जंतर-मंतर पर लंगर खिलाया, जाते-जाते छात्रों से बोले- 'गुस्सा आए, फिर भी संयम मत छोड़ना'
जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन खत्म हुआ तो लंगर भी सिमट गया, लेकिन सेवा करने वालों की यादें और सीख पीछे छोड़ गया.
दिल्ली में छात्रों का आंदोलन अब खत्म हो चुका है. सरकार ने उनकी मांगें मान ली हैं और प्रदर्शनकारी छात्र अपने-अपने घर लौट चुके हैं. लेकिन इन 37 दिनों के आंदोलन में जंतर-मंतर ने सिर्फ नारे, भाषण और भीड़ ही नहीं देखी. इस दौरान हजारों छात्रों ने इस जगह को अपना घर बना लिया था. वहीं कुछ ऐसे लोग भी थे, जो बिना किसी पहचान या स्वार्थ के सिर्फ सेवा करने पहुंचे. इन्हीं में से एक हैं प्रीतपाल सिंह.
मिडलैंड लंगर सेवा सोसाइटी से जुड़े प्रीतपाल सिंह अपने साथियों के साथ पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर के मुख्य मंच के पास लंगर चला रहे थे. 25 जुलाई की रात जब पुलिस आंदोलन स्थल खाली करा रही थी, तब वे भी अपना सामान समेटकर उसे बंगला साहिब गुरुद्वारे ले जाने की तैयारी कर रहे थे. वे कहते हैं, "हमारे गुरुओं ने हमें लंगर की परंपरा दी है. जहां भी जरूरत होती है, हम बिना जाति-धर्म देखे पहुंच जाते हैं."

मिडलैंड लंगर सेवा सोसाइटी से जुड़े प्रीतपाल सिंह (दाएं से दूसरे) और उनके साथी (फोटो- एनडीटीवी)
प्रीतपाल सिंह बताते हैं कि किसान आंदोलन के दौरान उनके NGO ने बड़े पैमाने पर लंगर सेवा दी थी. पिछले साल पंजाब में आई भीषण बाढ़ के समय भी उन्होंने गुरदासपुर और अमृतसर के आसपास राहत शिविर लगाकर लोगों को भोजन कराया था. वे कहते हैं, "गुरु नानक देव जी ने 20 रुपए से लंगर की परंपरा शुरू की थी और वह आज तक चल रही है. यह आगे भी लाखों साल तक चलती रहेगी. जंतर-मंतर पर हमसे जो बन पड़ा, हमने किया. दाल-रोटी से लेकर बर्गर-पिज्जा तक बच्चों को खिलाया. हमें जो भी मिल रहा था, हम सब बांट रहे थे. हम बिना किसी बजट के आए थे. बस गाड़ी में तेल भरवाया और सेवा करने आ गए. लोगों ने हमारी इतनी मदद की कि आखिर तक हमारे पास खाना बचा रहा. उसे हमने बच्चों में बांट दिया. जो सामान बचा है, उसे गुरुद्वारे पहुंचाया जा रहा है."

Photo Credit: मिडलैंड लंगर सेवा ने कैंप लगाकर प्रर्दशनकारी बच्चों को खाना खिलाया (फोटो- एनडीटीवी)
"हमें इन बच्चों की बहुत याद आएगी."
चार-पांच दिनों तक छात्रों के बीच रहने के बाद उनके मन में भी इस जगह के लिए अपनापन पैदा हो गया था. उन्होंने कहा, "हमें इन बच्चों की बहुत याद आएगी." लेकिन जाते-जाते उन्होंने युवाओं को एक जरूरी सीख भी दी. उन्होंने कहा, "पहले दिन पुलिस ने गलत किया, लाठी चलाई. लेकिन आखिर के दो-तीन दिनों में युवाओं ने भी गुस्सा दिखाया. कई बार गुस्सा आना भी लाजमी है. आज जीत हो गई है, लेकिन क्या पता भविष्य में फिर कभी आंदोलन करना पड़े. तब अपनी तरफ से संयम रखना. कोई गलत करता है तो भगवान देख रहा है. आप अपना ध्यान रखिए, अपने दोस्तों का ख्याल रखिए और किसी को खतरे में मत डालिए."
आखिर में उनका एक संदेश माता-पिता के लिए भी था. उन्होंने कहा कि अपने बच्चों पर पढ़ाई-लिखाई का इतना भी दबाव न बनाएं कि बाद में आपको पछताना पड़े.
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