- पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने तमिलनाडु में डीएमके की हार को वोट चोरी से जोड़ने से इनकार किया है
- कई राज्यों में मतदाता सूची से करोड़ों नाम बिना स्पष्ट कारण हटाए गए हैं, जिससे गंभीर त्रुटियां सामने आई हैं
- बंगाल में हटाए गए 22 लाख लोगों ने अपील की, पर छह महीनों में मात्र एक लाख की सुनवाई हुई है
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम का कहना है कि यह नहीं कहा जाता सकता कि तमिलनाडु में विजय की पार्टी टीवीके ने वोट चोरी की वजह से सरकार बनाई थी. तमिलनाडु के शिवगंगा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान पी. चिदंबरम ने मीडिया से बातचीत में यह बात कही. उन्होंने कहा, 'कई राज्यों में वोटर लिस्ट में SIR हुआ था. पहले राउंड में 65 लाख, दूसरे राउंड में 6.50 करोड़ और तीसरे चरण में 6.10 करोड़ वोटरों के नाम हटाए गए. इस तरह कुल 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटे हैं. यह पता ही नहीं चला कि करोड़ों लोगों को सूची से कैसे हटा दिया गया.'
पूर्व मंत्री ने कहा कि बंगाल में तो SIR से हटाए जाने वाले 22 लाख लोगों ने अपील की है. 6 महीनों में जजों की लीडरशिप में सिर्फ 1.26 लाख लोगों की अपीलों का निस्तारण हुआ है. इनमें से 91 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिनके नाम फिर से शामिल हुए हैं. यह एक बड़ी खामी है और एक आपराधिक षड्यंत्र है. 'द हिंदू' की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने यह भी कहा कि बची हुई अपीलों पर इस गति से तो 15 सालों में फैसला हो सकेगा. इस अवधि में तो तीन विधानसभा चुनाव होंगे और इतने ही लोकसभा इलेक्शन हो जाएंगे. लेकिन ये लोग किसी भी चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे.
इसी दौरान उन्होंने तमिलनाडु के इलेक्शन पर भी बात की. उन्होंने कहा कि यह कहना सही नहीं होगा कि TVK की जीत और DMK की हार सिर्फ वोट चोरी या मतदाता सूची में गड़बड़ी की वजह से हुई. चिदंबरम ने दावा किया कि देश के कई राज्यों में मतदाता सूचियों को लेकर गंभीर त्रुटियां सामने आई हैं और बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इन गड़बड़ियों के आधार पर पूरे चुनाव नतीजे को तय मान लेना उचित नहीं है. उनके मुताबिक TVK को चुनाव में करीब 35 फीसदी वोट मिले और पार्टी ने जीत हासिल की. ऐसे में यह दावा करना कि परिणाम केवल वोट हटाने या चुनावी गड़बड़ी के कारण आया, तथ्यों के अनुरूप नहीं है.
बोले- सिर्फ SIR से नतीजा बदला, ऐसा कहना गलत है
उन्होंने कहा कि कुछ मतदाताओं को गलत तरीके से सूची से हटाया जा सकता है, लेकिन सिर्फ उसी वजह से चुनाव परिणाम तय हुआ, यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. कांग्रेस लीडर ने कहा कि ऐसा ही महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक में भी हुआ है. नई दिल्ली में 2.70 लाख लोगों को हटा दिया गया है. ये लोग 24 वार्डों में थे. यह तो एक बड़ा अन्याय है. उन्होंने कहा कि अमर्त्य सेना और लालकृष्ण आडवाणी जैसे लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए. अब तक हम सोच रहे थे कि इस फैसले में तीनों चुनाव आयुक्त शामिल हैं. अब पता चला है कि दो अन्य आयु्क्त कह रहे हैं कि अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त ने ही इसका फैसला लिया था.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं