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Explainer: 2011 में 29 तो अब 40 सवाल क्यों? इन सवालों के पीछे आखिर बदलते भारत की कौन सी कहानी छिपी है

Census 2027 में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बर्फीले इलाकों में आज से जनगणना का दूसरा फेज शुरू हो गया है. जानिए पूछे जाने वाले 40 सवालों को और आधार, जाति, बैंक अकाउंट समेत पहली बार पूछे जा रहे सवालों के पीछे की कहानी.

Explainer: 2011 में 29 तो अब 40 सवाल क्यों? इन सवालों के पीछे आखिर बदलते भारत की कौन सी कहानी छिपी है
  • जनगणना 2027: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जनगणना का दूसरा फेज शुरू; 40 सवालों में आधार, जाति और बैंक अकाउंट.
  • जनगणना 2027 के लिए सरकार ने 11,718.24 करोड़ रुपये का प्रावधान का व्यय (खर्च) मंजूर किया है.
  • जनगणना प्रक्रिया में 30 लाख से अधिक इन्युमरेटर्स, सुपरवाइजर्स, अन्य अधिकारी के शामिल होने की जानकारी दी गई है.

जनगणना 2027 के दूसरे चरण की शुरुआत जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड समेत उन बर्फीले इलाकों से हो रही है, जो साल का अंत आते-आते बर्फ से ढक जाते हैं. दूसरे फेज की जनगणना में 40 सवाल पूछे जा रहे हैं जिनके जरिए देश की आबादी की गिनती के साथ-साथ, वह कहां रहती है, कैसे रहती है, कहां से कहां जाती है, उसकी शिक्षा और रोजगार की स्थिति क्या है और समाज की संरचना में किस तरह का बदलाव आ रहा है यह समझने की कोशिश होगी. 17 अगस्त 2026 से देश के उन इलाकों से दूसरे फेज की शुरुआत हो चुकी है जहां मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को लेकर चुनौतियां हैं. इन इलाकों के लिए जनगणना की संदर्भ तारीख 1 अक्टूबर 2026 रखी गई है. जबकि देश के बाकी हिस्सों में यह प्रक्रिया फरवरी 2027 तक होगी और संदर्भ तारीख 1 मार्च 2027 की रखी गई है. 

इस बार जनगणना में क्या पूछा जाएगा इस पर अब तक विस्तार से जानकारियां दी जा चुकी हैं लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि इनकी जरूरत क्यों पड़ी और इससे क्या-क्या पता लगेगा? चलिए एक-एक कर समझते हैं.

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2011 में 29 सवाल थे, अब 40 क्यों?

बता दें कि 2011 की जनगणना में 29 सवाल थे. जबकि जनगणना 2027 के लिए 40 सवाल तय किए गए हैं. यानी प्रश्नावली में 11 सवालों की संख्या बढ़ाई गई है. दरअसल, पिछले डेढ़ दशक के दौरान भारत में आम आदमी की जिंदगी में कई बदलाव आए हैं. 2011 में स्मार्टफोन और डिजिटल पेमेंट आज की तरह आम नहीं थे. आधार इकोसिस्टम भी तब अपने शुरुआती दौर में था. इस दौरान कोविड-19 जैसी महामारी आई. बड़े पैमाने पर रोजगार का स्वरूप भी बदला. 

इस दौरान डिजिटल साक्षरता और सरकारी पहचान वाले दस्तावेजों की भूमिका बढ़ी है. इसलिए 2027 की जनगणना में ऐसे डेटा पॉइंट शामिल किए गए हैं जो आज के भारत को समझने में मदद कर सकते हैं. जनगणना 2027 पहली बार पूरी तरह से डिजिटल जनगणना है. इसमें सेल्फ इन्यूमरेशन यानी स्व-गणना की सुविधा दी गई है, तो सत्यापन करने आने वाले गणनाकार मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए जानकारी दर्ज करेंगे.

आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट क्यों पूछा जाएगा?

जनगणना में आधार, वोटर आईडी, पासपोर्ट, बैंक अकाउंट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे सरकार से जारी किए गए पहचान पत्रों से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं. 

