- 1 सितंबर से मणिपुर में शुरू होने वाला हाउस-लिस्टिंग चरण केंद्र ने स्थगित कर दिया.
- 14 सिविल सोसाइटी संगठनों समेत कई समूहों की मांग थी कि पहले एनआरसी लागू हो, फिर जनगणना कराया जाए.
- मैतेई और नगा संगठनों को म्यांमार से कथित अवैध प्रवासन के कारण राज्य की जनसांख्यिकी बदलने की आशंका है.
मणिपुर में होने वाली जनगणना को केंद्र सरकार ने फिलहाल टाल दिया है. मणिपुर के कई सिविल सोसाइटी संगठन यह मांग कर रहे थे कि पहले नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन यानी एनआरसी लागू किया जाए और उसके बाद ही जनगणना कराई जाए. गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में मणिपुर की स्थिति और जनगणना टालने की मांग पर चर्चा हुई और इसे फिलहाल टालने की फैसला लिया गया.
एनआरसी और जनगणना को लेकर विवाद क्या है?
जनगणना का मुख्य उद्देश्य देश की आबादी और उससे जुड़ी सामाजिक-आर्थिक जानकारी जुटाना है. वहीं एनआरसी का मकसद राज्य में वैध नागरिकों का रजिस्टर तैयार करना है. दोनों की प्रक्रिया और उद्देश्य अलग हैं.
मणिपुर में कुछ मैतेई और नगा संगठनों को आशंका है कि एनआरसी के बिना जनगणना कराने से राज्य में कथित अवैध प्रवासियों की आबादी का सही तरीके से पता नहीं चल पाएगा. इन संगठनों का आरोप है कि पड़ोसी म्यांमार से अवैध रूप से आकर यहां लोग बसे हैं. हालांकि कई लोगों का यह भी कहना है कि वहां से आने वाले कुछ लोगों के कुकी समुदाय के साथ जातीय संबंध हैं.
इसी वजह से 14 सिविल सोसाइटी संगठनों ने जनगणना से पहले एनआरसी लागू करने की मांग उठाई.

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शुरू होनी थी हाउस लिस्टिंग
मणिपुर में जनगणना के तहत हाउस-लिस्टिंग 1 सितंबर से होनी थी. लेकिन उससे ठीक पहले केंद्र ने इसे स्थगित कर दिया. फिलहाल केंद्र ने इसके लिए नई तारीखों की घोषणा फिलहाल नहीं की है.
फैसले के बाद मुख्यमंत्री युम्नाम खेमचंद सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया. उन्होंने कहा कि केंद्र ने लोगों की आवाज को सुना.
मुख्यमंत्री ने उन 14 सिविल सोसाइटी संगठनों और बीजेपी विधायकों के प्रतिनिधिमंडल के प्रयासों की भी सराहना की, जिन्होंने हाल में दिल्ली जाकर मणिपुर में एनआरसी लागू करने की मांग उठाई थी.

मणिपुर हाई कोर्ट
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मामला मणिपुर हाईकोर्ट भी पहुंचा
जनगणना टालने का मुद्दा मणिपुर हाईकोर्ट में भी उठा. कोर्ट में राज्य और केंद्र सरकार के वकीलों ने डिवीजन बेंच को बताया कि जनगणना अभियान को फिलहाल रोक दिया गया है.
इस मामले में कांगलेइपाक छात्र संघ और 14 सिविल सोसाइटी संगठनों के संयोजक सामाजिक कार्यकर्ता शांता नहाकपम की ओर से याचिकाएं दायर की गई थीं.
जनगणना टलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि मणिपुर में जनगणना कब शुरू होगा और क्या इससे पहले एनआरसी लागू करने की मांग पर केंद्र कोई ठोस फैसला लेगा.
यह मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि मणिपुर में आबादी, प्रवासन और समुदायों के बीच भरोसे का सवाल पहले से ही बेहद तनावपूर्ण है. जनगणना को लेकर लिया गया अगला फैसला सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि राज्य की राजनीति और अलग-अलग समुदायों के बीच चल रही जनसांख्यिकीय बहस पर भी इसका असर पड़ सकता है.
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