खरीफ सीजन की चुनौतियों के बाद अब आने वाले रबी सीजन 2026-27 पर अल-नीनो का खतरा गहराता जा रहा है. सोमवार को दिल्ली में शुरू हुए दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन– रबी अभियान 2026' में इसी खतरे से निपटने की रणनीति पर लंबी चर्चा हुई.
सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया. उन्होंने रबी की तैयारियों में ‘जल बजट' को सबसे अहम बताया. उन्होंने कहा कि हर राज्य और जिले को आकलन करना होगा कि सिंचाई के लिए कितना पानी उपलब्ध है. जहां पानी कम है, वहां कम पानी मांगने वाली फसलें जैसे दलहन और तिलहन को प्राथमिकता दी जाए.
ICAR और कृषि सचिव ने दी चेतावनी
सम्मेलन की शुरुआत में ICAR के DG डॉ. मांगी लाल जाट ने कहा, 'अल-नीनो के संदर्भ में रबी सीजन के दौरान बारिश की कमी को देखते हुए हमारी तैयारी क्या होनी चाहिए, इस पर काम करने की जरूरत है. इस संदर्भ में हमने जिला-स्तर पर प्लान बनाए हैं. हमने एक डायनामिक डैशबोर्ड भी तैयार किया है, जिसका इस्तेमाल रबी सीजन में किया जाएगा.'
केंद्रीय कृषि सचिव अतिश चंद्रा ने कहा, 'जो खरीफ सीजन गुजरा है वो काफी चुनौतीपूर्ण रहा है. पहले क्रॉप कवरेज और फिर फसल के सर्वाइवल में दिक्कत हुई. सभी आंकड़े दिखा रहे हैं कि आने वाले सीजन में प्रोडक्शन प्रभावित होने की संभावना है और रबी सीजन भी रेनफेड एरिया के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा.'
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WMO ने जारी की बड़ी चेतावनी
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अल-नीनो को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की है.
WMO के मुताबिक, अल नीनो मजबूती से स्थापित हो चुका है और फरवरी 2027 तक इसके बने रहने की लगभग 100% संभावना है. इसके चलते दुनियाभर में बाढ़, सूखा और अत्यधिक गर्मी का खतरा बढ़ गया है.
कर्नाटक और महाराष्ट्र में सूखे का संकट
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों का अध्ययन करने के लिए 3 अक्टूबर को कर्नाटक में केंद्रीय टीम भेजी जाएगी. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से भी बात हुई है, वहां भी टीम भेजी जाएगी.
उन्होंने कहा, 'क्लाइमेट चेंज का प्रभाव साफ दिख रहा है. एक तरफ महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सूखे का संकट है, तो दूसरी तरफ यूपी में भारी बारिश से मौतें हुई हैं. कर्नाटक ने सूखा डिक्लेयर किया है, महाराष्ट्र ने भी लगभग दो-तिहाई इलाके में सूखा डिक्लेयर किया है. मैं राज्यों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि केंद्र सरकार आपके साथ खड़ी है.'
मौसम विभाग के मुताबिक, कर्नाटक में औसत से 30% और महाराष्ट्र में 18% कम बारिश रिकॉर्ड की गई है. पंजाब में सबसे ज्यादा 42% और बिहार में 31% बारिश की कमी है.
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