हालांकि एक फर्क है. सरकार आपसे खाते के बैलेंस और उसमें लेन-देन की डिटेल नहीं मांग रही. बैंक अकाउंट के मामले में केवल खाता की संख्या पूछी जा रही है. तो सवाल ये नहीं है कि आपके खाते में रुपये कितने हैं, बल्कि आपके नाम पर कितने खाते हैं.

तो क्या जनगणना में लिए गए आपके निजी डेटा सुरक्षित रहेंगे?

अगर आधार, मोबाइल नंबर या वोटर आईडी जैसी जानकारियां जनगणना में जा रही हैं तो क्या बाद में इसे कोई एजेंसी इस्तेमाल भी कर सकती है? बता दें कि इसे लेकर आपको घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि जनगणना के दौरान यहां जो डेटा आपसे लिए जा रहे हैं, उन्हें सुरक्षित रखने के लिए कानून प्रावधानों को जोड़ा गया है. जनगणना अधिनियम 1948 की धारा-15 के तहत जनगणना में दी गई व्यक्तिगत जानाकारियों को गोपनीय रखा जाता है.

सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक व्यक्तिगत जानकारियों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता. इसे RTI यानी सूचना के कानून से भी परे रखा गया है. मतलब साफ है कि अगर कोई सूचना के कानून के जरिए जनगणना में दर्ज की गई जानकारियों की मांग भी करता है तो उसे नहीं दिया जाएगा. इन डेटा को न तो किसी संस्था के साथ साझा किया जाएगा और न ही किसी कोर्ट में सबूतों के तौर पर ही पेश किया जा सकेगा.

जनगणना की मोबाइल एप्लिकेशन की प्राइवेसी पॉलिसी भी कहती है कि इकट्ठा की गई सूचना का इस्तेमाल सरकार के जरिए संबंधित कानूनों और नियमों के तहत किया जाएगा. लिहाजा लोगों को जनगणना और सामान्य सरकारी डेटाबेस के बीच फर्क समझना जरूरी है.

फिर भी एक व्यावहारिक सावधानी बेहद जरूरी है.

किसी अनजान व्यक्ति को फोन पर जनगणना के नाम पर आधार ओटीपी, बैंक, पिन, पासवर्ड या पैसे से जुड़ी जानकारी न दें. इन्यूमरेटर के पास क्यूआर कोड वाले आईकार्ड होंगे जिससे उनकी पहचान वैरिफाई की जा सकती है.

जनगणना 2027 में जाति क्यों पूछी जा रही है?

जनगणना 2027 का सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक बदलाव जाति गणना है. 2011 की सामान्य जनगणना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना हुई थी. जनगणना 2027 में विस्तृत जाति गणना का का फैसला लिया गया.

इसे आबादी की गणना के दौर यानी दूसरे दौर में किया जाना 17 अगस्त 2026 से शुरू हो गया है. इससे आगे चलकर सरकार को यह समझने में मदद मिल सकती है कि अलग-अलग सामाजिक समूह की आबादी का फैलाव क्या है, उनकी शिक्षा और रोजगार की स्थिति क्या है और विकास से जुड़ी सुविधाएं उन तक पहुंचने में कितना फर्क है.

जनगणना से सरकार को तथ्य मिलते हैं. कुल मिलाकर देखें तो नीति निर्माताओं को और सरकार को यह नीतियों को तय करने में मददगार बनता है.

कोविड-19 वैक्सीन का सवाल अब क्यों?

जनगणना 2027 में कोविड-19 वैक्सीन से जुड़े डेटा पॉइंट को भी शामिल किया गया है. पहली नजर में सवाल उठ सकता है कि जनगणना में महामारी के टीके की जानकारी की क्या जरूरत है?

लेकिन इसका जवाब ये है कि कोविड के दौर ने जिस तरह स्वास्थ्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचों, मोबिलिटी और पब्लिक रिस्पॉन्स को गहराई से प्रभावित किया.

वैक्सिनेशन के डेटा और बाकी डेमोग्राफिक सूचनाओं के साथ देखें तो यह एक साथ शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को भविष्य में आबादी से जुड़े पैटर्न को समझने में मदद मिल सकती है.

माता-पिता और जीवनसाथी की जानकारी क्यों?

इस बार स्पाउस यानी पति या पत्नी के नाम और माता-पिता से जुड़ी जानकारी जैसे डेटा पॉइंट भी सवालों में शामिल किए गए हैं. इसके पीछे परिवार और हाउसहोल्ड स्ट्रक्चर को बेहतर समझने की जरूरत है.

