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"UPSC से सीखो, वहां पेपर लीक नहीं होता": NTA को NEET पर सुप्रीम कोर्ट से क्यों लगी कड़ी फटकार

पेपर लीक के बाद NEET-UG मेडिकल प्रवेश परीक्षा रद्द किए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को जमकर फटकार लगाई. साथ ही कहा कि यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) से सीखने की जरूरत है.

"UPSC से सीखो, वहां पेपर लीक नहीं होता": NTA को NEET पर सुप्रीम कोर्ट से क्यों लगी कड़ी फटकार
"अगर ऐसा हो रहा है, तो यह बहुत तकलीफदेह है": पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने शुक्रवार को NEET-UG परीक्षा के आयोजन में ढांचागत सुधारों की मांग वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई की. इस दौरान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अगले साल से नीट-यूजी परीक्षा पेन और पेपर के बजाय सीबीटी (कंप्यूटर आधारित परीक्षा) के जरिये आयोजित की जाएगी.  केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि NEET-UG 2026 विवाद के बाद पैदा हुई स्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद नजर रख रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बार-बार होने वाली गलतियों को रोकने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के भीतर लोगों की जवाबदेही तय करना जरूरी है.

"केंद्र सरकार छात्रों के हितों को लेकर बहुत चिंतित"

केंद्र सरकार की ओर से पेश होते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को बहुत गंभीरता से ले रही है, क्योंकि इसका सीधा असर देश के युवाओं पर पड़ता है. SG मेहता ने कहा, "माननीय प्रधानमंत्री खुद इस पर नज़र रख रहे हैं." केंद्र सरकार छात्रों के हितों की रक्षा को लेकर बहुत चिंतित है.

सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा से जुड़े बार-बार होने वाले विवादों पर चिंता जताते हुए कहा कि यह समस्या तब तक बनी रहेगी, जब तक परीक्षा प्रक्रिया के अलग-अलग पहलुओं को संभालने वाले लोगों की ज़िम्मेदारी तय नहीं की जाती. जस्टिस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, "जब तक असल जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक यह असली समस्या खत्म नहीं होगी. सिर्फ यह कहने से काम नहीं चलेगा कि 'कोई न कोई' इसके लिए जिम्मेदार होगा; यह तभी असरदार होगा, जब हमें पता हो कि किस व्यक्ति पर इसकी जिम्मेदारी है. जब तक आप जिम्मेदार लोगों की पहचान नहीं करेंगे, तब तक यह एक अस्पष्ट ज़िम्मेदारी बनी रहेगी."

"हम अपने छात्रों को निराश नहीं कर सकते"

कोर्ट ने कहा, "अगर ऐसा हो रहा है, तो यह बहुत तकलीफदेह है. हम अपने छात्रों को निराश नहीं कर सकते. यह सिर्फ छात्र की बात नहीं है, बल्कि उसके परिवार की भी बात है. इसमें बहुत सारी भावनाएं, प्यार, समय और सालों की पढ़ाई जुड़ी होती है."

"UPSC से सीखने की ज़रूरत"

NTA के भीतर संस्थागत सुधारों की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश की परीक्षा कराने वाली संस्थाओं को तदर्थ (ad hoc) तरीके से काम नहीं करना चाहिए. असल में, किसी व्यक्ति में नहीं, बल्कि संस्था में ही क्षमता होनी चाहिए. यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) से तुलना करते हुए, जस्टिस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि NTA को उन संस्थानों से सीखना चाहिए जिन्होंने बिना किसी विवाद के बड़े पैमाने पर परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित की हैं. UPSC कभी भी ऐसी स्थिति में नहीं रहा है, आपको सीखने की ज़रूरत है."

जस्टिस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच ने निर्देश दिया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बजाय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय एक विस्तृत हलफ़नामा दायर करे, जिसमें NTA की संगठनात्मक क्षमता और मानव संसाधनों को मज़बूत करने के लिए ज़रूरी उपायों का ब्योरा दिया गया हो.

सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में मामले की अगली सुनवाई तय की है.

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