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फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट के सहारे कई अस्पतालों के ICU में तैनात हुए जाली नर्स,  मेरठ से चल रहा था गोरखधंधा

मेरठ के एक कंप्यूटर सेंटर से संचालित हो रहे फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट के बड़े रैकेट का मुजफ्फरनगर पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. इसके साथ ही पुलिस ने गिरोह के 10 सदस्यों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में जाली दस्तावेज और उपकरण बरामद किए हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि इन फर्जी ANM और GNM डिग्री के दम पर कई अप्रशिक्षित युवा देश के बड़े अस्पतालों के ICU में मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे थे.

फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट के सहारे कई अस्पतालों के ICU में तैनात हुए जाली नर्स,  मेरठ से चल रहा था गोरखधंधा

Fake Degree Racket: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के स्वास्थ्य और सुरक्षा तंत्र को हिलाकर रख देने वाले एक बड़े मामले में मुजफ्फरनगर पुलिस (Muzaffar Nagar Police) को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. पुलिस ने मेरठ में चल रहे एक हाईटेक जाली दस्तावेज कारखाने का पर्दाफाश किया, जहां चंद रुपयों के बदले नर्सिंग (ANM और GNM) की फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट बांटी जा रही थी. इस संगठित गिरोह के तार देश के कई राज्यों से जुड़े हुए हैं. पुलिस ने मौके से मुख्य सरगना सहित 10 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में ककरौली पुलिस, एसपी ग्रामीण (SP RA) और सीओ भोपा की संयुक्त टीम ने एक सटीक इनपुट के आधार पर मेरठ स्थित 'विधु कंप्यूटर सेंटर' (साइबर कैफे) पर अचानक छापेमारी की. यह सेंटर फर्जीवाड़े का मुख्य अड्डा बना हुआ था. लिहाजा, पुलिस ने घेराबंदी कर मौके से कुल 10 लोगों को दबोच लिया, जिनमें इस रैकेट को ऑपरेट करने वाला मुख्य आरोपी कुलदीप भी शामिल है. पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह साल 2020 से लगातार सक्रिय था और अब तक सैकड़ों लोगों को जाली डिग्रियां बेच चुका था.

गिरफ्तार आरोपियों बरामद हुए ये सामान

पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपियों की पहचान शिवानंद, मनीष, कुलदीप, इस्माईल, आदिल, रितेश, जयंत भारती, सचिन पाल, संदीप कुमार और नितेश के रूप में हुई है. इनमें से अधिकांश आरोपी मेरठ के रहने वाले हैं, जबकि कुछ जानसठ और मीरापुर के निवासी हैं. इसके साथ ही छापेमारी के दौरान गई सामग्रियां भी बरामद की गई, जिनमें नर्सिंग कोर्स के 17 तैयार फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट, 10 मोबाइल फोन और 1 मोटरसाइकिल के साथ ही सीपीयू (CPU), हार्ड डिस्क, प्रिंटर मशीन, लेमिनेशन मशीन, आईडी फोटो पेपर, स्टेपलर और पारदर्शी फाइलें भी बरामद की गई. 

मरीजों की जान से खिलवाड़

इस मामले का सबसे डरावना पहलू यह है कि इन फर्जी सर्टिफिकेट्स के सहारे कई अप्रशिक्षित (untrained) युवक युवतियां देश के प्रतिष्ठित अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ के रूप में काम करते मिले. मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि जांच के दौरान पता चला है कि इन जाली डिग्रियों के आधार पर कुछ लड़के और लड़कियां मेरठ, नोएडा, शामली, बिजनौर और यहां तक कि मुंबई के नामी अस्पतालों में भर्ती हो गए. उन्होंने आगे बताया कि पकड़े गए आरोपियों में से एक युवक बकायदा एक बड़े अस्पताल के आईसीयू (ICU) में गंभीर मरीजों की देखभाल कर रहा था, जबकि कुछ अन्य लोग मरीजों को इंजेक्शन लगाने जैसे संवेदनशील काम कर रहे थे. यह सीधे तौर पर मानव जीवन और जनस्वास्थ्य के साथ एक गंभीर खिलवाड़ है. 

2,000 से 20,000 रुपये में बिकती थी डिग्रियां

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कबूला कि वे सामने वाले ग्राहक की मजबूरी और हैसियत देखकर सौदा तय करते थे. नर्सिंग डिप्लोमा और सर्टिफिकेट के लिए वे 15,000 से 20,000 रुपये तक वसूलते थे. वहीं, जान पहचान वालों को यह 2,000 रुपये तक में भी दे दिया जाता था. इस गिरोह ने ज्यादातर महिलाओं को अपना शिकार बनाया और उन्हें नर्सिंग के फर्जी सर्टिफिकेट्स थमा दिए. अब तक 50 से 60 ऐसे जाली सर्टिफिकेट्स की पुष्टि हो चुकी है, जो अलग-अलग राज्यों में सर्कुलेट किए गए.

जांच के लिए SIT गठित

मामले की संवेदनशीलता और इसमें शामिल मेडिकल सेक्टर की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरनगर एसएसपी ने एसपी ग्रामीण के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसमें सीओ भोपा को भी सदस्य बनाया गया है. इस एसआईटी में तकनीकी और मेडिकल क्षेत्र के एक्सपर्ट्स को भी शामिल किया गया है, ताकि उन अस्पतालों की पहचान की जा सके, जिन्होंने बिना वेरिफिकेशन के इन जालसाजों को नौकरी पर रखा.

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इस शानदार कामयाबी के लिए एसएसपी ने ककरौली पुलिस और पूरी टीम को 25,000 रुपये के नकद इनाम की घोषणा की है. पुलिस ने ककरौली थाने में आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जीवन को संकट में डालने वाली गंभीर धाराओं (318 BS, 336, 338, 340, 70/2026) के तहत मुकदमा दर्ज कर सभी को जेल भेजने की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.

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