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फिल्मी है ये लव स्टोरी! प्यार हुआ, जेल गए, फिर सुप्रीम कोर्ट ने खुद कराई दो प्रेमियों की 'हैप्पी वेडिंग'

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उनके वैवाहिक संबंधों की स्थिति की जांच की. सुनवाई के दौरान महिला ने भविष्य की सुरक्षा के लिए 10 लाख रुपये की मांग की, जिसे युवक ने स्वीकार कर चुका दिया.

फिल्मी है ये लव स्टोरी! प्यार हुआ, जेल गए, फिर सुप्रीम कोर्ट ने खुद कराई दो प्रेमियों की 'हैप्पी वेडिंग'
सुप्रीम कोर्ट
  • एक युवक और 12वीं कक्षा की लड़की के प्रेम संबंध विवाद में बदलने पर पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था.
  • अदालत ने युवक को दोषी मानते हुए दस वर्ष की सजा सुनाई थी, जबकि लड़की की शादी दूसरी शादी से हुई थी.
  • जेल से बाहर आने के बाद युवक और लड़की ने सुलह कर बालिग होने के बाद शादी कर एक साथ रहने लगे थे.

यह मामला किसी फिल्मी कहानी जैसा जरूर लगता है, लेकिन यह हकीकत है. एक युवक और 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़की के बीच प्रेम संबंध था, जो समय के साथ विवाद में बदल गया. रिश्तों में खटास आने के बाद लड़की ने युवक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसके चलते उसके खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत केस दर्ज हुआ. अदालत में सुनवाई के बाद युवक को दोषी मानते हुए 10 साल की सजा सुनाई गई.

शादी केवल तीन दिन ही चली

सजा के दौरान लड़की की शादी किसी दूसरे व्यक्ति से हो गई. लेकिन यह शादी केवल तीन दिन ही चली. उसके पुराने संबंधों की जानकारी मिलने पर पति ने उसे मायके भेज दिया. बाद में जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद युवक ने लड़की से फिर संपर्क किया. दोनों के बीच सुलह हुई और बालिग होने के बाद उन्होंने शादी कर ली. शादी के बाद दोनों साथ रहने लगे. इसके बाद महिला ने मद्रास हाईकोर्ट में कहा कि वह अपने पति के साथ शांतिपूर्वक जीवन बिताना चाहती है और उसकी सजा रद्द की जाए. लेकिन हाईकोर्ट ने इससे इनकार कर दिया.

 सुप्रीम कोर्ट ने युवक की सजा को रद्द कर दिया

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.  अदालत ने दोनों पक्षों की बात सुनी और उनके वैवाहिक जीवन की स्थिति की जांच कराई. सुनवाई के दौरान महिला ने अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए 10 लाख रुपये की मांग की, जिसे युवक ने अदा कर दिया. इसके बाद जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदूरकर की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए युवक की दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया.

पीठ ने कहा कि दोनों अब बालिग हैं, विवाह कर चुके हैं और साथ रह रहे हैं. इन विशेष परिस्थितियों को देखते हुए न्याय के हित में यह फैसला दिया जा रहा है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल इस मामले की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर दिया गया है और इसे भविष्य में किसी अन्य मामले में मिसाल  के रूप में नहीं माना जाएगा. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अब दोनों पति-पत्नी के रूप में समाज में शांतिपूर्वक जीवन जीने के लिए स्वतंत्र हैं.

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