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SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, यूपी-बिहार समेत 17 राज्यों में वोटर लिस्ट का होगा SSR

एसआईआर पर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट की स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) का आदेश दिया है.

SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, यूपी-बिहार समेत 17 राज्यों में वोटर लिस्ट का होगा SSR

वोटर लिस्ट के SIR को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 17 राज्यों में स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) करने का आदेश दिया है. चुनाव आयोग ने जन प्रतिनिधि कानून की धारा 21 के तहत यह आदेश दिया है. इस रिवीजन के लिए 1 जनवरी 2027 को क्वालिफाइंग डेट माना गया है. इसका मतलब कि 1 जनवरी 2027 तक जो लोग भी 18 साल के पूरे हो रहे हैं, वे अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वा सकते हैं.

इन 17 राज्यों में होगा SSR

अभी 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SSR का आदेश दिया गया है. इनमें- अंडमान और निकोबार, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, मणिपुर, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल हैं.

इनमें से उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और गुजरात में अगले साल विधानसभा चुनाव भी होने हैं.

आयोग ने कहा है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR चल रहा है या हाल ही में पूरा हुआ है, वहां SSR का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा.

चार क्वालिफाइंग डेट पर मौका

चुनाव आयोग ने बताया कि 29 सितंबर को ही छूटे हुए और पहली बार वोटर बनने योग्य युवाओं के नामांकन के लिए विशेष अभियान के निर्देश दिए गए थे. 

अब उसी कड़ी में 1 जनवरी, 2027 के साथ-साथ 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर, 2027 को 18 साल पूरे करने वाले युवा भी एडवांस में आवेदन कर सकेंगे.

बाकी राज्यों का क्या?

आयोग ने साफ किया है कि जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया चल रही है या अभी पूरी हुई है, वहां SSR का शेड्यूल बाद में घोषित किया जाएगा. 

इनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा और तेलंगाना शामिल हैं.

इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जहां SIR अभी शुरू नहीं हुआ है, वहां मौसम की स्थिति को देखते हुए रोल रिवीजन का शेड्यूल तय किया जाएगा.

क्या होता है SSR?

यह प्रक्रिया हर साल होती है. पुरानी वोटर लिस्ट को ही आधार बनाकर ठीक किया जाता है. BLO घर-घर नहीं जाता, बस दावे-आपत्ति मांगे जाते हैं.

इसमें 4 तारीखें होती हैं- 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर. इन तारीखों पर जो 18 साल का हो रहा है, उसका नाम वोटर लिस्ट में जोड़ा जाता है.

इस प्रक्रिया में नए वोटरों के नाम जोड़े जाते हैं. इसके अलावा, अगर किसी वोटर की मौत हो गई है या पता बदल गया है तो नाम हटाया जाता है. वोटर कार्ड में सुधार भी इसी दौरान होता है.

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