प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है जिस पर खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को ठगने का आरोप है. जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी विजय गुप्ता ने वर्षों तक अपनी ऐसी छवि बनाई कि लोग उसे केंद्र सरकार में प्रभावशाली पद पर बैठा व्यक्ति समझने लगे. इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने कई लोगों से लाखों और करोड़ों रुपये की ठगी की.
विदेश यात्राओं से बनाई प्रभावशाली पहचान
ED के मुताबिक यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एफआईआर के आधार पर की गई है. जांच में सामने आया कि विजय गुप्ता लोगों को भरोसा दिलाता था कि उसकी सरकार के बड़े अधिकारियों और मंत्रालयों तक सीधी पहुंच है. वह दावा करता था कि किसी भी अटके हुए काम को आसानी से मंजूरी दिला सकता है.
जांच एजेंसी का कहना है कि वर्ष 2016 से 2026 के बीच आरोपी ने 26 विदेश यात्राएं कीं. इनमें कई यात्राएं ऐसी थीं जिनकी तारीखें और देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी दौरों से मेल खाते थे. ED का आरोप है कि इन यात्राओं का इस्तेमाल उसने खुद को प्रधानमंत्री के साथ विदेश जाने वाले प्रभावशाली अधिकारी के रूप में पेश करने के लिए किया.
तस्वीरों के जरिए बढ़ाता था भरोसा
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अपनी विदेश यात्राओं की तस्वीरें साझा करता था. इसके अलावा वह बड़े सरकारी कार्यक्रमों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ खिंचवाई गई तस्वीरों का भी इस्तेमाल करता था. इन तस्वीरों को दिखाकर वह लोगों को यकीन दिलाता था कि उसकी सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंच है.
कारोबारियों से लाखों रुपये लेने का आरोप
ED के अनुसार जयपुर के कारोबारी दीपक शाह से आरोपी ने 7 लाख रुपये लिए थे. बदले में उसने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से मेडिकल उपकरणों की मंजूरी दिलाने का वादा किया था. हालांकि पैसे लेने के बाद कोई मंजूरी नहीं मिली.
जांच के दौरान एक अन्य गवाह ने भी दावा किया कि विजय गुप्ता खुद को PMO में तैनात अधिकारी बताता था. गवाह के अनुसार आरोपी ने उससे 60 लाख रुपये लिए लेकिन न तो काम कराया और न ही रकम लौटाई.
आर्थिक हालत ने भी खोली पोल
जांच एजेंसी को ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं जिनसे आरोपी के दावों पर सवाल खड़े होते हैं. ED के मुताबिक उसने एक दुकान से खरीदे गए सैनिटरी सामान के 14,900 रुपये तक का भुगतान नहीं किया था और उसे बकाया रकम के लिए बार-बार संदेश भेजे जा रहे थे. इससे उसकी वास्तविक आर्थिक स्थिति पर भी सवाल उठे हैं.
जमानत याचिका खारिज, जांच जारी
ED का कहना है कि आरोपी ने फर्जी पहचान और सरकारी प्रभाव का झूठा दावा करके लोगों से पैसे हासिल किए. इसी आधार पर उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत कार्रवाई की गई है. 13 जुलाई को दिल्ली की अदालत ने उसकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी.
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित ठगी का दायरा कितना बड़ा है, कितने लोग इसके शिकार हुए और क्या इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल थे.
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