भारत में परिवार का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. शहरीकरण बढ़ रहा है. संयुक्त परिवारों की जगह छोटे परिवार बढ़ रहे हैं. विवाह, पलायन और शादी के बाद रहने का पैटर्न भी बदल रहा है. अगर जनगणना के बाद व्यक्ति और परिवार से जुड़ी अधिक छोटे विवरण होंगे तो आबादी की संरचना को समझना अधिक आसान होगा.

बैंक अकाउंट की संख्या से क्या पता चलेगा?

बैंक खाते की संख्या पूछने का सवाल भी महत्वपूर्ण है. जनगणना अधिकारी के मुताबिक बैंक अकाउंट की संख्या पूछने का यह मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि सरकार इसके जरिए आपके बैंक की अन्य डिटेल (जैसे- खाते में कितना पैसा आता है. क्या खर्च करते हैं या फिर कितना पैसा मौजूद है) नहीं मांग रही है.

इससे केवल यह जानने में सहायता मिलेगी कि देश में कितने लोगों तक आर्थिक पहुंच की सुविधाएं मौजूद हैं. साथ ही यह भी कि कितने लोग बैंकिंग सिस्टम से जुड़े हैं, किस तरह की आबादी आर्थिक सेवाओं तक अपनी पहुंच बना रही है और किन इलाकों की आबादी का वित्तीय सुविधाओं से जुड़ाव कम है. इसे डेटा का भविष्य में भी विश्लेषण किया जा सकता है.

डिजिटल साक्षरता का सवाल क्यों महत्वपूर्ण है?

पूरे देश में आज सरकारी सेवाएं, बैंकिंग, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाएं और सूचनाओं का तेजी से डिजिटलीकरण हो रहा है. ऐसे में किसी डिजिटल साक्षरता यह समझने में मदद कर सकती है कि वह इस बदलती इकोनॉमी और गवर्नेंस सिस्टम में कितना जुड़ा हुआ है. भविष्य में अगर सरकार किसी कल्याण योजना को पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध कराती है तो यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि किन आबादी समूहों को डिजिटल पहुंच कम है और उन्हें डिजिटल स्किल्स की अधिक जरूरत है.

Census 2027 में कितने सवाल पूछे जाएंगे?

जनगणना 2027 के आबादी की गणना के चरण में 40 सवाल पूछे जा रहे हैं. 2011 में 29 सवाल थे. इस बार जाति, पहचान पत्रों, डिजिटल साक्षरता जैसे नए डेटा पॉइंट्स को शामिल किया गया है.

Census 2027 में आधार के बारे में क्यों पूछा जा रहा है?

जनगणना 2027 में आधार, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस जैसी सरकार की ओर से जारी किए गए डॉक्युमेंट्स की जानकारी मौजूदगी के आधार पर मांगी जा सकती है. जनगणना प्रमाणपत्र के मुताबिक बैंक खाते का बैलेंस या लेनदेन के विवरण नहीं मांगे जा रहे हैं.

क्या Census 2027 में जाति पूछी जाएगी?

हां. जनगणना 2027 में जाति पूछी जाएगी. इस पर फैसला बीते वर्ष अप्रैल में ही राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने ले लिया था. 

क्या Census का डेटा गोपनीय है?

हां. जनगणना अधिनियम 1948 के मुताबिक धारा-15 के तहत जनगणना में दी गई व्यक्तिगत जानकारी को गोपनीय रखा जाता है. आधिकारिक जनगणना डॉक्युमेंट्स के मुताबिक इसे सार्वजनिक, RTI या कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता है.

Census 2027 कब होगी?

देश के अधिकांश हिस्सों में जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में होना तय किया गया है. लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले इलाकों में यह 17 अगस्त से सितंबर 2026 तक चलेगा. इन क्षेत्रों के लिए संदर्भ की तारीख (यानी जिस तारीख पर जनसंख्या दर्ज की जाएगी) उसे 1 अक्टूबर 2026 रखा गया है.

Census 2027 का आधिकारिक पोर्टल क्या है?

जनगणना के बारे में जानकारी या स्व-गणना के लिए आधिकारिक पोर्टल se.census.gov.in है.

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