- राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग से बैठक की मांग की थी लेकिन यह बैठक आज नहीं हो सकी
- विपक्षी सांसदों ने आकाशवाणी भवन में धरना दिया और चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की मांग की थी
- कांग्रेस ने चुनाव आयोग को लिखित रूप से मीटिंग की मांग भी की थी लेकिन आयोग ने इसे स्वीकार नहीं किया
राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों की ओर से चुनाव आयोग तक मार्च करने और आयुक्तों से मुलाकात की मांग को लेकर आयोग ने बयान जारी किया है. चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों से मीटिंग की मांग को लेकर राहुल गांधी ने धरना दे दिया था. वह आकाशवाणी भवन में जाकर सांसदों संग बैठ गए थे. इसके अलावा कांग्रेस ने आयोग को चिट्ठी लिखकर मीटिंग की मांग भी रखी थी. आज यह मीटिंग नहीं हो सकी और राहुल गांधी समेत करीब 50 सांसदों को लुटियन दिल्ली से हटा दिया गया. अब चुनाव आयोग का भी बयान आया है, जिसमें उसने विपक्ष की मीटिंग की मांग न मानने की वजह बताई है. चुनाव आयोग ने बयान जारी किया है.
इसमें उसने बताया, 'आज दिन में कुछ राजनीतिक दलों के निर्वाचन आयोग की ओर मार्च के दौरान मीडिया के माध्यम से यह पता चला कि कुछ सांसद अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ आयोग से मिलना चाहते हैं. आज के घटनाक्रम के संबंध में आयोग यह स्पष्ट करना चाहता है कि आज शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से निर्वाचन आयोग से बैठक के लिए समय नहीं मांगा था.'
शाम लगभग 4 बजे दिल्ली पुलिस से सूचना मिली कि नेता विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना चाहता है और ज्ञापन सौंपना चाहता है. भारत निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2025 में राजनीतिक दलों के साथ बैठकों के लिए एक प्रक्रिया निर्धारित की थी. इसकी जानकारी सभी राजनीतिक दलों को दी गई है और वे इसी प्रक्रिया का पालन करते हैं. जब भी किसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधिमंडल या कई दलों का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना चाहता है, तो वह अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से आयोग से मिलने का समय मांगता है. इसके बाद दोनों पक्षों की आपसी सहमति से तय किए गए समय पर मुलाकात होती है.
240 सांसदों संग मिलना चाहते थे राहुल गांधी, इसलिए खारिज हुआ प्रस्ताव
इसके आगे आयोग ने मीटिंग की बात को खारिज करने की वजह बताई. आयोग ने अपने बयान में कहा कि आज शाम 4 बजे के बाद सांसदों से मुलाक़ात के प्रस्ताव पर विचार चल रहा था. उन्हें दिल्ली पुलिस के DCP के द्वारा बताया गया कि जिस बैठक की मांग की जा रही थी, वह 240 सांसदों के समूह के साथ होनी थी और बैठक का प्रस्तावित स्थान संसद भवन 'Annexe' थी. निर्वाचन आयोग द्वारा विचार किया गया कि यह अनुरोध असामान्य है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि प्रोटोकॉल के अनुसार ऐसी मुलाकात भारत निर्वाचन आयोग के परिसर में ही होती है. ECI ने प्रस्ताव दिया कि माननीय सांसदों का ज्ञापन लेने के लिए आयोग के सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी को बैठक स्थल पर भेजा जा सकता है, जो कि अपने आप में ही एक अभूतपूर्व कदम होता.
आयोग बोला- हमारे प्रस्ताव को सांसदों ने खारिज कर दिया
इलेक्शन कमिशन ने कहा कि इस अनुरोध को भी माननीय सांसदो द्वारा अस्वीकार कर दिया गया. चुनाव आयोग देश की संसदीय और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करता है, और अपने स्वयं के प्रोटोकॉल और परंपराओं का भी सम्मान करता है, जो अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. कोई भी राजनीतिक दल किसी भी समय चुनाव आयोग से मिलने का अनुरोध कर सकता है. आयोग भी समय की अनुकूलता को देखते हुए मिलने की तारीख और टाइम तय कर सकता है. यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं