर्व सेना प्रमुख ने पाकिस्तान के साथ बातचीत का आह्वान किया है. भारत सरकार के लिए इस सलाह पर विचार करने का यह सही समय है. यह सबसे अच्छा अवसर है, और मेरा मानना है कि केवल बातचीत से ही मुद्दों का समाधान हो सकता है, युद्ध से नहीं.'
ईरान और यूक्रेन के युद्धों का जिक्र करते हुए, अब्दुल्ला ने कहा कि ये युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं कर सके और इनसे केवल मौत और तबाही ही हुई.
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महबूबा मुफ्ती ने भी किया स्वागत
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने भी इस पहल का स्वागत किया और दावा किया कि RSS नेता ने जो बयान दिया है, वही उनकी पार्टी का भी रुख है.
उन्होंने कहा, 'यह पीडीपी के इस रुख की पुष्टि करता है कि अगर हमें जम्मू और कश्मीर में शांति लानी है, तो बातचीत का रास्ता खुला रहना चाहिए.'
कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के नेता सज्जाद कारगिली ने भी कहा कि 'कारगिल के सीमावर्ती क्षेत्र के निवासियों के तौर पर, हम उन पहलों को बहुत महत्व देते हैं जो हमारे पड़ोसियों के साथ बेहतर संबंध बनाने में मदद करती हैं.'
उन्होंने कहा कि लद्दाख और बाल्टिस्तान में हजारों ऐसे परिवार हैं जो बंट गए हैं और सात दशकों से भी ज्यादा समय से अपने प्रियजनों से फिर से मिलने का इंतजार कर रहे हैं.
क्या कहा था होसबले ने?
न्यूज एजेंसी PTI को दिए इंटरव्यू में RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने कहा था कि हमें पाकिस्तान के साथ बातचीत का दरवाजा हमेशा खुला रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि राष्ट्र की रक्षा और सुरक्षा जरूरी है लेकिन साथ ही हमें बातचीत के दरवाजे बंद नहीं रखने चाहिए.
इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि भारत को पाकिस्तान के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए? इस पर जवाब देते हुए दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि भारत ने हमेशा बातचीत का रास्ता अपनाने की कोशिश की है. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र करते हुए कहा कि अटल जी बस से लाहौर गए थे और शांति की पहल की थी. उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान को न्योता दिया था और बाद में एक पाकिस्तानी नेता की शादी में भी शामिल हुए थे.
VIDEO | When asked how India should deal with Pakistan, RSS General Secretary Dattatreya Hosabale, in an exclusive interview with PTI, says, "...If Pakistan is like a pinprick trying to create incidents like Pulwama, etc., we have to answer appropriately according to the… pic.twitter.com/AxpH1oBWuw
— Press Trust of India (@PTI_News) May 12, 2026
उन्होंने कहा कि इन सब कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान अगर सुई चुभाने जैसी हरकतें करता है और पुलवामा जैसे हमलों को बढ़ावा देता है, तो भारत को हालात के हिसाब से सख्त जवाब देना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि किसी भी देश की सुरक्षा और स्वाभिमान सबसे ऊपर होता है और सरकार को उसी हिसाब से कदम उठाने चाहिए. हालांकि होसबले ने यह भी साफ किया कि बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं होने चाहिए. उनके मुताबिक दोनों देशों के बीच संवाद का रास्ता हमेशा खुला रहना चाहिए.
पूर्व सेना प्रमुख, जनरल (रिटायर्ड) मनोज नरवणे ने इस बयान का समर्थन किया था. उन्होंने कहा था कि दोनों तरफ से दोस्ती भारत और पाकिस्तान के बीच बेहतर द्विपक्षीय संबंधों का आधार बन सकती है.
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