- पुरानी दिल्ली के कूचा महाजनी बाजार में सोना‑चांदी के थोक कारोबार में खरीदारों की संख्या में बढ़ोतरी
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में जियो‑पॉलिटिकल तनाव और डॉलर की कमजोरी के कारण सोना‑चांदी की कीमतों में तेज उतार‑चढ़ाव
- वैश्विक अनिश्चितता में निवेशक, केंद्रीय बैंक सोना‑चांदी को सुरक्षित निवेश विकल्प मानकर इसकी मांग बढ़ा रहे हैं
पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक में स्थित कूचा महाजनी भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े सोने‑चांदी के थोक बाजारों में से एक में इन दिनों खरीदारों की हलचल काफी बढ़ गई है. यह बाजार मुख्य रूप से सोने के जेवरात, बुलियन और कीमती धातुओं के थोक कारोबार के लिए जाना जाता है, जहां देश‑विदेश के व्यापारी बड़ी मात्रा में सोना‑चांदी की खरीद‑फरोख्त करते हैं.
अंतरराष्ट्रीय उथल‑पुथल से सोना‑चांदी में तेज उतार‑चढ़ाव
ऑल बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल, जो पिछले चार दशकों से कूचा महाजनी में सोना‑चांदी के कारोबार से जुड़े हैं, का कहना है कि हाल के दिनों में सोना‑चांदी की कीमतों में तेज उतार‑चढ़ाव देखने को मिला है. एनडीटीवी से बातचीत में योगेश सिंघल ने कहा कि सोना‑चांदी के भाव बढ़ने की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में मची उथल‑पुथल है.
जियो‑पॉलिटिकल तनाव और डॉलर कमजोरी का सीधा असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए जाने, वेनेजुएला के राष्ट्रपति के खिलाफ कार्रवाई, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव जैसी घटनाओं से दुनिया में जियो‑पॉलिटिकल टेंशन लगातार बढ़ रही है. इसका सीधा असर सोना‑चांदी के व्यापार पर पड़ रहा है. डॉलर का डी‑डॉलराइजेशन हो रहा है और रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस समय आपात जैसी स्थिति बनी हुई है.
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निवेशकों और सेंट्रल बैंकों की सेफ हेवन की ओर दौड़
बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के चलते दुनिया भर के निवेशक, आम खरीदार और यहां तक कि सेंट्रल बैंक भी सोना और चांदी को सेफ हेवन एसेट के तौर पर देख रहे हैं. इसी वजह से इनकी मांग और बिक्री में तेजी आई है. योगेश सिंघल के अनुसार, चाहे निजी निवेशक हों या यूरोपियन सेंट्रल बैंक, सभी सोना‑चांदी की बड़े पैमाने पर खरीदारी कर रहे हैं. भारत में भी निवेशक अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए सोना‑चांदी में निवेश करना ज्यादा बेहतर समझ रहे हैं.
US ट्रेजरी से निकलकर सोना‑चांदी में जा रहा निवेश
निवेश के लिहाज से इन दोनों धातुओं को सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है. अर्थशास्त्री और मार्केट एक्सपर्ट शरद कोहली ने एनडीटीवी से कहा कि दुनिया भर के सेंट्रल बैंक अमेरिकी ट्रेजरी में किए गए निवेश को बेचकर सोना‑चांदी खरीद रहे हैं. इसके अलावा जब‑जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करता है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना‑चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है.
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डॉलर इंडेक्स में गिरावट ने बढ़ाई कीमती धातुओं की चमक
डॉलर की कमजोरी को भी इसकी एक अहम वजह माना जा रहा है. जब डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे, तब डॉलर इंडेक्स करीब 108 के स्तर पर था, जो अब गिरकर लगभग 96 तक पहुंच गया है. डॉलर इंडेक्स, दुनिया के छह प्रमुख देशों की मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत का एक अहम पैमाना माना जाता है. अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ती अनिश्चितता और अमेरिका‑ईरान तनाव के चलते मध्य एशिया में युद्ध के गहराते बादलों के कारण अब डॉलर को पहले की तरह सुरक्षित मुद्रा के रूप में नहीं देखा जा रहा है.
सट्टा कारोबार और अनिश्चितता से बाजार में बनी अस्थिरता
सोना‑चांदी के कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इन दोनों कमोडिटीज में सट्टा कारोबार (speculative trading) भी बड़े पैमाने पर हो रहा है, जिससे कीमतों में उतार‑चढ़ाव और बढ़ गया है. योगेश सिंघल के मुताबिक, जब तक डॉलर की स्थिति स्थिर नहीं होती या उसकी जगह कोई दूसरी मजबूत करेंसी नहीं आती, तब तक सोना‑चांदी में निवेश का रुझान बना रहेगा. फिलहाल वैश्विक अनिश्चितता के चलते सोना‑चांदी की कीमतों और उनकी बिक्री में उतार‑चढ़ाव जारी रहने की संभावना है.
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