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तलाक मामलों में फर्जी मुकदमेबाजी: सुप्रीम कोर्ट ने पति पर दर्ज 10 मुकदमे किए खारिज, वकीलों को दी नसीहत

वैवाहिक विवाद और तलाक से जुड़े मामलों में कई बार खूब झूठे केस भी दर्ज करवाए जाते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में बड़ा फैसला लेते हुए पति और उसके परिवार पर दर्ज 10 आपराधिक मुकदमों को रद्द किया. साथ ही वकीलों को नसीहत दी कि अपने मुवक्किलों को फर्जी केस करने से रोके.

तलाक मामलों में फर्जी मुकदमेबाजी: सुप्रीम कोर्ट ने पति पर दर्ज 10 मुकदमे किए खारिज, वकीलों को दी नसीहत
वैवाहिक विवाद के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी नसीहत दी है.
  • तलाक मामलों में दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, मारपीट जैसे केस जोड़ दिए जाते है, ताकि केस और मजबूत हो सके.
  • सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे ही केस में पति और उसके परिवार पर दर्ज 10 आपराधिक मुकदमों को रद्द किया.
  • साथ ही अदालत ने वकीलों को नसीहत दी कि वो अपने क्लाइंट को फर्जी केस दर्ज करने से रोके न कि उन्हें प्रेरित करें.
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नई दिल्ली:

वैवाहिक विवाद और तलाक से जुड़ों मामलों में फर्जी आपराधिक मुकदमे भी खूब दायर किए जाते हैं. दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, मारपीट जैसे मामले जोड़ दिए जाते है, ताकि केस और मजबूत हो सके. लेकिन कई बार यह बात सामने आ चुकी है कि इन फर्जी आपराधिक आरोपों को हकीकत से कोई वास्ता नहीं होता. कई बार केस दायर करने वालों को वकील ही ऐसे आपराधिक मुकदमों से जुड़े आरोप दायर करने के लिए प्रेरित करते नजर आते हैं. इन फर्जी आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को एक बड़ी नसीहत दी है. 

सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को दी नसीहत

सु्प्रीम कोर्ट ने वकीलों को कहा, 'वैवाहिक विवादों के क्षेत्र में निराधार और झूठे आरोपों पर आधारित उत्पीड़क मुकदमों को अदालतों और बार के सदस्यों द्वारा हतोत्साहित किया जाना चाहिए. वकीलों का कर्तव्य है कि वे अपने मुवक्किलों को अपने जीवनसाथी के खिलाफ फालतू आपराधिक कार्यवाही शुरू करने से रोकें, न कि उन्हें इसके लिए प्रेरित करें.'

पति और उसके परिवार पर दर्ज 10 आपराधिक मामले रद्द

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और उज्जल भुयान की पीठ ने ये टिप्पणियां उस दौरान कीं जब उसने पति और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दर्ज 10 से अधिक आपराधिक मामलों को रद्द कर दिया. इन मामलों में पॉक्सो अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत बलात्कार के आरोप भी शामिल थे. 

'छोटी-छोटी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर आपराधिक शिकायतों में न बदला जाए'

कोर्ट ने अपने पूर्व निर्णय Achin Gupta बनाम हरियाणा राज्य, 2024 343 का हवाला देते हुए कहा: “…बार के सदस्यों की समाज के प्रति बड़ी जिम्मेदारी है कि परिवारिक जीवन की सामाजिक संरचना को नुकसान न पहुंचे. उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि छोटी-छोटी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर आपराधिक शिकायतों में न बदला जाए. 

'एक शिकायत के चलते कई मुकदमे न बनें' 

अदालत ने कहा कि अधिकांश शिकायतें या तो उनके सुझाव पर या उनकी सहमति से दर्ज होती हैं. इस प्रतिष्ठित पेशे से जुड़े वकीलों को अपनी परंपराओं का पालन करते हुए हर 498A शिकायत को एक मानवीय समस्या के रूप में समझना चाहिए और पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण समाधान के प्रयास करने चाहिए. उन्हें अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए सामाजिक ताने-बाने, शांति और सौहार्द बनाए रखने में योगदान देना चाहिए. साथ ही, एक शिकायत के चलते कई मुकदमे न बनें, यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए.”

2008 में हुई थी शादी, दो बच्चे, 2011 से अलग रह रही पत्नी

यह विवाद पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे वैवाहिक संघर्ष से जुड़ा था. दोनों की शादी 2008 में हुई थी और उनके दो बच्चे हैं. वर्ष 2011 में पत्नी वैवाहिक घर छोड़कर चली गई, जबकि बच्चे पति के परिवार के साथ ही रहे. इसके बाद के वर्षों में दोनों पक्षों के बीच 10 से अधिक आपराधिक और दीवानी मामले दर्ज हुए, जिनमें धारा 498A आईपीसी, घरेलू हिंसा अधिनियम, हत्या के प्रयास के आरोप और तलाक की कार्यवाही शामिल थीं.

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