आरएसएस के शीर्ष पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबले ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोई हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश नहीं कर रहा, क्योंकि भारत हमेशा से ही एक हिंदू राष्ट्र रहा है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि गैर‑हिंदू भी हिंदू राष्ट्र से अलग नहीं हैं, क्योंकि सभी की वंशावली और डीएनए एक ही है. पीटीआई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में आरएसएस महासचिव ने कहा, “यहां ब्रिटिश राज था, लेकिन तब भी यह हिंदू राष्ट्र ही था. यह कभी ब्रिटिश राष्ट्र नहीं रहा.”
उन्होंने कहा कि देश में कई धार्मिक समूह हैं, जिन्हें अक्सर अल्पसंख्यक कहा जाता है और उनमें से कोई भी दोयम दर्जे का नागरिक नहीं है. आरएसएस के भीतर भी, इन धार्मिक समूहों से कई लोग हैं जो संघ स्वयंसेवक हैं. वे हमारे लिए दिखावटी वस्तु नहीं हैं.
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उनसे पूछा गया कि जब आरएसएस हिंदुत्व या हिंदू राष्ट्र की बात करता है, तो वे अल्पसंख्यकों को भारत में उनकी सुरक्षा का आश्वासन कैसे देंगे. होसाबले ने कहा कि आरएसएस की स्थापना के सौ साल बाद से ये सवाल अनगिनत बार पूछे गए हैं. उन्होंने कहा, "जब लोग कहते हैं कि डर है, तो मैं पूछता हूं कि क्या हुआ है? क्या मुसलमानों की संख्या कम हुई है?"
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शीर्ष पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि अलग-अलग धर्मों के व्यक्तियों के बीच होने वाले ‘सच्चे प्रेम' पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता, लेकिन हिंदू लड़कियों को निशाना बनाकर की जाने वाली कोई भी सुनियोजित साजिश निश्चित रूप से चिंताजनक है. होसबाले ने ‘पीटीआई वीडियो' के साथ विशेष साक्षात्कार में कहा कि स्वयंसेवकों के बीच ऐसे कई मामले हैं जिन्होंने ‘‘सच्चे प्रेम'' के लिए जाति, धर्म और यहां तक कि राष्ट्रीयता की सीमाओं को पार करते हुए विवाह किया और संघ ने इसे हमेशा स्वाभाविक मानते हुए स्वीकार किया है.
आरएसएस के सरकार्यवाह (महासचिव) ने एक दुर्लभ और बेबाक साक्षात्कार में कहा, “हमने उन शादियों का स्वागत किया, उनमें जश्न मनाया और उनमें शामिल हुए. उन्होंने कहा, “अगर यह सिर्फ सच्चा प्यार है, तो कोई सवाल ही नहीं. लेकिन अगर यह जिहाद है, तो सवाल उठता है.”
जब उनसे पूछा गया कि वह ‘लव जिहाद' को कैसे परिभाषित करते हैं, तो होसबाले ने कहा, ‘‘दरअसल किसी ने भी इसे परिभाषित नहीं किया है. लव जिहाद शब्द का प्रयोग सबसे पहले किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने किया था. इसलिए इसमें हमारा कोई योगदान नहीं है.'
हिंदू दक्षिणपंथी अक्सर मुस्लिम पुरुष और हिंदू महिला के बीच के संबंध के लिए इस शब्द का इस्तेमाल करते है. उन्होंने कहा, ‘‘बात यह है कि जब दो व्यक्ति प्रेम में होते हैं, तो धर्म, राष्ट्रीयता आदि का कोई महत्व नहीं होता. इस प्रकार वह प्रेम सच्चा होता है.'' उन्होंने कहा कि, लेकिन जब यह एक एजेंडा बन जाता है और हिंदू लड़कियों को अगवा करने की सुनियोजित साजिश रची जाती है, तो इससे सवाल उठते हैं और टकराव पैदा होता है.
उन्होंने कहा, “फिर डीएनए वाली बात लागू नहीं होती, क्योंकि अगर कोई समान डीएनए होने के बावजूद किसी गांव से किसी लड़की को जबरन ले जा रहा है—मुसलमानों की बात छोड़ भी दें—तो यह प्रेम नहीं है.” होसबाले ने यह टिप्पणी संघ प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान के संदर्भ में की, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत के हिंदुओं और मुसलमानों का डीएनए समान है.
आरएसएस नेता ने इस बात पर जोर दिया कि वह केवल हिंदू लड़कियों के बारे में बात नहीं कर रहे हैं और अगर किसी अन्य समुदाय की लड़की का अपहरण भी होता है तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा, ‘‘आप यह नहीं कह सकते कि ‘चूंकि हम एक ही डीएनए से संबंधित हैं, इसलिए यह ठीक है. यह ठीक नहीं है. यही कारण है कि यह सामाजिक रूप से स्वीकार्य होना चाहिए. किसी समाज में प्रेम वर्जित नहीं है.''
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका मतलब यह है कि संघ अलग-अलग धर्मों या समुदायों के व्यक्तियों के बीच प्रेम विवाह के खिलाफ नहीं है, तो उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों के कई परिवार ऐसे हैं जहां लोगों ने अपनी जाति, समुदाय या धर्म से बाहर शादी की है.
उन्होंने कहा, ‘‘हम इसका प्रचार नहीं करते क्योंकि हम इसे स्वाभाविक मानते हैं.'' इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिसे ‘लव जिहाद' कहा जा रहा है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसे मामले बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं और हर महीने अदालतों में इनकी सुनवाई हो रही है.
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