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ED Action: बैंकों को ₹899.35 करोड़ का लगाया था चूना, अब धोखाबाजों पर ED ने कसा शिकंजा

1.27 करोड़ रुपये मूल्य का सोना (ज्वेलरी) और कैश जब्त किया है. इसके अलावा, PMLA की धारा 17(1A) के तहत सख्त कदम उठाते हुए विभिन्न संदिग्ध बैंक खातों को प्रोविजनल रूप से फ्रीज (प्रतिबंधित) कर दिया गया है, जिनमें कुल 18 करोड़ रुपये की राशि जमा है.

ED Action: बैंकों को ₹899.35 करोड़ का लगाया था चूना, अब धोखाबाजों पर ED ने कसा शिकंजा
बैंकों को ₹899.35 करोड़ का लगाया था चूना, अब धोखाबाजों पर ED ने कसा शिकंजा
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बैंक धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में 'दीपक केबल्स (इंडिया) लिमिटेड' और उससे जुड़े ठिकानों पर बेगलुरु के अलग-अलग टिकानों पर छापेमारी कर 1.27 करोड़ रुपये की नकदी व सोना जब्त किया है, साथ ही 18 करोड़ रुपये के बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया है. कंपनी पर एसबीआई समूह से जुड़े बैंकों से ₹899.35 करोड़ की धोखाधड़ी और लोन के पैसों की हेराफेरी का आरोप है.

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में सोमवार को बड़ी कार्रवाई की. ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत 'मैसर्स दीपक केबल्स (इंडिया) लिमिटेड' (DCIL) और उससे जुड़े विभिन्न व्यक्तियों और संस्थाओं के परिसरों पर 21 मई 2026 और 29 मई 2026 को सघन तलाशी अभियान चलाया. इस छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी को कई ऐसे पुख्ता सबूत और दस्तावेज हाथ लगे हैं, जो इस पूरे घोटाले की कड़ियों को आपस में जोड़ते हैं.

करोड़ों की नकदी, सोना जब्त और बैंक खाते सीज

ED की इस कार्रवाई में बड़े पैमाने पर बेहिसाब संपत्ति का खुलासा हुआ है. तलाशी के दौरान दीपक केबल्स (इंडिया) लिमिटेड, कंपनी के डायरेक्टर के. वेंकटेश्वर राव, मैसर्स आधुनिक कॉरपोरेशन लिमिटेड (कोलकाता) के डायरेक्टर महेश अग्रवाल और अन्य आरोपियों से जुड़े ठिकानों से कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए. जांच एजेंसी ने PMLA, 2002 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए 1.27 करोड़ रुपये मूल्य का सोना (ज्वेलरी) और कैश जब्त किया है. इसके अलावा, PMLA की धारा 17(1A) के तहत सख्त कदम कार्रवाई करते हुए विभिन्न संदिग्ध बैंक खातों को प्रोविजनल रूप से फ्रीज कर दिया गया है, जिनमें कुल 18 करोड़ रुपये की राशि जमा है.

CBI की FIR के बाद शुरू हुई थी ED की जांच

इस पूरे मामले की शुरुआत केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज की गई एक FIR से हुई थी. CBI ने दीपक केबल्स (इंडिया) लिमिटेड (DCIL), इसके निदेशक के. वेंकटेश्वर राव और अन्य के खिलाफ भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व वाले बैंकों के एक कंसोर्टियम (समूह) के साथ 899.35 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज किया था. आरोप है कि कंपनी ने बैंकों से बड़ा लोन हासिल करने के लिए फर्जी वित्तीय विवरण जमा किए और अपने खातों की किताबों में हेरफेर किया. लोन मंजूर कराने के बाद इस भारी-भरकम राशि को मूल उद्देश्य से हटाकर दूसरी जगहों पर डाइवर्ट कर दिया गया.

फर्जी कंपनियों और सर्कुलर ट्रेडिंग का मायाजाल

ED की इस वित्तीय जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने इस महाघोटाले को अंजाम देने के लिए कई शेल कंपनियों और संस्थाओं का एक जटिल नेटवर्क तैयार किया था. इन कंपनियों के जरिए झूठी खरीद-बिक्री दिखाई गई और 'सर्कुलर ट्रेडिंग'की गई. यही नहीं, फर्जी कॉर्पोरेट गारंटियां भी जारी की गईं. इन फर्जी लेनदेन का मुख्य मकसद कंपनी के टर्नओवर को कागजों पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना था, ताकि बैंकों से ज्यादा लोन लिया जा सके, पुराने लोन को चुकाने का नाटक किया जा सके और अपराध की कमाई को निजी खातों व संबंधित कंपनियों में ट्रांसफर कर उसके अवैध स्रोत को छुपाया जा सके.

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जांच में यह भी पाया गया कि लोन की एक बहुत बड़ी राशि को बिना किसी ठोस व्यावसायिक कारण या तर्क के के. वेंकटेश्वर राव के नियंत्रण वाली सहयोगी संस्थाओं में ट्रांसफर कर दिया गया था. इन पैसों के इस्तेमाल का उद्देश्य पूरी तरह से संदिग्ध पाया गया है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने साफ किया है कि इस वित्तीय घोटाले की कड़ियों को पूरी तरह से जोड़ने के लिए आगे की जांच अभी तेजी से जारी है.

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